
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नजदीक आते ही सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। राजनीतिक दल हर मोर्चे पर हमला और पलटवार करते हुए चुनावी मैदान में जोर-आजमाइश कर रहे हैं। इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया गठबंधन की एक रैली में अपनी मां को गाली दिए जाने वाले मामले को चुनावी मोर्चे पर उठाया, और इसे सियासी चर्चा का बड़ा मुद्दा बना दिया। वहीं, आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव ने इस चुनौती का जवाब देने के लिए मोदी की ही चाल को अपनाते हुए नई रणनीति खेली। Bihar Assembly Elections 2025
मोदी हमेशा की तरह विपक्षी हमलों का सामना शांत और ठोस तरीके से करते रहे हैं। उन्होंने अपने खिलाफ कहे गए अपशब्दों को केवल नजरअंदाज नहीं किया, बल्कि हर व्यक्तिगत हमला उन्होंने चुनावी रणनीति में बदलकर विपक्ष को कठघरे में खड़ा कर दिया। उनका ये तरीका—शालीनता के साथ आक्रामक सियासी दांव—अब बिहार चुनाव में भी विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती बनता नजर आ रहा है।
पीएम मोदी पर विपक्षी हमलों का सिलसिला कोई नई बात नहीं है। 2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव में सोनिया गांधी ने उन्हें ‘मौत का सौदागर’ कह दिया था, जो कांग्रेस के लिए भारी पड़ गया। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले मणिशंकर अय्यर ने उन्हें ‘चायवाला’ कहा, वहीं प्रियंका गांधी ने ‘नीच’ शब्द का इस्तेमाल किया। 2019 में राहुल गांधी का ‘चौकीदार चोर है’ वाला नारा भी मोदी के लिए चुनावी रणनीति में बदल गया और विपक्ष के लिए चुनौती बन गया।
अब बिहार विधानसभा चुनाव के पहले एक नया राजनीतिक खेल शुरू हुआ है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान दरभंगा में मंच से पीएम मोदी की मां को गाली दी गई। कांग्रेस और आरजेडी ने कहा कि उस समय राहुल और तेजस्वी मंच पर मौजूद नहीं थे। लेकिन पीएम मोदी ने इस घटना को गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा कि “जिस मां का शरीर भी नहीं है, उन्हें कांग्रेस और आरजेडी के मंच से अपशब्द सुनने पड़े। मां ही हमारे संस्कार, हमारा सम्मान होती हैं। बिहार जैसी समृद्ध परंपरा वाले प्रदेश में ऐसा होना कल्पना से परे है। मेरी मां का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं, फिर भी उन्हें अपमानित किया गया। इस घटना ने बिहार चुनाव में सियासी गर्माहट बढ़ा दी है और विपक्ष के लिए नया विवाद खड़ा कर दिया है। Bihar Assembly Elections 2025
पीएम मोदी की मां के खिलाफ कहे गए अपशब्द का मुद्दा बिहार में सियासी गरमाहट का कारण बन गया और बीजेपी ने इसे अपने चुनावी अभियान का हथियार बना लिया। विपक्ष की ओर से इस पर कोई ठोस जवाब नहीं मिल सका, लेकिन आरजेडी के तेजस्वी यादव ने तुरंत नई रणनीति खेली। उन्होंने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को अपने अभियान का केंद्र बनाया और “समृद्ध महिला, सशक्त महिला, सुरक्षित महिला” का नारा दिया।
तेजस्वी ने पटना के वेटरनरी कॉलेज में पार्टी की ओर से आयोजित महिला संवाद कार्यक्रम में कहा कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुई हैं, यह उनके अभियान की ताकत है। उन्होंने “मां-बहन सम्मान योजना” का ऐलान किया और MAA योजना की व्याख्या भी दी – एम से मकान, ए से अनाज और ए से आमदनी। तेजस्वी स्पष्ट कर रहे हैं कि बिहार की महिलाएं सूबे की असली ताकत हैं और उन्हें नाराज नहीं करना उनका चुनावी एजेंडा है। इस कदम से साफ हो गया है कि बिहार विधानसभा चुनाव में महिला वोटर्स की भूमिका निर्णायक रहेगी और तेजस्वी यादव इसे साधने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव में महिला वोटर्स अब हर दल के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य बन गए हैं। इंडिया गठबंधन में शामिल आरजेडी ने हाल ही में ‘मां योजना’ लॉन्च की, तो वहीं प्रियंका गांधी शुक्रवार को पटना के सदाकत आश्रम में करीब 2000 महिलाओं से रूबरू होंगी और संभवतः उनके लिए विशेष चुनावी घोषणा पत्र भी जारी करेंगी। प्रियंका की नजर उन महिलाओं पर है, जो सीधे जमीन से जुड़ी हैं—घरेलू कामकाजी महिलाएं, आशा वर्कर, मनरेगा मजदूर, जीविका दीदियां, डॉक्टर और पेशेवर वकील।
वहीं दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 75 लाख महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये डीबीटी के जरिए भेजने का ऐलान किया है। यह तोहफा दिवाली से पहले उनके लिए बड़ी राहत और सियासी संदेश दोनों होगा। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे। कुल राशि करीब 7,500 करोड़ रुपये है, जो सीधे प्रदेश के खजाने से महिलाओं तक पहुंचाई जाएगी। Bihar Assembly Elections 2025
महिला वोटर्स की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एनडीए में नीतीश कुमार ने पिछले डेढ़ दशक में लगातार महिलाओं के हक में बड़े कदम उठाए हैं। 2006 में ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% सीटें आरक्षित करवाई गईं, बिहार इसे लागू करने वाला पहला राज्य बना। इसके अलावा मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना, 2016 में नौकरियों में 35% आरक्षण, और 2018 की मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना जैसे कदम महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में निर्णायक रहे हैं। इन योजनाओं के तहत छात्राओं को ग्रेजुएशन तक वित्तीय सहायता भी मिलती है। इस चुनावी जंग में साफ दिख रहा है कि महिला वोटर्स सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि सियासी रणनीति का सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं। Bihar Assembly Elections 2025