
बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी(RJD) नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने इस बार ऐसा दांव चला है, जिसने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। मुजफ्फरपुर की एक रैली में तेजस्वी ने न सिर्फ विरोधियों को जवाब दिया, बल्कि अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को भी सख्त संदेश दिया "महागठबंधन की सरकार बनेगी तो जो भी गलत करेगा, सजा पक्की है, चाहे वो अपना हो या पराया। इस रैली में उनके साथ कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी मौजूद थे। दोनों नेताओं का एक साथ मंच साझा करना न सिर्फ महागठबंधन में एकजुटता का संकेत था, बल्कि इसने एनडीए को भी एक अप्रत्यक्ष संदेश दिया महागठबंधन में मतभेद की गुंजाइश नहीं है। Bihar Elections 2025
तेजस्वी का यह बयान उस दौर से खुद को अलग करने का प्रयास है, जिसे विरोधी दल ‘जंगलराज’ कहकर आरजेडी पर निशाना साधते हैं। प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह तक बार-बार यह कहते रहे हैं कि “अगर आरजेडी आई तो बिहार फिर से जंगलराज में लौट जाएगा। तेजस्वी अब उसी आरोप को पलटने की रणनीति पर हैं। वह अपने बयानों और वादों के ज़रिए जनता को यह यकीन दिलाना चाहते हैं कि नई आरजेडी पुरानी नहीं है। अब पार्टी अपराध, भ्रष्टाचार और परिवारवाद की राजनीति से ऊपर उठकर ‘नए बिहार’ का चेहरा बनना चाहती है। Bihar Elections 2025
तेजस्वी यादव ने हालिया जनसभा में पलटवार का ऐसा तीर छोड़ा, जिसने विरोधियों को जवाब देने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा - “जब राज्य में घोटाले हों और सरकार चुप्पी साध ले, तब असली जंगलराज वहीं होता है।” तेजस्वी ने प्रधानमंत्री मोदी को याद दिलाया कि उन्होंने खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 55 घोटालों का ज़िक्र किया था, लेकिन आज तक किसी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? तेजस्वी यहीं नहीं रुके उन्होंने यूपी और अन्य बीजेपी शासित राज्यों में बढ़ते अपराधों का हवाला देते हुए कहा कि अगर आंकड़ों की बात करें तो अपराध दर में बिहार नहीं, बल्कि बीजेपी के ही राज्य आगे हैं। उनका संदेश सीधा था — “जंगलराज का ठप्पा अब आरजेडी पर नहीं, उन पर लगना चाहिए जो खुद कानून-व्यवस्था की दुहाई देते हैं।
तेजस्वी यादव अब आरोपों से बचने के बजाय, उन्हें अपना सबसे बड़ा हथियार बना चुके हैं। हाल ही में उन्होंने तीखा सवाल दागा -“जब कोई मंत्री पत्रकार को पीटता है, कैमरा छीन लेता है, उसे गाड़ी में खींचकर मारता है, तो क्या वो जंगलराज नहीं है? उनका यह बयान सीधा वार एनडीए सरकार पर था और यह दिखाता है कि तेजस्वी अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि हमलावर मूड में हैं। विरोधियों के पुराने आरोपों को वह अब पलटवार के सियासी हथियार में बदल रहे हैं। जिस शब्द ‘जंगलराज’ ने कभी आरजेडी की सियासत को घेरा था, अब तेजस्वी उसी शब्द को विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक बाण की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
तेजस्वी यादव इस चुनावी समर में युवाओं को अपने अभियान का केंद्र बना चुके हैं। हर रैली में उनका फोकस साफ रहता है रोजगार, भ्रष्टाचार मुक्त शासन और बदलाव की राजनीति। वे बार-बार दोहराते हैं, “हम झूठे वादे नहीं करते, हमारी सरकार बनेगी तो हर परिवार को रोजगार मिलेगा और बिहार को अपराध व भ्रष्टाचार से आजादी दिलाई जाएगी। तेजस्वी खुद को ‘नई सोच वाले नेता’ के रूप में पेश कर रहे हैं जो लालू युग की छवि से अलग और नई पीढ़ी की उम्मीदों से जुड़ा है। Bihar Elections 2025
उनका पूरा प्रचार अभियान इस संदेश के इर्द-गिर्द घूम रहा है कि अब बिहार को अतीत नहीं, भविष्य की ओर देखना चाहिए। लेकिन सवाल यही है क्या बिहार की जनता तेजस्वी के इस “नए बिहार” के वादे पर भरोसा करेगी, या फिर पुराने दौर की ‘जंगलराज’ वाली यादें फिर से उनके रास्ते में दीवार बन जाएंगी? इसका जवाब 14 नवंबर के नतीजे ही तय करेंगे। Bihar Elections 2025