तेजस्वी यादव का पलटवार : मैं डरने वाला नहीं, क्या जुमलाबाज कोई आपत्तिजनक शब्द है?
भारत
चेतना मंच
24 Aug 2025 02:03 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक पोस्ट शेयर करने के आरोप में दर्ज केसों को लेकर आरजेडी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने तीखा पलटवार किया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि उन्हें एफआईआर से कोई फर्क नहीं पड़ता, वे सच बोलते रहेंगे। तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए पूछा "क्या जुमलाबाज कोई आपत्तिजनक शब्द है?" Tejashwi Yadav's Attack :
कई राज्यों में केस, तेजस्वी का जवाब
तेजस्वी यादव के खिलाफ महाराष्ट्र के गढ़चिरौली और उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सोशल मीडिया पर "जुमलेबाज" कहकर अमर्यादित टिप्पणी की है। कटिहार में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ वोट अधिकार यात्रा में पहुंचे तेजस्वी ने शनिवार को कहा कि "ये लोग जितनी चाहे उतनी एफआईआर दर्ज करा लें, मुझे फर्क नहीं पड़ता। सच बोलना मेरा काम है और मैं बोलता रहूंगा।"
गया में लगेगी झूठ और जुमलों की दुकान
तेजस्वी यादव ने 22 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी के बिहार दौरे से पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाला था। इसमें उन्होंने लिखा था कि "आज गया में लगेगी झूठ और जुमलों की दुकान! प्रधानमंत्री जी, बिना हड्डी की जुबान से झूठ और जुमलों का हिमालय खड़ा करेंगे, लेकिन बिहार की जनता दशरथ मांझी की तरह इन पहाड़ों को तोड़ देगी।" यही पोस्ट अब उनके खिलाफ विवाद और कानूनी कार्रवाई का कारण बना है।
आरजेडी का बीजेपी पर वार
तेजस्वी के करीबी सहयोगी और राज्यसभा सदस्य संजय यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि "अगर हिम्मत है तो बिहार में प्राथमिकी दर्ज करें। महाराष्ट्र, यूपी या असम जैसे दूरदराज के राज्यों में केस कराने से क्या साबित होगा? हम चुनौती देते हैं कि देशभर के बीजेपी विधायक आकर हमारे नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएं।"
बीजेपी नेताओं की शिकायत पर कार्रवाई
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में स्थानीय बीजेपी विधायक मिलिंद नरोटे और उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में बीजेपी महानगर अध्यक्ष शिल्पी गुप्ता ने तेजस्वी यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिल्पी गुप्ता ने कहा कि "देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ तेजस्वी की अमर्यादित टिप्पणी से पूरा देश आहत है। ऐसे में उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।" अब सवाल यह है कि "जुमलाबाज" कहना राजनीतिक टिप्पणी की आजादी के दायरे में आता है या फिर इसे आपत्तिजनक माना जाएगा। इसी पर आने वाले दिनों में सियासत और गरमाने के आसार हैं।