Temple Management Course: इसके बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर Temple Management Course क्या होता है, इसमें क्या पढ़ाया जाता है, इसकी फीस कितनी होती है और इसे करने के बाद किस तरह के करियर के अवसर मिलते हैं।

अयोध्या के राम मंदिर के लिए नए CEO की तलाश के बीच एक ऐसा कोर्स चर्चा में आ गया है जिसके बारे में अब तक बहुत कम लोग जानते थे। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की सर्च कमेटी ने नए CEO के चयन के लिए प्रशासनिक और वित्तीय अनुभव के साथ-साथ मंदिर प्रबंधन का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। इसके बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर Temple Management Course क्या होता है, इसमें क्या पढ़ाया जाता है, इसकी फीस कितनी होती है और इसे करने के बाद किस तरह के करियर के अवसर मिलते हैं। आज देश के कई बड़े धार्मिक स्थलों पर हर दिन हजारों से लेकर लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में सिर्फ धार्मिक जानकारी होना ही काफी नहीं है बल्कि भीड़ को संभालना, दान और ट्रस्ट की व्यवस्था देखना, सुरक्षा, सफाई और पूरे सिस्टम को व्यवस्थित तरीके से चलाना भी बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसी जरूरत को देखते हुए टेंपल मैनेजमेंट जैसे प्रोफेशनल कोर्स की मांग लगातार बढ़ रही है।
Temple Management Course ऐसा प्रोफेशनल कोर्स है जिसमें बड़े मंदिरों और धार्मिक संस्थानों के संचालन से जुड़ी जरूरी बातें सिखाई जाती हैं। इस कोर्स का उद्देश्य ऐसे लोगों को तैयार करना है जो मंदिरों में आने वाली बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन, प्रशासन और अन्य जरूरी कामों को व्यवस्थित तरीके से संभाल सकें। इस फील्ड में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और पीजी डिप्लोमा जैसे अलग-अलग स्तर के कोर्स उपलब्ध हैं। शॉर्ट टर्म और डिप्लोमा कोर्स के लिए 12वीं पास होना जरूरी है, जबकि पीजी डिप्लोमा या बड़े प्रशासनिक पदों के लिए स्नातक की डिग्री आवश्यक होती है।
भारत में कुछ विश्वविद्यालय और धार्मिक संस्थान मंदिर प्रबंधन या इससे जुड़े विषयों की पढ़ाई कराते हैं। आंध्र यूनिवर्सिटी, विशाखापट्टनम में मंदिर प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स कराया जाता है। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) समय-समय पर मंदिर प्रबंधन से जुड़ी ट्रेनिंग और वर्कशॉप आयोजित करता है। इसके अलावा मुंबई यूनिवर्सिटी और कुछ संस्कृत विश्वविद्यालयों में हेरिटेज, धार्मिक पर्यटन और प्रबंधन से जुड़े कोर्स भी उपलब्ध हैं।
इस कोर्स की फीस दूसरे प्रोफेशनल कोर्स की तुलना में काफी कम मानी जाती है। सरकारी विश्वविद्यालयों और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में इसकी सालाना फीस आमतौर पर 5 हजार रुपये से 25 हजार रुपये के बीच होती है। हालांकि निजी संस्थानों और अलग-अलग ट्रस्ट की फीस उनकी अपनी व्यवस्था के अनुसार अलग हो सकती है। सर्टिफिकेट कोर्स आमतौर पर तीन से छह महीने तक चलते हैं। डिप्लोमा कोर्स एक साल का होता है जबकि पीजी डिप्लोमा की अवधि एक से दो साल तक हो सकती है।
इस कोर्स में सिर्फ धार्मिक परंपराओं की जानकारी ही नहीं दी जाती बल्कि बड़े संस्थान को व्यवस्थित तरीके से चलाने की ट्रेनिंग भी दी जाती है। इसमें भीड़ प्रबंधन, वित्तीय रिकॉर्ड और ऑडिट, ट्रस्ट से जुड़े कानूनी नियम, श्रद्धालुओं के लिए रहने और भोजन जैसी व्यवस्थाओं का संचालन, सफाई व्यवस्था और मंदिरों के इतिहास व सांस्कृतिक महत्व जैसे विषय शामिल होते हैं। इन सभी विषयों का उद्देश्य मंदिरों की व्यवस्था को बेहतर और सुरक्षित बनाना होता है।
देश में बड़े मंदिरों, धार्मिक ट्रस्टों और तीर्थ स्थलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही प्रोफेशनल मंदिर प्रबंधन की जरूरत भी बढ़ी है। इस कोर्स के बाद मंदिर ट्रस्ट, धार्मिक संस्थानों, तीर्थ प्रबंधन, हेरिटेज प्रोजेक्ट और धार्मिक पर्यटन से जुड़े कई क्षेत्रों में काम करने के अवसर मिल सकते हैं। अनुभवी लोगों को प्रशासनिक और प्रबंधन से जुड़े बड़े पदों पर भी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
Temple Management सिर्फ किताबों की पढ़ाई तक सीमित नहीं है। इस क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति के पास अच्छी कम्युनिकेशन स्किल, भीड़ को संभालने की क्षमता, संकट के समय तुरंत फैसला लेने की समझ और टीम के साथ काम करने का अनुभव होना जरूरी माना जाता है। इसके अलावा जिस धार्मिक संस्था में काम करना हो वहां की परंपराओं और नियमों की जानकारी भी अहम होती है। अयोध्या राम मंदिर के नए CEO के चयन में मंदिर प्रबंधन के अनुभव को प्राथमिकता दिए जाने के बाद यह कोर्स एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इससे यह साफ होता है कि अब बड़े धार्मिक संस्थानों में भी आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था को महत्व दिया जा रहा है। बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या, करोड़ों रुपये के दान और बड़े स्तर की व्यवस्थाओं को देखते हुए मंदिरों में प्रशिक्षित और अनुभवी प्रबंधन विशेषज्ञों की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है।
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