नई दिल्ली के IARI, PUSA में आयोजित तीन दिवसीय प्रदर्शनी में देश–विदेश की कंपनियां नवीनतम कृषि मशीनरी और एग्री-टेक समाधानों का प्रदर्शन कर रही हैं।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने कहा है कि भारतीय कृषि को अगले 5 से 10 वर्षों में तेज़ी से हरित ईंधन (Green Fuel) आधारित तकनीक की ओर बढ़ना होगा। इससे किसानों की लागत कम होगी और Vision 2047 के लक्ष्य पूरे करने में मदद मिलेगी। वे FICCI, FEDERUNACOMA और कृषि मंत्रालय द्वारा आयोजित EIMA Agrimach India 2025 की 9वीं अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी एवं कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि भविष्य की खेती में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर, CBG (कंप्रेस्ड बायोगैस) पर चलने वाली मशीनें और अन्य हरित ईंधन तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि मंत्रालय अपनी योजनाओं में इन तकनीकों को उच्च प्राथमिकता देगा।
कृषि सचिव ने इंडस्ट्री से कहा कि जेंडर बजटिंग को ध्यान में रखते हुए महिला किसानों के लिए जेंडर-फ्रेंडली उपकरणों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि खेती के कई कठिन काम महिलाएं करती हैं, इसलिए ऐसे उपकरण जरूरी हैं जो वास्तव में उनका बोझ कम करें। 2026 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा “इंटरनेशनल ईयर ऑफ वुमन फार्मर्स” घोषित किए जाने पर उन्होंने कहा कि यह महिलाओं के अनुकूल उपकरणों के विकास का सही समय है।
भारत में इटली के राजदूत एंटोनियो बार्टोली ने कहा कि भारत में इटली दूतावास में एक एग्रीकल्चर अटैची नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि इटली की करीब 20 कंपनियां भारत में कृषि मशीनरी का उत्पादन कर रही हैं, और आने वाले समय में इस संख्या को बढ़ाया जाएगा। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की हालिया G20 बैठक में दो देशों के बीच 20 बिलियन यूरो व्यापार का नया लक्ष्य तय किया गया।
आयोजन समिति के चेयरमैन और TAFE के ग्रुप प्रेसिडेंट टी.आर.केसवन ने कहा कि किसान कई महंगी मशीनें कुछ ही दिनों के लिए उपयोग करते हैं, इसलिए उन्हें खरीदना आर्थिक रूप से उचित नहीं होता। ऐसे में ‘एग्रीकल्चर ऐज़ ए सर्विस’ (Farming-as-a-Service) मॉडल किसानों के लिए उपयोगी साबित होगा—जैसे किराये पर सीडर और अन्य मशीनरी उपलब्ध कराना।