जाने माइक्रोग्रीन्स: स्वाद, स्वास्थ्य और व्यवसाय का नया विकल्प

माइक्रोग्रीन्स का उपयोग सलाद, सूप, सैंडविच, स्टिर-फ्राई और स्मूदी जैसी कई डिश में किया जाता है। रेस्तरां और स्वास्थ्य खाद्य स्टोर स्थानीय माइक्रोग्रीन्स उत्पादकों की ओर बढ़ते आकर्षण के साथ इस छोटे, स्वादिष्ट और पोषक तत्वों से भरपूर उत्पाद को अपने मेनू और स्टोर में शामिल कर रहे हैं।

Use of microgreens
माइक्रोग्रीन्स और आधुनिक कृषि (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar21 Jan 2026 02:07 PM
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माइक्रोग्रीन्स, छोटे और पौष्टिक अंकुरित पौधे, अब पाक कला और स्वास्थ्य प्रेमियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। शुरुआत में केवल सजावट के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले ये पौधे अब व्यंजनों में स्वाद और पोषण बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बन गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रोग्रीन्स में विटामिन ई, सी और के की मात्रा अधिक होती है, साथ ही बीटा-कैरोटीन और ल्यूटिन भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। जर्नल ऑफ एग्रीकल्चरल एंड फूड केमिस्ट्री के अनुसार, एक परिपक्व पौधे की तुलना में माइक्रोग्रीन्स में 40 गुना अधिक पोषक तत्व मौजूद होते हैं।

घरेलू खेती में आसान और लाभदायक

माइक्रोग्रीन्स उगाना पारंपरिक सब्जियों की तुलना में आसान है। इन्हें कटाई के लिए महज 6-7 दिन का समय लगता है और इसके लिए बड़े बगीचे की आवश्यकता नहीं होती। घर के अंदर वर्टिकल सेटअप में इनकी खेती करना भी संभव है, जिससे मौसम या प्राकृतिक प्रकोपों का असर नहीं पड़ता। ग्रो विशेषज्ञों का कहना है कि घर के अंदर माइक्रोग्रीन्स उगाना अधिक सुविधाजनक है, क्योंकि तापमान और रोशनी नियंत्रित रहती है। इसके लिए बुनियादी उपकरण जैसे ग्रो रैक, एलईडी लाइट्स और हार्वेस्ट टेबल ही काफी हैं। शुरुआती किसान 500 डॉलर से कम निवेश में इस व्यवसाय को शुरू कर सकते हैं।

लोकप्रिय बीज और कटाई

माइक्रोग्रीन्स के लिए मूली, मटर, सूरजमुखी, केल और ब्रोकली के बीज सबसे लोकप्रिय हैं। कटाई पौधे की लगभग 2-3 इंच ऊँचाई तक पहुँचने पर की जाती है। यह प्रक्रिया तेज़ है और एक सप्ताह में बिक्री योग्य उत्पाद तैयार हो जाता है।

स्वाद और उपयोग में बढ़ती लोकप्रियता

माइक्रोग्रीन्स का उपयोग सलाद, सूप, सैंडविच, स्टिर-फ्राई और स्मूदी जैसी कई डिश में किया जाता है। रेस्तरां और स्वास्थ्य खाद्य स्टोर स्थानीय माइक्रोग्रीन्स उत्पादकों की ओर बढ़ते आकर्षण के साथ इस छोटे, स्वादिष्ट और पोषक तत्वों से भरपूर उत्पाद को अपने मेनू और स्टोर में शामिल कर रहे हैं।

व्यवसायिक अवसर और लाभ

माइक्रोग्रीन्स उगाना केवल शौक नहीं बल्कि लाभदायक व्यवसाय भी बन गया है। घरेलू उत्पादकों के लिए यह एक कम समय और कम लागत वाला विकल्प है। विशेषज्ञों का कहना है कि 1020 ट्रे के सेटअप से 20-40 डॉलर प्रति ट्रे कमाई संभव है, जबकि उत्पादन लागत केवल 3-5 डॉलर है। पोषक तत्वों, स्वाद और आसान खेती के कारण, माइक्रोग्रीन्स भविष्य में कृषि और घरेलू उद्यमिता में एक प्रमुख विकल्प बनते जा रहे हैं।


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वफादारी का चरम, मालिक की अंतिम विदाई में साये की तरह साथ रहा कुत्ता

ग्रामीणों का कहना है कि पोस्टमार्टम हाउस के बाहर भी कुत्ता टकटकी लगाए इंतजार करता रहा। शव गांव लौटने के बाद अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान भी वह साए की तरह साथ रहा।

The dog became the guard
कुत्ता बना पहरेदार, अंतिम संस्कार तक नहीं हटा (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar21 Jan 2026 11:57 AM
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इंसान और पालतू जानवर के रिश्ते की एक मार्मिक तस्वीर मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से सामने आई है। करैरा थाना क्षेत्र के ग्राम बडोरा में एक पालतू कुत्ते ने अपने मृत मालिक के प्रति ऐसा समर्पण दिखाया कि गांववालों की आंखें नम हो गईं। कुत्ता पूरी रात अपने मालिक के शव के पास बैठकर पहरा देता रहा और पुलिस कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाते समय करीब 4 किलोमीटर तक ट्रैक्टर-ट्रॉली के पीछे दौड़ता रहा। जानकारी के अनुसार, ग्राम बडोरा निवासी 40 वर्षीय जगदीश प्रजापति ने कथित तौर पर घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलने पर परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के मुताबिक, जगदीश का पालतू कुत्ता रातभर शव के नीचे/पास बैठा रहा, जैसे वह आखिरी बार भी मालिक की सुरक्षा कर रहा हो।

पोस्टमार्टम ले जाते समय पीछे-पीछे दौड़ा

पुलिस द्वारा शव को ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर पोस्टमार्टम के लिए करैरा ले जाया जा रहा था। इसी दौरान कुत्ता धूप और धूल की परवाह किए बिना ट्रैक्टर के पीछे दौड़ता रहा। परिजनों ने उसकी हालत देखकर उसे बीच रास्ते में ट्रॉली पर बैठा लिया।

अंतिम संस्कार तक नहीं छोड़ा साथ

ग्रामीणों का कहना है कि पोस्टमार्टम हाउस के बाहर भी कुत्ता टकटकी लगाए इंतजार करता रहा। शव गांव लौटने के बाद अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान भी वह साए की तरह साथ रहा। बताया जा रहा है कि मालिक की मौत के बाद कुत्ते ने अन्न-जल तक त्याग दिया और चिता के पास गुमसुम बैठा रहा।

जांच जारी, सोशल मीडिया पर चर्चा

पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, कुत्ते की वफादारी की यह कहानी इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और सोशल मीडिया पर भी लोगों की भावुक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना रिश्तों में संवेदना और निस्वार्थ प्रेम का संदेश देती है।

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सोशल मीडिया पर वायरल हुई शख्स की अनोखी रिपोर्ट, पेट में दिखा गर्भाशय

पीड़ित ने जब इस गंभीर त्रुटि को लेकर डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालक से संपर्क किया, तो उन्होंने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। इस बीच, रिपोर्ट की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

Went viral on social media
निजी डायग्नोस्टिक सेंटर की लापरवाही उजागर (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar21 Jan 2026 10:03 AM
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मध्य प्रदेश के सतना जिले से स्वास्थ्य सेवाओं में भारी लापरवाही का मामला सामने आया है। एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर ने 47 वर्षीय पुरुष की सोनोग्राफी रिपोर्ट में गर्भाशय (यूट्रस) होने की पुष्टि कर दी। हैरानी की बात यह रही कि रिपोर्ट में गर्भाशय को उल्टा (रेट्रोवर्टेड) तक बताया गया। मामला सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

यह चौंकाने वाली घटना उचेहरा नगर पंचायत के अध्यक्ष निरंजन प्रजापति के साथ हुई। पेट दर्द और असहजता की शिकायत के बाद डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने 13 जनवरी को स्टेशन रोड स्थित सतना डायग्नोस्टिक सेंटर में सोनोग्राफी कराई थी। रिपोर्ट मिलने पर जब उसमें पुरुष शरीर में गर्भाशय होने का उल्लेख देखा गया, तो मरीज और उनके परिजन स्तब्ध रह गए।

सवालों के घेरे में डायग्नोस्टिक सेंटर

बता दें कि पीड़ित ने जब इस गंभीर त्रुटि को लेकर डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालक डॉ. अरविंद सराफ से संपर्क किया, तो उन्होंने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। इस बीच, रिपोर्ट की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसके बाद निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने दिए जांच के निर्देश

बता दें कि मामला तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज शुक्ला ने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है। मरीजों की सेहत के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है और यदि लापरवाही प्रमाणित होती है, तो संबंधित सेंटर पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मेडिकल मिरेकल या भारी लापरवाही?

इस घटना ने स्वास्थ्य तंत्र की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह की गलत रिपोर्ट के आधार पर इलाज या सर्जरी शुरू हो जाती, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते थे। फिलहाल यह मामला किसी ‘मेडिकल मिरेकल’ से ज्यादा मेडिकल लापरवाही का उदाहरण बनकर सामने आया है।

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