आज होगा सबसे बड़ा फैसला, कोर्ट पहुंचे मालेगांव ब्लास्ट केस के सभी आरोपी
Malegaon Blast Case
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:00 AM
मुंबई की विशेष NIA कोर्ट आज (गुरुवार) 2008 मालेगांव ब्लास्ट केस (Malegaon Blast Case) में बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाने जा रही है। फैसले से पहले साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सभी सात आरोपी अदालत पहुंच चुके हैं। इस केस की सुनवाई पिछले कई वर्षों से चल रही थी, और 19 अप्रैल 2025 को अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। Malegaon Blast Case
क्या है मामला?
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के मुस्लिम बहुल मालेगांव शहर में भीकू चौक पर एक मोटरसाइकिल में बम विस्फोट हुआ था। इस धमाके में 6 लोगों की जान गई थी और 101 लोग घायल हो गए थे। मृतकों में फरहीन उर्फ शगुफ्ता शेख लियाकत, शेख मुश्ताक यूसुफ, शेख रफीक मुस्तफा, इरफान जियाउल्लाह खान, सैयद अजहर सैयद निसार और हारून शाह मोहम्मद शाह शामिल थे।
शुरुआती जांच और ATS की भूमिका
धमाके के बाद पहले स्थानीय पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी लेकिन जल्द ही मामला महाराष्ट्र एटीएस को सौंप दिया गया। एटीएस ने जांच में दावा किया कि 'अभिनव भारत' नाम का एक संगठन इस हमले के पीछे था, जो 2003 से संगठित अपराध की तरह काम कर रहा था। सबसे अहम सुराग एक LML फ्रीडम मोटरसाइकिल से मिला जिसके इंजन और चेसिस नंबर से छेड़छाड़ की गई थी। असली नंबर की पहचान होने पर यह मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नाम पर रजिस्टर्ड पाई गई। इसके बाद अक्टूबर 2008 में साध्वी प्रज्ञा, शिवनारायण कालसांगरा और श्याम शाउ को गिरफ्तार किया गया। नवंबर तक कुल 11 गिरफ्तारियां हो चुकी थीं और MCOCA के तहत केस दर्ज किया गया।
आरोपों की जड़ और साजिश का दावा
प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, कर्नल पुरोहित ने कश्मीर से RDX लाकर महाराष्ट्र स्थित अपने घर में छिपाया था। बम को सुधाकर चतुर्वेदी के देवलाली छावनी क्षेत्र के घर में तैयार किया गया। मोटरसाइकिल पर बम लगाने का आरोप प्रवीण टक्कलकी, रामजी कालसांगरा और संदीप डांगे पर है। जांच एजेंसियों का कहना है कि रमजान से पहले मालेगांव जैसे संवेदनशील इलाके को निशाना बनाकर सांप्रदायिक तनाव फैलाने की साजिश रची गई थी। जनवरी 2009 में पहली चार्जशीट दाखिल की गई जिसमें 11 आरोपी और 3 फरार बताए गए।
केस का NIA को ट्रांसफर और कानूनी मोड़
2011 में यह केस राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपा गया। 2016 में NIA ने एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करते हुए MCOCA की धाराएं हटा दीं और कहा कि एटीएस ने कई झूठे सबूत जुटाए और गवाहों को डराया। हालांकि 2017 में अदालत ने यह तो माना कि MCOCA लागू नहीं हो सकता, लेकिन सात आरोपियों को आरोपमुक्त करने से इनकार कर दिया। ट्रायल UAPA, IPC और Explosive Substances Act के तहत जारी रहा।
लंबी ट्रायल प्रक्रिया और गवाहों की स्थिति
दिसंबर 2018 में केस का ट्रायल शुरू हुआ। कुल 323 गवाहों की गवाही कराई गई, जिनमें से 282 गवाह प्रॉसिक्यूशन के पक्ष में रहे। 39 गवाह अपने पुराने बयान से पलट गए जबकि 26 गवाहों की मौत गवाही से पहले हो गई। कई तकनीकी साक्ष्य जैसे कॉल डेटा रिकॉर्ड और वॉयस सैंपल भी कोर्ट में पेश किए गए। वहीं कुछ आरोपियों, विशेष रूप से साध्वी प्रज्ञा ने एटीएस पर हिरासत में प्रताड़ना का आरोप भी लगाया।
करीब 17 साल बाद आज अदालत इस बहुचर्चित केस में फैसला सुनाने जा रही है। सात आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल पुरोहित, मेजर (रिटायर्ड) रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर, सुधाकर धर द्विवेदी और समीर कुलकर्णी आज अदालत में मौजूद हैं। अब देश की नजरें मुंबई की विशेष अदालत पर टिकी हैं जहां न्याय का इंतजार आखिरकार खत्म होने जा रहा है।