नोएडा/लखनऊ। शायद आपने सुन ही लिया होगा कि आगामी पांच सितंबर (5 september) को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर शहर में किसानों की एक पंचायत हो रही है। किसान नेता इस पंचायत को ‘धर्मयुद्ध’ की संज्ञा दे रहे हैं। इस बीच विश्लेषकों ने दावा किया है कि यह पंचायत आजाद भारत के इतिहास की अब तक की ‘सबसे बड़ी पंचायत’ होगी।
दरअसल देश में चल रहा किसान आंदोलन एक के बाद एक नया इतिहास बना रहा है। पहले तो दिल्ली की सीमाओं को घेरने का इतिहास बनाया, फिर किसी एक अहिंसक आंदोलन में 718 किसानों के निधन ने एक नया पृष्ठ लिखा। इतना ही नहीं यह दुनिया में पहला ऐसा आंदोलन बन गया है जो रात-दिन लगातार 9 महीने से अधिक समय तक चला हो। आजादी के आंदोलन के दौरान महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह के पिता सरदार किशन सिंह ने नौ महीने का किसान आंदोलन चलाया था। पगड़ी संभाल जट्टा के नाम से चले उस आंदोलन के आगे अंग्रेज हुकुमत को भी झुकना पड़ा था। यह अलग बात है कि बाद में उस हुकुमत ने जुल्म ज्यादाती के सारे रिकार्ड तोड़ दिए थे।
देश की राजधानी की सीमाओं पर चल रहा किसान आंदोलन अब एक और इतिहास बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। होगा यह कि संयुक्त किसान मोर्चा नामक संगठन के बुलावे पर पांच सितंबर (5 September) को मुजफ्फरनगर शहर में स्थित राजकीय इंटर कॉलेज (G.I.C) के मैदान में एक महापंचायत होगी। किसान नेता इस पंचायत को मिशन यूपी (Mission.U.P) के साथ ‘धर्म युद्ध’ शुरू करने का आगाज बता रहे हैं।
इस दौरान चेतना मंच ने इस पंचायत को लेकर 1000 (एक हजार) से भी अधिक विश्लेषकारों की राय जानने का प्रयास किया है। सवाल था कि कैसी होगी 5 सिंतबर (5 September) की पंचायत? अधिकतर विश्लेषकों का यही जवाब था कि जिस प्रकार जमीनी स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं उससे साफ जाहिर है कि यह पंचायत आजाद भारत के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी पंचायत या यूं कहें कि सबसे बड़ी रैली अथवा जनसभा हो सकती है। पूरी दुनिया की मीडिया की नजर भी इस पंचायत पर रहेगी।
विदेशी मीडिया भी
बताया जा रहा है कि किसानों की पंचायत को कवर करने के लिए देश भर के मीडियाकर्मियों के साथ ही साथ विदेशी मीडियाकर्मी भी 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में रहेंगे।