बिहार के मधुबनी जिले के फुलपरास प्रखंड स्थित धोंधडीहा में आज भी ब्रिटिश शासनकाल की एक अनोखी धरोहर मौजूद है—वाटसन साहब द्वारा बनवाया गया क्लॉक टॉवर। यह टॉवर न केवल इतिहास का साक्षी है बल्कि आज भी स्थानीय लोगों के लिए दिशा-निर्देश का एक अहम केंद्र है।

बता दें कि जब अंग्रेजों का शासन था, तब आम लोगों के पास घड़ियां होना आम बात नहीं थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण घड़ी रखना एक विलासिता मानी जाती थी। ऐसे में क्लॉक टावर शहरों के सबसे ऊंचे स्थानों पर बनाए जाते थे, ताकि लोग दूर से ही समय देख सकें। क्लॉक टावर केवल समय बताने तक सीमित नहीं थे—ये उस समय सामाजिक गतिविधियों, त्योहारों और आपातकालीन घोषणाओं का प्रमुख केंद्र भी होते थे। साथ ही ब्रिटिश सत्ता और प्रशासनिक शक्ति के प्रतीक के रूप में इनका निर्माण करवाया जाता था।
स्थानीय लोगों के अनुसार, अंग्रेज अधिकारी वाटसन साहब ने धोंधडीहा में कई महत्वपूर्ण निर्माण करवाए थे। इनमें वाटसन हाई स्कूल, केनाल और यह क्लॉक टॉवर प्रमुख हैं। धोंधडीहा उस समय एक महत्वपूर्ण चौक हुआ करता था। यहां से झंझारपुर सहित चारों दिशाओं में अलग-अलग प्रखंड जुड़ते थे। ऐसे में क्लॉक टॉवर लोगों को समय के साथ दिशा बताने का भी काम करता था। आज भी यह टॉवर चौक इलाके के लिए रोड मैप की तरह कार्य करता है।
कुछ साल पहले यह ऐतिहासिक टॉवर जर्जर स्थिति में था। बाद में जल संसाधन मंत्रालय के प्रयास से इसकी मरम्मत कराई गई। उस समय संजय झा के पास यह मंत्रालय था। उनके द्वारा करवाए गए पुनर्निर्माण के बाद आज यह क्लॉक टॉवर बेहद आकर्षक और मजबूत रूप में खड़ा है। नई बड़ी घड़ी और साफ-सुथरे ढांचे के साथ यह टॉवर फिर से स्थानीय लोगों के लिए समय और दिशा दोनों बताने का भरोसेमंद केंद्र बन गया है।
धोंधडीहा में स्थित यह स्थान अब "टावर चौक" के नाम से प्रसिद्ध है। यहां से धोंधडीहा रेलवे स्टेशन, बड़ा बाजार, ब्लॉक रोड समेत कई महत्वपूर्ण जगहों तक आसानी से जाया जा सकता है। स्थानीय लोगों के लिए यह टॉवर सिर्फ एक पुरानी इमारत नहीं, बल्कि उनकी धरोहर, पहचान और इतिहास से जुड़ी एक भावनात्मक स्मृति है।