बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इस बार रिकॉर्ड 66.91% मतदान हुआ है, जो 1951 के बाद का सर्वाधिक आंकड़ा है। महिला मतदाताओं की 71.6% भागीदारी ने इस बार चुनाव की दिशा तय कर दी है। अब सबकी निगाहें 14 नवंबर पर टिकी हैं, जब मतगणना के नतीजे तय करेंगे कि एक बार फिर सत्ता में कौन लौटेंगा।

बता दे कि बिहार विधानसभा चुनाव ने इस बार ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाते हुए अब तक का सबसे अधिक 67.14% मतदान (मतदाता द्वारा बताए गए 66.91% के अंतिम आंकड़ों में थोड़ा संशोधन हो सकता है) हासिल किया है, जिसने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मचा दी है। दो चरणों में संपन्न हुए इस चुनाव के बाद, 14 नवंबर को होने वाली मतगणना से पहले आए एग्जिट पोल्स ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान जताया है।
बता दे कि अधिकांश प्रमुख एग्जिट पोल (जैसे दैनिक भास्कर, डीवी रिसर्च, जेवीसी, मैट्राइज़) ने एनडीए गठबंधन के लिए 135 से 167 सीटें जीतने की संभावना जताई है। बिहार विधानसभा में बहुमत के लिए आवश्यक 122 सीटों के आंकड़े को देखते हुए, ये अनुमान नीतीश कुमार की वापसी की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, एक-दो एग्जिट पोल ने महागठबंधन (RJD, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों का गठबंधन) को भी कड़ी टक्कर में या जीत के करीब दिखाया है, जिससे मुकाबले की अनिश्चितता बनी हुई है।
243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 सीटें है। औसतन एग्जिट पोल NDA को 140–157 सीटें दे रहे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बन सकते हैं।
बता दे कि इस बार का चुनाव महिलाओं की शक्ति को दर्शाने वाला साबित हुआ। पहले चरण में 68.5%, दूसरे चरण में 74.7% महिलाओं ने वोट डाला और पुरुष मतदान से 9% अधिक भागीदारी ने साफ किया कि महिलाएं अब बिहार की राजनीति में निर्णायक शक्ति बन चुकी हैं। नीतीश सरकार की साइकिल योजना, जीविका दीदी कार्यक्रम, पंचायतों में 50% आरक्षण और महिला रोजगार योजना ने महिला वोटर्स को एनडीए की ओर झुकाया है।
जहां तेजस्वी यादव ने ‘माई बहिन मान योजना’ के तहत महिलाओं को ₹30,000 देने का वादा किया, वहीं नीतीश सरकार ने चुनाव से पहले ही 1.4 करोड़ महिलाओं के खाते में ₹10,000 ट्रांसफर किए। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) ही NDA के पक्ष में निर्णायक साबित हो सकता है।
बता दे कि तीसरे मोर्चे के रूप में उतरे प्रशांत किशोर (PK) की जन सुराज पार्टी को एग्जिट पोल्स में झटका लगा है।अधिकांश सर्वेक्षणों ने पार्टी को 0–5 सीटों और लगभग 4–7% वोट शेयर का अनुमान दिया है। तीन साल की पदयात्रा और 1 करोड़ सदस्य के दावे के बावजूद, पार्टी फिलहाल ‘स्पॉयलर’ की भूमिका में दिख रही है।
बता दे कि बिहार की राजनीति अभी भी जातीय संतुलन पर निर्भर है। MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण RJD का आधार लव-कुश (कुर्मी-कुशवाहा) समीकरण JD(U) की रीढ़ सवर्ण वोट भाजपा की मजबूती है और इस बार कुशवाहा समुदाय (8%) सबसे निर्णायक ब्लॉक बनकर उभरा है। सभी प्रमुख दलों ने इस वर्ग के उम्मीदवारों को टिकट दिया है।
बतो दे कि बिहार के कुल मतदाताओं में 51% युवा (20–40 वर्ष) हैं।तेजस्वी यादव ने हर परिवार में एक सरकारी नौकरी का वादा किया एनडीए ने 5 साल में 2 करोड़ रोजगार देने की बात कही केंद्र की PM-SETU योजना और राज्य की निश्चय सहायता योजना को रोजगार बढ़ाने वाला कदम बताया गया।
बता दे कि किशनगंज जिले में 76.26% मतदान दर्ज हुआ है और राज्य में सबसे अधिक है। इसके बाद कटिहार (75.23%), पूर्णिया (73.79%) और सुपौल (70.69%) में भी जबरदस्त वोटिंग हुई। इन जिलों में मुस्लिम आबादी अधिक है और RJD-कांग्रेस गठबंधन की मजबूत पकड़ मानी जाती है, जिससे कुछ सीटों पर मुकाबला रोमांचक रहेगा।
एग्जिट पोल औश्र एआई के हिसा से फिर से नीतीश कुमार की सरकार की वापसी लगभग तय मानी जा रही है, जबकि तेजस्वी यादव मजबूत विपक्ष के रूप में बने रहेंगे। महिलाओं ने इस बार नीतीश की सत्ता में वापसी का सबसे बड़ा रास्ता तैयार किया है।