देश पूछ रहा सबसे बड़ा सवाल: आखिर ED के निशाने पर अनिल अंबानी क्यों?
Anil Ambani
भारत
RP Raghuvanshi
25 Jul 2025 05:14 PM
Anil Ambani: देश के जाने-माने उद्योगपति अनिल अंबानी (Anil Ambani) एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के घेरे में हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर ED ने इतने बड़े उद्योगपति अनिल अंबानी फिर क्यों तलब किया है और जांच की जड़ में असल में क्या चल रहा है? चलिए समझते हैं कि आखिर यह मामला है क्या और अनिल अंबानी पर सवाल क्यों उठ रहे हैं।
यह पूरा विवाद साल 2017 से 2019 के बीच यस बैंक द्वारा रिलायंस समूह की कंपनियों को दिए गए करीब ₹3,000 करोड़ के लोन से जुड़ा है। आरोप है कि अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले समूह ने इन फंड्स का गलत इस्तेमाल किया और पैसों को कथित तौर पर शेल कंपनियों में डायवर्ट कर दिया गया। ईडी को संदेह है कि ये लोन रकम अपने मूल उद्देश्य से हटकर दूसरी कंपनियों में निवेश और अंदरूनी लेन-देन के लिए प्रयोग की गई जो कि बैंकिंग नियमों का उल्लंघन है।
ईडी की जांच में क्या सामने आया?
प्रवर्तन निदेशालय की प्रारंभिक जांच में जो बातें सामने आई हैं वो हैरान करने वाली हैं। लोन मंजूर करते समय जरूरी वैरिफिकेशन नहीं किया गया। बैंकिंग नियमों और क्रेडिट पॉलिसी का खुला उल्लंघन हुआ। कई मामलों में पुराने और अप्रासंगिक दस्तावेजों के आधार पर लोन दिए गए। लोन को तय योजना के बजाय अन्य जगह ट्रांसफर किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियों को शक है कि यस बैंक के कुछ आला अधिकारियों और प्रमोटरों को रिश्वत दी गई, जिससे ये लोन बिना जांच-पड़ताल के पास हो गए। अगर यह साबित होता है तो मामला सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि आपराधिक श्रेणी में चला जाएगा। इस पूरे मामले में दो कंपनियां खास तौर पर जांच के केंद्र में हैं।रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) इसके कॉरपोरेट लोन पोर्टफोलियो में अचानक हुई बढ़ोतरी ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है।रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) एसबीआई पहले ही इसे फ्रॉड घोषित कर चुका है।
पहले से ही डगमगाई हुई है स्थिति
अनिल अंबानी पहले ही आर्थिक संकटों से जूझ रहे हैं। इस जांच ने उनकी कारोबारी साख पर और गहरा असर डाला है। उनकी कई कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही हैं और शेयर बाजार में इनकी स्थिति पहले से ही डगमगाई हुई है। फिलहाल जांच जारी है लेकिन जिस रफ्तार से ईडी कार्रवाई कर रही है उससे साफ है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह मामला सिर्फ एक उद्योगपति की आर्थिक गड़बड़ियों तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के बैंकिंग सिस्टम, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और नियामकीय व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।