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The Kashmir Files : आज ही की ‘‘काली रात’’ को बेरहमी का कहर बरपा था कश्मीर में

The Kashmir Files

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The Kashmir Files : जम्मू/नई दिल्ली। भारत का ताज कहे जाने वाले कश्मीर प्रदेश का दर्द आज से एक बार फिर सिनेमा घरों में नजर आएगा। (The Kashmir Files) जी हां पिछले वर्ष-2022 में सिनेमाघरों में कलैक्शन के सारे रिकार्ड तोडऩे वाली हिन्दी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) आज यानि 19 जनवरी 2023 से एक बार फिर से सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है।

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इस विषय में जाने माने पत्रकार मनोज रघुवंशी कहते हैं कि 33 वर्ष पहले आज ही की रात यानि 19 व 20 जनवरी की ही वह रात थी जब मासूम नागरिकों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी बेहरमी हुई थी।

श्री रघुवंशी ने चेतना मंच से कहा कि 19 जनवरी को ‘द कश्मीर फाइल्स’ के दूसरी बार सिनेमाघरों में रिलीज़ होने की ख़बर सिफऱ् निराली ही नहीं है। ये दर्शाती है कि कितना गहरा ज़ख्म है लोगों के मन पर, जो मरहम लगाने के दूसरे दौर की ज़रुरत पड़ी। दरअसल ठीक 33 साल पूरे हुए हैं उस मनहूस दिन को गुजऱे जब कश्मीर घाटी में मासूम हिन्दुओं पर इस्लामी आतंकवादियों ने बहुत बड़े पैमाने पर हमला कर दिया था।

19-20 जनवरी के दरमियान की उस काली रात को शुरू होने वाले उस घातक हमले की कड़वी सच्चाई ‘द कश्मीर फाइल्स’ में बिना लाग-लपेट के दिखलाई गयी है।

मासूम हिन्दुओं को जान से मारा गया, उनकी बेटियों के साथ बलात्कार किया गया, उनके मंदिर तोड़े गए, और उनके घरों पर जबरन क़ब्ज़ा किया गया।

आज चार लाख पीडि़त कश्मीरी पंडित पूरे देश भर में फैले हुए है, ये सबको दिखाई दे रहा है। लेकिन आतंक इतना ज़्यादा है कि आज 33 साल के बाद भी कश्मीरी पंडित चाह कर भी अपने घर वापस नहीं जा पा रहे हैं। पर ये सच न तो कभी बॉलीवुड ने दिखलाया, न कभी मीडिया ने बताया और न ‘धर्मनिरपेक्ष’ राजनेताओं ने फऱमाया।

‘प्रगतिशील’ लोग बहस इस बात पर करते हैं कि अनुच्छेद 370 या 35A  Article 370 or 35A ख़त्म करना सही था या ग़लत? लेकिन ‘उदारवादी’ शख्स कभी भी ये विचार नहीं करते कि कश्मीरी पंडितों के अपने घर वापस जाने के लिए हम सब क्या-क्या कर सकते हैं? बल्कि ये ‘बुद्धिजीवी’ इस बात पर ऐतराज़ करते हैं कि विवेक अग्निहोत्री ने ये फिल्म बनायी ही क्यों?

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श्री रघुवंशी कहते हैं कि मैं तो कभी-कभी दंग रह जाता हूँ जब किसी विशेष व्यक्ति को ये कहते सुनता हूँ कि कश्मीर के विषय में हमें कश्मीरियों से बात करनी चाहिए। उनका मतलब होता है हमें कश्मीरी मुसलमानों से बात करनी चाहिए। ये लोग जान बूझकर इस बात को नजऱअंदाज़ करते हैं कि कश्मीर के मूल निवासी कश्मीरी हिन्दू हैं। इस्लाम तो केवल 1400 साल पुराना है। कश्मीर तो प्राचीन काल से ऋषि कश्यप के नाम से जाना जाता रहा है। इसका अस्तित्व तो हजारों साल पुराना है।

श्री रघुवंशी सवाल छोड़ते हैं कि हिटलर ने यहूदियों पर अत्याचार किया था। इस्लामी आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार किया। इतिहास ने यहूदियों के साथ भी न्याय होते देखा। इतिहास कश्मीरी पंडितों के साथ भी न्याय होते देखेगा। लड़ाई बहुत जटिल है। लेकिन न्याय अवश्य मिलेगा। कब और कैसे? ये वक्त बताएगा।

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