बिहार विधानसभा चुनाव का सबसे अहम और अंतिम चरण मंगलवार को होने जा रहा है। इस दूसरे चरण में राज्य के 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इस चरण में 1302 उम्मीदवारों की किस्मत 3 करोड़ 70 लाख से ज़्यादा मतदाता तय करेंगे। यही चरण यह भी तय करेगा कि बिहार की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी।

बता दे कि दूसरे चरण में गया, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, नवादा, भागलपुर, बांका, जमुई, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, पूर्णिया, अररिया, कटिहार, किशनगंज, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण जैसे 20 जिलों में मतदान होगा। इस चरण की 101 सीटें सामान्य, 19 अनुसूचित जाति और 2 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।
इस फेज में सबसे बड़ी चुनौती एनडीए के सामने है। भाजपा 53 सीटों, जेडीयू 44 सीटों, हम 6, आरएलएम 4 और एलजेपी (रामविलास) 15 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं महागठबंधन की ओर से आरजेडी 71 सीटों, कांग्रेस 37, वीआईपी 7, सीपीआई (माले) 7, सीपीआई 4 और सीपीएम 1 सीट पर मैदान में है। ओवैसी की एआईएमआईएम 21 सीटों, जबकि प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी 120 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
पिछले चुनाव में इन 122 सीटों में से महागठबंधन ने 66, एनडीए ने 49, एआईएमआईएम ने 5 और बसपा ने 1 सीट जीती थी। भाजपा को 42, जेडीयू को 20, आरजेडी को 33, कांग्रेस को 11 और माले को 5 सीटें मिली थीं। बाद में बसपा और निर्दलीय विधायक जेडीयू में शामिल हो गए, जिससे एनडीए का आंकड़ा 68 तक पहुंच गया था।
बता दे कि सीमांचल की 24 सीटों पर मुस्लिम बहुल इलाकों में ओवैसी फैक्टर चर्चा में है। 2020 में महागठबंधन को यहां 12, एनडीए को 6 और एआईएमआईएम को 5 सीटें मिली थीं। शाहाबाद-मगध की 46 सीटों पर यादव, कुर्मी, भूमिहार और दलित मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। यहां पिछली बार दोनों गठबंधनों ने 23-23 सीटें जीती थीं। मिथिलांचल और चंपारण बेल्ट की 36 सीटों पर एनडीए ने पिछली बार अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन इस बार महागठबंधन रोजगार और विकास के मुद्दों को भुनाने की कोशिश में है।
प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी और ओवैसी की एआईएमआईएम दोनों ही गठबंधनों के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।
वहीं जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा के लिए भी यह चुनाव सियासी अस्तित्व की परीक्षा बन गया है।
इस चरण में कई दिग्गज नेताओं की साख दांव पर है। पूर्व उपमुख्यमंत्री रेणु देवी (बेतिया) और तारकिशोर प्रसाद (कटिहार) भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं। मंत्री लेशी सिंह, शीला मंडल, जयंत राज, नीतीश मिश्रा, ज़मा खान सहित कई नेताओं के भविष्य का फैसला भी इसी चरण में होगा। आरजेडी की बीमा भारती, बाहुबली आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद (जेडीयू), उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता कुशवाहा और एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान भी चुनावी मैदान में हैं।
बिहार के इस दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग ही तय करेगी कि सत्ता की चाबी एनडीए के हाथ में जाती है या महागठबंधन की झोली में गिरती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जो 122 में 60 से ज़्यादा सीटें पार करेगा, वही पटना की सत्ता पर काबिज़ होगा।