ढाई साल बाद भी खाली पड़ा है लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद!
भारत
चेतना मंच
06 Oct 2021 05:21 PM
राष्ट्रीय ब्यूरो।अमूनन संवैधानिक पदों को एक तय समय में भरने की परम्परा रही है।बावजूद मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान लोकसभा उपाध्यक्ष का पद पिछले तकरीबन ढाई साल से खाली पड़ा है। शुरूआती समय को छोड़ दिया जाय तो सरकार इसे भरने के लिए अब तक कोई कवायद करती भी नजर नहीं आ रही है।
बतादें कि लोकसभा उपाध्यक्ष एक संवैधानिक पद है। संविधान के अनुच्छेद 93 में प्रावधान है कि लोकसभा का गठन हो जाने के बाद लोकसभा अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का भी चुनाव हो जाना चाहिए। यद्यपि यह जरूरी नहीं है कि यह पद विपक्ष को ही मिले,लेकिन परम्परा के अनुसार अभी तक यह पद ज्यादातर विपक्ष के पास ही रहा है। मोदी सरकार भी इस परम्परा को अपनी ओर से तोड़ना नहीं चाहती है। लेकिन इसे भरने के लिए गंभीर भी नहीं है। जबकि लोकसभा गठन के कितने दिन के भीतर लोकसभा अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव हो,इसको लेकर संविधान में कोई समय-सीमा तय नहीं है। लगता है कि इसी का फायदा उठाकर सरकार अपनी सहूलियत के हिसाब से यह पद किसी विपक्षी दल को सौपना चाहती है। पहले उसने यह पद वाईएसआर कांग्रेस को देने की पेशकश की थी,लेकिन उनकी ओर से इनकार कर दिया गया। इसके बाद अभी तक इसे भरने की कोई और कवायद नहीं हुई। हालांकि इसे लेकर अब दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका भी दायर कर दी गई है।