बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने एनडीए की सत्ता में लगातार बने रहने की कहानी को एक बार फिर मजबूत कर दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने दसवें कार्यकाल की शपथ लेने जा रहे हैं।

बता दें कि भाजपा के सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा एक बार फिर डिप्टी मुख्यमंत्री के पद पर कायम रहेंगे। यह तिकड़ी पहले की तरह इस बार भी बिहार की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाली है। शपथ ग्रहण 20 नवंबर को गांधी मैदान में आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कई केंद्रीय मंत्री तथा एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहेंगे।
बता दें कि 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में NDA को 202 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिला है। JD(U) ने 85 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा और सहयोगी दलों ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। नीतीश कुमार प्रदेश के सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले मुख्यमंत्री हैं। जनता ने एक बार फिर उनके शासन, विकास और स्थिरता के मॉडल पर भरोसा जताया।
बता दें कि सम्राट चौधरी तारापुर से तीसरी बार विधायक चुने गए हैं। उन्होंने 2000 में राजनीति की शुरुआत आरजेडी से की थी, इसके बाद JD(U) और फिर 2017 में भाजपा में शामिल हुए। 2024 में उन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया है। उनके पास वित्त, स्वास्थ्य, शहरी विकास और पंचायती राज जैसे अहम मंत्रालय रहे हैं। सम्राट चौधरी के पिता शाकुनी चौधरी और मां पार्वती देवी भी प्रभावशाली राजनेता रहे हैं।
बता दें कि विजय सिन्हा लखीसराय से लगातार चौथी बार जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। 58 वर्षीय सिन्हा 2017 से 2020 तक श्रम संसाधन मंत्री, 2020-22 में विधानसभा अध्यक्ष और 2022-24 में नेता विपक्ष भी रहे। 2024 में डिप्टी सीएम बनने के बाद उन्होंने पुलिस, बिजली, पर्यटन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले। नए मंत्रिमंडल में उनके विभागों का बंटवारा जल्द तय किया जाऐगा।
बता दें कि भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक केपी मौर्य ने सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को बधाई देते हुए कहा है कि “यह जोड़ी फिट भी है और हिट भी। हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और अब बिहार—पार्टी आगे की चुनौतियों के लिए तैयार है। दोनों नेताओं ने पार्टी नेतृत्व का धन्यवाद करते हुए कहा कि वे पूरी मेहनत से राज्य के विकास के लिए काम करेंगे।
मंत्रिमंडल का स्वरूप: 16-17 नए मंत्री, क्षेत्रीय व सामाजिक संतुलन पर फोकस
बता दें कि 20 नवंबर 2025 के शपथ ग्रहण के बाद मंत्रिमंडल में 16–17 मंत्रियों को शामिल किया जाएगा। सभी क्षेत्रों, जातीय व सामाजिक वर्गों का संतुलन बनाए रखने पर जोर रहेगा।
चुनाव में छोटे दलों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है जिसमें LJP (RV): 19 सीटें, HAM: 5 सीटें, RLM: 4 सीटें और सरकार में LJP को 3 मंत्री पद, जबकि HAM और RLM को 1-1 मंत्री पद मिलने की संभावना जताई जा रही है।