जस्टिस वर्मा पर लटक रही बर्खास्तगी की तलवार, अब SC ने दिया बड़ा झटका
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 07:41 PM
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा (Justice Yashwant Verma) के लिए अब राह आसान नहीं रही। कैश कांड में घिरे जस्टिस वर्मा को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से बड़ा झटका लगा है। उन्होंने खुद के खिलाफ की गई इन-हाउस जांच और तत्कालीन चीफ जस्टिस की सिफारिश को चुनौती दी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उनकी याचिका खारिज कर दी। Supreme Court
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ कहा कि जांच समिति का गठन और उसकी प्रक्रिया पूरी तरह वैध है। बेंच में शामिल जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह ने यह भी कहा कि जस्टिस वर्मा ने जांच समिति को समय रहते चुनौती नहीं दी, इसलिए अब उनकी याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को जो पत्र भेजा था वह असंवैधानिक नहीं था।
इस्तीफे से किया साफ इंकार
अगर जस्टिस वर्मा स्वेच्छा से इस्तीफा देते हैं, तो वह न केवल महाभियोग से बच सकते हैं बल्कि उन्हें रिटायर्ड जज के तौर पर पेंशन और अन्य लाभ भी मिलेंगे लेकिन अगर उन्हें संसद महाभियोग के जरिए हटाती है, तो उनका पेंशन और सभी रिटायरमेंट लाभ खत्म हो जाएंगे। हालांकि जस्टिस वर्मा ने अभी तक इस्तीफे से साफ इनकार किया है और खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
संसद में महाभियोग प्रस्ताव दाखिल
जस्टिस वर्मा के खिलाफ संसद के दोनों सदनों में महाभियोग का प्रस्ताव दाखिल हो चुका है। लोकसभा में 152 सांसदों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। राज्यसभा में 54 सांसदों ने समर्थन जताया है। 21 जुलाई को राज्यसभा के तत्कालीन सभापति जगदीप धनखड़ ने भी महाभियोग नोटिस की पुष्टि की थी। लेकिन उसी शाम उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। अब 9 सितंबर को नए उपराष्ट्रपति के चुनाव के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, अगर कोई हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का जज खुद इस्तीफा देता है, तो संसद में मौखिक रूप से अपने इस्तीफे का ऐलान भी कर सकता है। ऐसे में महाभियोग की प्रक्रिया रुक सकती है। लेकिन अब सबकी नजर इस पर है कि क्या जस्टिस वर्मा खुद पद छोड़ते हैं या संसद में ऐतिहासिक महाभियोग की कार्यवाही शुरू होती है। Supreme Court