1947 की एक फ्रांसीसी खुफिया सेवा (सीक्रेट सर्विस) की रिपोर्ट में बोस की मौत का कोई जिक्र नहीं है। दस्तावेज में उनकी स्थिति 'अज्ञात' बताई गई थी, जिसने उनकी मौत की कहानी पर एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए।

Subhash Chandra Bose Indian History : सुभाष चंद्र बोस का नाम भारतीय इतिहास में जुनून और देशभक्ति का पर्याय है, लेकिन उनके जीवन का अंतिम अध्याय आज भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है। 23 जनवरी 1897 को जन्मे नेताजी की मौत को लेकर आज तक अनगिनत दावे और कई जांच आयोग अपने निष्कर्ष दे चुके हैं, लेकिन रहस्य का पर्दा नहीं उठ पाया है। क्या सच में 18 अगस्त 1945 को ताइपे में एक विमान दुर्घटना में उनकी मौत हुई थी? या फिर वो सालों तक गुमनामी के साए में जिंदा रहे?
आधिकारिक तौर पर यह माना जाता है कि 18 अगस्त 1945 को ताइपे (तत्कालीन ताइहोकू) में एक विमान दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु हो गई थी। ब्रिटिश खुफिया एजेंसी के अधिकारी कर्नल जे.जी. फिगेस ने 1946 में अपनी रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, गंभीर चोटों के कारण अस्पताल में उनकी मौत हो गई और उनका अंतिम संस्कार भी वहीं हुआ। बाद में उनकी अस्थियां टोक्यो के रेनकोजी मंदिर में रखी गईं। हालांकि, यह बात दिलचस्प है कि 1947 की एक फ्रांसीसी खुफिया सेवा (सीक्रेट सर्विस) की रिपोर्ट में बोस की मौत का कोई जिक्र नहीं है। दस्तावेज में उनकी स्थिति 'अज्ञात' बताई गई थी, जिसने उनकी मौत की कहानी पर एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए।
नेताजी की मौत की सच्चाई जानने के लिए सरकार ने समय-समय पर कई आयोग बैठाए:
कई दशकों तक एक मान्यता यह भी रही कि नेताजी सोवियत रूस में छिपकर रह रहे थे। यहां तक कहा गया कि स्टालिन इस बात से वाकिफ थे। लेकिन इस दावे को कोई ठोस सबूत या दस्तावेज कभी सामने नहीं आ सका, जिससे यह सिर्फ एक अफवाह बनकर रह गया।
नेताजी के इर्द-गिर्द घूमने वाला सबसे चर्चित सिद्धांत 'गुमनामी बाबा' या 'भगवन जी' का है। माना जाता है कि 1970 के दशक में फैजाबाद आए इस संत ने 16 सितंबर 1985 को मृत्यु का स्वागत किया।
बाबा की मौत के बाद उनके कमरे से बरामद सामान ने सबको हैरान कर दिया। उनके पास नेताजी के परिवार की तस्वीरें, कलकत्ता से आई चिट्ठियां और आजाद हिन्द फौज के अधिकारियों के पत्र मिले। नेताजी की भतीजी ललिता बोस ने वहां मिली वस्तुओं को देखकर उनकी पहचान की थी। हालांकि, जस्टिस विष्णु सहाय कमीशन (2016) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि गुमनामी बाबा नेताजी नहीं, बल्कि उनके एक अनुयायी थे। लेकिन सवाल फिर भी बना हुआ है कि आखिर एक अनाम साधु के पास इतने गोपनीय दस्तावेज और नेताजी के परिवार के सामान कैसे पहुंचे?
शाह नवाज खान से लेकर जस्टिस मुखर्जी तक, हर आयोग ने अपने-अपने नजरिए से रिपोर्ट दी। जहां एक तरफ ब्रिटिश रिपोर्ट और शुरुआती आयोग विमान दुर्घटना को मानते हैं, वहीं बाद के आयोगों ने इस पर गंभीर संदेह जताया है। आज भी लाखों देशवासियों के दिल में यह सवाल जिंदा है कि क्या 'भारत के टूटे ना' वाले इस देशप्रेमी ने आखिरी सांस कहां ली? क्या वो विमान दुर्घटना का नाटक करके कहीं और चले गए थे? यह रहस्य शायद हमेशा के लिए अनसुलझा रहे, लेकिन नेताजी का तेज और उनका बलिदान भारतीय इतिहास में अमर हमेशा रहेगा। Subhash Chandra Bose Indian History