विज्ञान के महान आविष्कारक निकोला टेस्ला विज्ञान की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। आर्थिक कठिनाइयों और अकेलेपन के बावजूद, उनका समर्पण कभी कम नहीं हुआ। उनका आविष्कार आज भी दुनिया को रोशन कर रहा हैं।

विज्ञान की दुनिया के महान आविष्कारक निकोला टेस्ला का नाम आज भी प्रेरणा का स्रोत है। 10 जुलाई 1856 को ऑस्ट्रियाई साम्राज्य के स्मिलजान गाँव में जन्मे टेस्ला ने आधुनिक तकनीकी दुनिया की नींव रखी। उनके आविष्कारों ने विद्युत, रेडियो, चुंबकत्व और वायरलेस तकनीक के क्षेत्र में क्रांति ला दी।
1884 में अमेरिका आए टेस्ला ने थॉमस एडीसन की कंपनी में काम करना शुरू किया। जल्द ही उनके और एडीसन के बीच ‘करंट का युद्ध’ छिड़ गया। जहां टेस्ला ने एसी (Alternating Current) प्रणाली की सुरक्षा और प्रभावशीलता पर जोर दिया, वहीं एडीसन डीसी (Direct Current) का पक्षधर था। टेस्ला ने वैज्ञानिक प्रयोगों के माध्यम से एसी प्रणाली की श्रेष्ठता साबित की और दुनिया के सामने अपनी पहचान बनाई।
टेस्ला के जीवन में कई महत्वपूर्ण आविष्कार हुए, जिन्होंने आधुनिक दुनिया को आकार दिया:
1893 के शिकागो वर्ल्ड फेयर में टेस्ला ने अपनी एसी प्रणाली का भव्य प्रदर्शन किया। नियाग्रा फॉल्स पर पहला बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट स्थापित कर उन्होंने एसी करंट की व्यावहारिकता को साबित किया।
टेस्ला के जीवन में सफलता के साथ-साथ कठिनाई भी थी। उन्होंने वेस्टिंगहाउस कंपनी के साथ अपने पेटेंट और रॉयल्टी के अधिकार छोड़ दिए, जिससे आर्थिक नुकसान हुआ। रेडियो के आविष्कार का श्रेय लंबे समय तक मार्कोनी को दिया गया, जबकि टेस्ला के योगदान को बाद में ही मान्यता मिली। उनका वॉर्डेनक्लिफ टावर प्रोजेक्ट भी अधूरा रह गया।
टेस्ला ने अपने जीवन के अंतिम वर्षों को अकेलेपन और गरीबी में बिताया। न्यूयॉर्क के एक छोटे होटल में 7 जनवरी 1943 को 86 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
टेस्ला के नाम पर चुंबकीय क्षेत्र की SI इकाई ‘टेस्ला’ रखी गई और उन्हें मरणोपरांत कई पुरस्कार और सम्मान मिले। अमेरिका, क्रोएशिया और सर्बिया में उनके नाम पर संग्रहालय, स्मारक और संस्थान स्थापित हैं।