आज सुप्रीम कोर्ट में होगी अहम सुनवाई, लिए जाएंगे कई फैसले!
Supreme Court
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 03:30 AM
Supreme Court: बिहार में चुनाव आयोग द्वारा लागू की गई वोटर लिस्ट की गहन समीक्षा प्रक्रिया (SIR) को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। इस प्रक्रिया के खिलाफ एनजीओ, राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में कुल 28 याचिकाएं दाखिल की हैं, जिनमें इसे गैर-पारदर्शी, असंवैधानिक और जनमताधिकार छीनने वाला बताया गया है। चुनाव आयोग ने इन आरोपों का जवाब देते हुए हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें SIR प्रक्रिया को पूरी तरह वैध, पारदर्शी और लोकतांत्रिक बताया गया है। आयोग ने यह भी कहा है कि इस प्रक्रिया के तहत अपात्र वोटरों को हटाना और पात्र वोटरों की सूची को दुरुस्त करना इसका उद्देश्य है।
चुनाव आयोग की दलीलें
आयोग के अनुसार, 24 जून 2025 को जारी आदेश के तहत यह प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की भागीदारी रही। 1.5 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) को नियुक्त किया गया है। यह प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951 के प्रावधानों के अनुसार है। चुनाव आयोग ने कहा कि मतदान का अधिकार नागरिकता, आयु और निवास जैसी शर्तों पर आधारित है। अगर कोई इन शर्तों को पूरा नहीं करता, तो उसे वोट का अधिकार नहीं मिल सकता और यह अनुच्छेद 19 या 21 का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।
याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां
मुख्य याचिकाकर्ता एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने आरोप लगाया है कि, SIR प्रक्रिया से Electoral Registration Officer (ERO) को अत्यधिक और अनुशासनहीन अधिकार मिल गए हैं। इससे बिना उचित जांच के लाखों वैध वोटरों के नाम हटाए जा सकते हैं। आधार और राशन कार्ड को मान्य दस्तावेजों की सूची से हटाया गया, लेकिन आयोग ने इसका कोई ठोस कारण नहीं बताया। ADR ने कहा कि यह प्रक्रिया मतदाताओं के साथ एक “बड़ा धोखा” है। उनकी याचिका के अनुसार, कई BLO खुद वोटरों की जानकारी के बिना फॉर्म भर रहे हैं। मृत लोगों के नाम से आवेदन किए जा रहे हैं। जिन लोगों ने कोई फॉर्म नहीं भरा, उन्हें SMS भेजकर कहा गया कि उनका फॉर्म सफलतापूर्वक सबमिट हो चुका है।
राजनीतिक नेताओं की याचिकाएं
राजद सांसद मनोज झा ने भी याचिका दायर कर कहा कि, पहली बार नागरिकों से "नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण" मांगा जा रहा है, जबकि पहले सिर्फ जन्मतिथि और निवास प्रमाण ही पर्याप्त होते थे। स्वराज इंडिया के नेता योगेन्द्र यादव ने दावा किया है कि, SIR प्रक्रिया से करीब 40 लाख वैध वोटर्स का नाम वोटर लिस्ट से हट सकता है, जिससे लोकतंत्र को गहरी चोट पहुंचेगी।
सुप्रीम कोर्ट की पिछली टिप्पणी
10 जुलाई को जस्टिस सुधांशु धूलिया की अगुवाई वाली वेकेशन बेंच नेआधार, वोटर ID और राशन कार्ड को फिर से मान्य दस्तावेजों में शामिल करने का निर्देश दिया था। साथ ही आयोग को बिहार में वोटर लिस्ट अपडेट का काम जारी रखने की अनुमति दी थी। आज की सुनवाई इस विवाद की दिशा तय कर सकती है। एक तरफ चुनाव आयोग है जो प्रक्रिया को सुधारात्मक और वैध मानता है, वहीं दूसरी तरफ याचिकाकर्ता हैं जो इसे लोकतंत्र और मतदाता अधिकारों पर हमला बता रहे हैं। क्या SIR प्रक्रिया जारी रहेगी या सुप्रीम कोर्ट इसमें बदलाव का आदेश देगा? इसका फैसला आज की सुनवाई में हो सकता है।