राहुल गांधी के हिंदू और हिंदुत्व को मुद्दा बनाने की ये हैं 5 वजहें
Rahul gandhi on hindu and hinduism
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 03:05 PM
हिंदू और हिंदुत्व को मुद्दा बनाने से किसे फायदा हो सकता है? जाहिर है आपके ज़हन सबसे पहला नाम बीजेपी का आएगा। चौंकने वाली बात यह है कि इस बार कांग्रेस पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं ने इन शब्दों को उछाला है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने हाल ही में अपनी किताब प्रकाशित की जिसमें उन्होंने हिंदुत्व की तुलना दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन बोको हराम से की है।
वहीं, राहुल गांधी ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदू धर्म और हिंदुत्व में अंतर है। उन्होंने कहा कि किसी सिख या मुस्लिम को पीटना हिंदुत्व है। हिंदू धर्म, ऐसा नहीं सिखाता।
कांग्रेस की मजबूरी
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर कांग्रेस ने अचानक से हिंदू और हिंदुत्व के मसले को क्यों उठाया ? क्या यूपी में महिलाओं को 40% टिकट देने और लड़कियों को स्कूटी और लैपटॉप देने का वादा कारगर होता नहीं दिख रहा है? लखनऊ में वाल्मिकी समाज के मंदिर में पूजा करने या लखीमपुरी खेड़ी और आगरा में दलित युवक की हत्या को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बाद भी कांग्रेस को जीत की उम्मीद नहीं दिख रही है? या इसकी कोई और वजह है?
पहली वजह
2014 के बाद, बदले राजनीतिक परिदृश्य में लोकसभा सहित विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के वफादार या धुर-समर्थक भी लगातार उससे दूर होते जा रहे हैं। यूपी में बीजेपी, बंगाल में टीएमसी और पंजाब, हरियाणा व दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाई है।
फिलहाल, कांग्रेस के सामने चुनाव जीतने से बड़ी चुनौती उस तबके के विश्वास को जीतना है जो किसी भी हालत में पंजे के निशान पर ही ठप्पा लगाता (ईवीएम का बटन दबाता) आया है।
दूसरी वजह
हिंदुत्व हमेशा से ही बीजेपी का चुनावी मुद्दा रहा है। मोदी और अमित शाह ने जातीय खेमों में बंटे हिंदू वोटरों को धर्म के नाम पर एकजुट कर बीजेपी के पाले में लाने में सफलता पाई है। इससे सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ क्योंकि, उसे अन्य धर्मों के अलावा दलितों और पिछड़ी जातियों का वोट मिलना बंद हो गया।
साथ ही, मोदी-अमित शाह के उग्र हिंदुत्व के चलते कांग्रेस ने खुद को अल्पसंख्यकों का हितैषी दिखाना भी बंद कर दिया ताकि, उस पर हिंदू विरोधी पार्टी होने का ठप्पा न लगे। नतीजा यह हुआ कि मुस्लिम मतदाता भी कांग्रेस छोड़ टीएमसी, एआईएआईएम या आम आदमी पार्टी जैसे क्षेत्रीय दलों को वोट देने लगे।
तीसरी वजह
दलित, पिछड़े और मुस्लिम मतदाताओं सहित कांग्रेस की सेक्युलर विचारधारा में विश्वास रखने वाले वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए कांग्रेस हर कोशिश कर रही है। हिंदू और हिंदुत्व के मुद्दे को हवा देकर कांग्रेस अपने धुर-समर्थक मतदाताओं को यह संदेश देना चाहती है कि वह अभी भी सेक्युलर पार्टी है।
पिछले दो लोकसभा चुनावों और यूपी, बिहार, बंगाल, दिल्ली जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की स्थिति लगातार कमजोर हुई है। अगले साल पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं जिसमें यूपी सबसे महत्वपूर्ण है।
चौथी वजह
यूपी में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है। धर्म और जातीय समीकरण को तोड़ने के लिए वह दलित, अल्पसंख्यक और महिला मतदाताओं को आकर्षित करने में लगी हुई हैं। यूपी में तो उन्होंने 40% सीटें महिलाओं को देने का ऐलान तक कर दिया है।
हिंदू और हिंदुत्व वाले बयान के बहाने कांग्रेस उन मतदाताओं को भी साधना चाहती है जो सिर्फ़ इसलिए बीजेपी को वोट देते हैं क्योंकि, राष्ट्रीय स्तर पर कोई मजबूत विकल्प नहीं है। कांग्रेस दिखाना चाहती है कि वह सभी धर्माों और जातियों के पक्ष में है लेकिन, राष्ट्रीयता या धर्म के नाम पर किसी भी तरह की कट्टरता या असहिष्णुता के खिलाफ है।
पांचवीं वजह
एनआरसी, सीआईए और कृषि कानूनों के खिलाफ चले लंबे किसान आंदोलन को समर्थन देने के बावजूद कांग्रेस यह विश्वास नहीं दिला पाई है कि वह किसके पक्ष में खड़ी है। अल्पसंख्यक, किसान और महिला कार्ड खेलने के बाद अब हिंदू और हिंदुत्व के बहाने कांग्रेस अच्छे और बुरे हिंदू को चुनावी मुद्दा बनाना चाहती है।
मोदी-अमित शाह के बाद योगी आदित्यनाथ का बढ़ता कद यह स्पष्ट संकेत है कि बीजेपी किन मुद्दों पर राजनीति करेगी। ऐसे में अब कांग्रेस को भी खुलकर यह बताना होगा कि उसकी विचारधारा क्या है।
हिंदू और हिंदुत्व के मुद्दे से कांग्रेस को चुनावी फायदा होगा या इस खेल में बीजेपी ही भारी पड़ेगी, यह तो आगामी चुनावी नतीजे ही बताएंगे। हालांकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यूपी में प्रियंका गांधी का सड़क पर आना और राहुल गांधी का हिंदू और हिंदुत्व पर खुलकर बोलना यह बताता है कि कांग्रेस ने सुर्खियों में रहना सीख लिया है।