बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर अमेरिकी निर्देशक फ्रांसिस फोर्ड कोपोला की प्रसिद्ध किताब ‘द गॉडफादर’ की यह लाइन पूरी तरह सटीक बैठती है कि अपने दोस्तों को करीब रखें और अपने दुश्मनों को और भी करीब रखें है।

बता दे कि बिहार विधानसभा चुनाव में इस पंक्ति ने नीतीश कुमार की रणनीति को जैसे सफलता की कुंजी बना दिया है। राजग के लिए यह मंत्र साबित हुआ, जिससे उन्होंने विपक्षी महागठबंधन की हर चाल को नजरअंदाज नहीं किया, बल्कि उसे सही वक्त पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और फिर चुनाव में जीत हासिल की थी।
बता दे कि बिहार चुनाव में नीतीश कुमार की राजनीति न केवल प्रखर थी, बल्कि हर एक विपक्षी कदम को ठंडे दिमाग से हराया है। महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव ने जब घोषणा की कि सत्ता में आने पर 200 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाएगी, तो नीतीश कुमार ने पलटवार करते हुए हर माह 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की और इससे गरीब और मध्यम वर्ग की उन बड़ी जनसंख्या को सीधे फायदा हुआ, जो पहले से ही बिजली बिल के मुद्दे से परेशान थे। इसके अलावा, प्रीपेड मीटर के मसले पर भी नीतीश कुमार ने जनता की चिंता को समझते हुए कोई कड़ा कदम नहीं उठाया और इसे एक चुनावी मुद्दा बनने से रोक दिया।
बता दे कि महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने "100 प्रतिशत डोमिसाइल" का मुद्दा उठाया था, जिसके जवाब में नीतीश ने 35 प्रतिशत महिलाओं के लिए सरकारी विभागों में आरक्षण की घोषणा कर दी है। यही नहीं, नीतीश कुमार ने अन्य कई मुद्दों पर भी विपक्ष के वादों का तगड़ा मुकाबला किया है। महिलाओं के लिए 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' के तहत एक करोड़ महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये ट्रांसफर किए गए, जो तेजस्वी यादव की ‘माई बहिन सम्मान योजना’ को एक बड़ा जवाब था।
बता दे कि नीतीश कुमार ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, बुजुर्ग महिलाओं, और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए कई योजनाओं की घोषणा की, जैसे आशा, आंगनवाड़ी और जीविका कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि और पेंशन में इजाफा। इन योजनाओं ने राजग को चुनावी मैदान में मजबूत किया और जनता को एक साफ, मजबूत विकल्प पेश किया। तेजस्वी यादव के वादे, जैसे "हर परिवार को सरकारी नौकरी" का असर अब तक कमजोर पड़ा हुआ था, क्योंकि यह वादा न तो राजद समर्थकों को विश्वसनीय लग रहा था, न ही इससे कोई ठोस बदलाव दिखा।
बता दे कि राजग की इन रणनीतियों ने विपक्षी महागठबंधन के लिए मुसीबतें खड़ी कर दीं। नीतीश कुमार के नेतृत्व में, बिहार में राजग ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की और सत्ता बरकरार रखी। उनकी यह सटीक और समयानुकूल रणनीति ने न केवल महागठबंधन के सभी वादों का तोड़ किया, बल्कि बिहार की जनता का भरोसा भी जीत लिया। नीतीश कुमार ने ‘द गॉडफादर’ की इस प्रसिद्ध लाइन का पूरी तरह से पालन किया है। अपने दुश्मनों को करीब रखा, उनकी हर चाल पर नजर रखी, और समय आने पर उसे मात दी। इसके परिणामस्वरूप, बिहार में राजग की सरकार फिर से सत्ता में बनी रही।