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ओमिक्रॉन के बारे में फैल रही यह गलत धारणा, वायरस से ज्यादा हानिकारक है ये!

Omicron in India

Omicron in India

ओमिक्रॉन (Omicron), मानव इतिहास में दूसरा सबसे तेजी से फैलने वाला वायरस है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 24 घंटे में दुनिया में लगभग 25 लाख लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।

शुक्रवार को अमेरिका में 7.51 लाख लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए जबकि, भारत में 1,40,883 कोरोना संक्रमित मिले हैं। ओमिक्रॉन (Omicron) के संक्रमण की गति डेल्टा वैरियंट से छह गुना ज्यादा है। तेजी से बढ़ रहे इस संक्रमण के प्रति लोगों में यह धारणा बन गई है कि यह जानलेवा नहीं है इसलिए, इससे घबराने की जरूरत नहीं है।

दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल ने बढ़ाई उम्मीद
इस धारणा में कितना दम है इसे समझने के लिए मेडिकल जर्नल ‘लैंसेट’ (The Lancet) में डॉक्टरों की एक टीम ने कोरोना के बीटा, डेल्टा और ओमिक्रॉन वैरिएंट की गंभीरता से संबंधित एक रिपोर्ट प्रकाशित की है।

इस रिपोर्ट में तीनों वैरिएंट से प्रभावित लोगों के अस्पताल में भती होने और मरने से जुड़े आंकड़े बताए गए हैं। इस टीम ने दुनिया के उन देशों के आंकड़े जमा किए हैं जहां इन तीनों वैरिएंट ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई। जैसे कि ओमिक्रॉन (Omicron) के असर को जानने के लिए टीम ने दक्षिण अफ्रीका (South Africa) के उस हिस्से के अस्पतालों के आंकड़ों का विश्लेषण किया है जहां ओमिक्रॉन से सबसे ज्यादा लोग प्रभावित हुए।

रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना के बीटा वैरिएंट (Beta Variant) से संक्रमित लोगों में से 18.9% को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा जबकि, डेल्टा वैरिएंट (Delta Variant) से प्रभावित 13.7% और ओमिक्रॉन से पीड़ित 4.9% को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।

इसी तरह मरने वालों की संख्या बीटा से 24.3%, डेल्टा से 24.2% और ओमिक्रॉन से 5.8% रही। इन आंकड़ों से साफ है कि कोरोना के पहले दो वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन (Omicron) से संक्रमित लोगों के अस्पताल में भर्ती होने और मरने का आंकड़ा लगभग चार गुना कम है। यानी, बीटा और डेल्टा से संक्रमित 100 में से औसतन 18 से 20 लोग अस्पताल में भर्ती हो रहे थे और उनमें से 3 या 4 की मौत हो रही थी जबकि, ओमिक्रॉन (Omicron) से संक्रमित होने वाले 100 में से 5 लोग ही अस्पताल में भर्ती होने वाली स्थिति में पहुंचते हैं।

तस्वीर के दूसरे पहलू की अनदेखी पड़ेगी भारी
इन आंकड़ों को देखकर आम धारणा बन गई है कि ओमिक्रॉन से घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन, तस्वीर के दूसरे पहलू की अनदेखी की जा रही है। ओमिक्रॉन (Omicron) के संक्रमण की दर पिछले दोनों वैरिएंट से छह गुना ज्यादा है।

मतलब, अगर बीटा और डेल्टा से 100 में से दो लोग संक्रमित या पॉजिटिव पाए जाते थे तो, ओमिक्रॉन 100 में से 12 लोगों को संक्रमित कर रहा है। जाहिर है कि अस्पताल में भर्ती होने और मरने वालों का आंकड़ा भी इसी अनुपात में बढ़ता है।

अमेरिका जैसे देशों में नहीं मिल रहे टेस्टिंग किट
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका (America) और यूरोप (Europe) के देशों में अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों की कमी पड़ गई है। इन देशों में इतने ज्यादा लोग संक्रमित हो रहे हैं कि कोरोना (Covid-19) की जांच करने वाले ​टेस्टिंग किट तक की कमी पड़ गई है। सरकारों को कहना पड़ रहा है कि लोग घरों में ही खुद से एंटीजन टेस्टिंग (Antigen Covid Test) करें और पॉजिटिव होने पर ही आरटीपीसीआर (Rt Pcr) टेस्ट करवाएं।

इतने सुविधासंपन्न और जागरुक देशों में जब यह हाल है तो, उम्मीद की जा सकती है कि अगर भारत में इसी दर से संक्रमण फैला तो क्या हाल होगा। हमें नहीं भूलना चाहिए कि अमेरिका (America) की आबादी महज 34 करोड़ है और भारत की 134 करोड़। इन देशों की तुलना में हमारे देश में अस्पताल और डॉक्टरों की भी बेहद कमी है।

बचने के केवल तीन ही रास्ते हैं
1. संक्रमण को फैलने से रोकने का एक ही रास्ता है कि लोग खुद से एहतियात बरतें। जरूरी होने पर ही सार्वजनिक जगहों पर जाएं या दूसरों के संपर्क में आएं। अगर जाना भी पड़े तो, दो गज की दूरी और मास्क का उपयोग करें और हाथ साफ करते रहें।

2. अच्छी बात यह है कि आज हमारे पास इस महामारी से लड़ने के कुछ हथियार मौजूद हैं। इसमें सबसे बड़ा अस्त्र टीकाकरण (Vaccination) है। सरकारों के साथ हर व्यक्ति को व्यक्तिगत तौर पर इसे अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और खुद से इस अभियान में शामिल होना चाहिए।

3. साथ ही, आज कई कंपनियों ने घर में ही कोरोना टेस्ट करने वाली किट उपलब्ध करा दी है। यह टेस्टिंग किट मेडिकल स्टोर पर आसानी से उपलब्ध हैं। नकली या फर्जी किट से बचने के लिए आप आईसीएमआर (ICMR) की वेबसाइट पर जा सकते हैं। यहां पर उन सभी कंपनियों और उनके प्रोडक्ट का नाम दिया गया है जिन्हें आईसीएमआर (ICMR) ने मान्यता दी है।

क्यों कारगर हैं घरेलू टेस्ट किट
विशेषज्ञों को मानना है कि ये एंटीजन किट (Antigen Covid Test) ओमिक्रॉन के मामले में काफी सफल हैं क्योंकि, इसका संक्रमण बहुत तेजी से होता है और जल्द ही शरीर में भारी मात्रा में वायरस पैदा हो जाते हैं। हैवी वायरस लोड को डिटेक्ट करने में एंटीजन टेस्ट (Antigen Covid Test) सहायक होते हैं। पॉजिटिव होने और किसी तरह के लक्षण न होने पर आप खुद को आइसोलेट (Isolation) कर सकते हैं और दूसरों को संक्रमित होने से बचा सकते हैं। इससे अस्पतालों और लैब एजेंसियों पर दबाव को कम किया जा सकता है।

भारत में तीसरी लहर (Third Wave) ने दस्तक दे दी है और पिछले दो दिन से लगातार एक लाख से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। इसकी गति से साफ है कि जल्द ही ओमिक्रॉन (Omicron) के मामले पिछले सारे रिकॉर्ड को बहुत पीछे छोड़ देंगे। ऐसे में सावधानी, जागरुकता और बचाव ही खुद को सुरक्षित रखने का रास्ता है। देखना यह है कि इन सबके बावजूद तीसरी लहर (Third Wave) का प्रकोप कितने दिन चलता है और इसका असर कितना गंभीर होता है।

– संजीव श्रीवास्तव

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