
Haryana News : चरखी दादरी। मां-बाप का ये सपना होता है कि उनका बच्चा बड़ा होकर खूब पैसा कमाए। एक दिन बड़ा आदमी बने.. अपने पैरों पर खड़ा हो और एक दिन उनके बुढ़ापे का सहारा बने। हर मां-बाप अपने बच्चे को अच्छी परवरिश देने के लिए जी तोड़ मेहनत करते हैं। अच्छी शिक्षा देने के लिए खुद दिन रात काम करते हैं, लेकिन कभी-कभी वही बच्चा अपने मां-बाप को ही भूल जाता है।
कभी-कभी बच्चे बड़े आदमी तो बन जाते है लेकिन एक अच्छा इंसान नहीं बन पाते। अब एक ऐसा ही दिल को दहलाने वाला मामला हरियाणा के चरखी दादरी से सामने आया है, जिसमें एक ऐसे मां-बाप ने आत्महत्या कर ली, जिनके बेटों के पास करोड़ों की प्रॉपर्टी है। यहां तक कि उनका पोता आईएएस अधिकारी था।
इनके बेटों के पास बाढड़ा में 30 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी है लेकिन अपने मां-बाप को खिलाने के लिए दो-जून की रोटी नहीं है। पोता आईएएस अधिकारी है लेकिन उसको अपने दादा-दादी की देखभाल करने का समय नहीं है।
मामला चरखी दादरी का है। एक बुजुर्ग दंपत्ति मौत को गले लगा लिया। इसके पीछे का कारण सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएंगी। दरअसल, 78 वर्षीय जगदीश चंद आर्य ने 77 साल की अपनी पत्नी भागली देवी को उनके बच्चे सही से खाना भी नहीं देते थे। इसी कारण से उन्होंने अपनी जीवन लीला को समाप्त कर लिया। इस आत्महत्या के पीछे का कारण उनके बच्चों द्वारा की गई उनकी अवहेलना है। उन्होंने एक सुसाइड नोट भी लिखा है, जिसे पढ़कर आपकी आंखों से भी आंसू निकल आएंगें, पढ़े ...
"मैं जगदीश चंद्र आर्य आपको अपना दुख सुनाता हूं। मेरे बेटे के पास बाढ़ड़ा में 30 करोड़ की संपत्ति है, लेकिन उसके पास मुझे देने के लिए दो वक्त की रोटी नहीं हैं। मैं अपने छोटे बेटे के पास रहता था। 6 साल पहले उसकी मौत हो गई। कुछ दिन उसकी पत्नी ने साथ रखा, लेकिन बाद में उसने गलत काम करना शुरू कर दिया। मैंने विरोध किया तो पीटकर घर से निकाल दिया।"
जगदीश चंद्र आर्य ने आगे लिखा, "घर से निकाले जाने के बाद मैं दो साल तक अनाथ आश्रम में रहा। फिर वापस आया तो उन्होंने मकान को ताला लगा दिया। इस दौरान मेरी पत्नी लकवा का शिकार हो गई और हम दूसरे बेटे के पास रहने लगे। कुछ दिन बाद दूसरे बेटे ने भी साथ रखने से मना कर दिया और मुझे बासी खाना देना शुरू कर दिया है। ये मीठा जहर कितने दिन खाता, इसलिए मैंने सल्फास की गोली खा ली। मेरी मौत का कारण मेरी दो पुत्रवधू, एक बेटा और एक भतीजा है। जितने जुल्म उन चारों ने मेरे ऊपर किए, कोई भी संतान अपने माता-पिता पर न करे। "
जगदीश चंद्र आर्य नोट में लिखा है कि मेरी बात सुनने वालों से प्रार्थना है कि इतना जुल्म मां-बाप पर नहीं करना चाहिए. सरकार और समाज इनको दंड दे। तब जाकर मेरी आत्मा को शांति मिलेगी। बैंक में मेरी दो एफडी और बाढ़ड़ा में दुकान है, वो आर्य समाज बाढ़ड़ा को दे दी जाएं।
जगदीश चंद्र आर्य लिखा है कि मेरी बात सुनने वालों से प्रार्थना है कि इतना जुल्म मां-बाप पर नहीं करना चाहिए। जिन बच्चों को हमने पाल कर बड़ा किया उन्होंने हमें दुत्कार दिया। सरकार और समाज इनको दंड दे। बैंक में मेरी दो एफडी और बाढ़ड़ा में दुकान है, वो आर्य समाज बाढ़ड़ा को दे दी जाए। बच्चों को इसका एक भी टुकड़ा न मिले। जगदीश आर्य ने कहा कि जब तक इन्हें दंड नहीं दिया जाता तब तक तक हमारी आत्मा को शांति नहीं मिलेगी।
29 मार्च की रात को जगदीश चंद्र और उनकी पत्नी ने जहरीला पदार्थ खा लिया था फिर पुलिस कंट्रोल रूम को जानकारी दी थी। जब मौके पर पहुंची पुलिस टीम तो दंपत्ति जीवित थे। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में जगदीश ने पुलिस को अपना सुसाइड नोट सौंपा। उस नोट को पढ़ने के बाद पुलिस वालों ने उनके परिवार वालों पर केस दर्ज किया। पुलिस ने पति-पत्नी को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन अंत में उनको बचाया नहीं जा सका।
जगदीश चंद्र आर्य का पोता एक आईएएस अधिकारी है। जगदीश चंद्र आर्य 2021 बैच के आईएएस विवेक आर्य के दादा हैं। विवेक आर्य के दादा-दादी ने प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। पोता आईएएस अधिकारी है लेकिन फिर भी उसके दादा-दादी को खाने के लिए खाना नहीं मिलता था।
Haryana - भारत में साल 2031 तक 19 करोड़ 40 लाख हो जाएगा बुजुर्गों का आंकड़ा
हाल ही में जारी हुए NSO के आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 में देश में बुजुर्गों की आबादी 13 करोड़ 80 लाख थी जो कि अगले एक दशक में यानी साल 2031 तक 41 फीसदी बढ़कर 19 करोड़ 40 लाख हो जाने का अनुमान है। देश में बढ़ते वृद्धाश्रम इस बात का संकेत हैं कि बुजुर्गों की देखभाल में समाज या सोशल सिक्योरिटी सिस्टम कहीं न कहीं पर्याप्त नहीं हैं। बुढ़ापे में आय की कमी, पेंशन की दिक्कत और परिवारों में देखभाल की कमी के बीच आज देश भर में 750 से अधिक ओल्ड एज होम हैं जो कि सरकारी और गैरसरकारी मदद से चल रहे हैं। एक वेलफेयर स्टेट को अपनी बुजुर्ग होती आबादी के लिए और किन बातों पर ध्यान देने की जरूरत है इसके लिए दुनिया में कई देशों में उठाए गए कदमों से सीख ली जा सकती है। खासकर फिनलैंड जैसे स्कैंडिनेवियन देशों से जो बेहतर लाइफस्टाइल और हैपीनेस इंडेक्स में दुनिया में सबसे आगे मानी जाती है। Haryana News