Tiranga Yatra : आतंकियों के निशाने पर तिरंगा यात्रा और यूपी के धार्मिक स्थल
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 12:49 AM
Lucknow : लखनऊ। आजादी के 75वीं वर्षगांठ पर चलाए जा रहे तिरंगा यात्रा पर आतंकी हमले का खतरा मंडरा रहा है। यूपी के आजमगढ़ से गिरफ्तार आईएसआईएस आतंकी सबाउद्दीन आजमी से पूछताछ में यह खुलासा हुआ है। यूपी एटीएस की शुरुआती जांच में सामने आया कि सबाउद्दीन की तिरंगा यात्रा पर हमले की साजिश थी। इसके अलावा आतंकियों के निशाने पर लखनऊ, आगरा, वाराणसी और मथुरा के धार्मिक स्थल हैं। इंट्रोगेशन में आतंकी सबाउद्दीन ने कई राज खोले हैं। यह आतंकी भले ही गिरफ्त में हैं, लेकिन उससे जुड़े लड़ाके अभी बाहर हैं। ऐसे में यूपी एटीएस चौकन्नी है। आतंकी से पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के बाद यूपी में अलर्ट घोषित किया गया है।
एटीएस को आशंका है कि सबाउद्दीन इकलौता नहीं था। उसकी तरह ही स्लीपर सेल में और लड़के होंगे, जो एक्टिव होने पर खतरा बन सकते हैं। इसलिए, एटीएस आजमगढ़ से लेकर कश्मीर तक सर्च ऑपरेशन चला रही है। पुलिस मुख्यालय ने यूपी में तिरंगा यात्रा के साथ प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। आतंकियों के निशाने पर तिरंगा यात्रा के साथ लखनऊ, आगरा, वाराणसी और मथुरा के धार्मिक स्थल हैं।
सबाउद्दीन ने सबाहु, दिलावर खान, बैरम खान व आजर के नाम से भी सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बना रखी थी। ये भी सामने आया है कि सबाउद्दीन असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी आल इंडिया मजलसि-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन यानी एआईएमआईएम से भी जुड़ा हुआ था। पार्टी के नाम पर युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहा था। मकसद आतंकी गतिविधियों में इन लड़कों को जोड़ना था। उसके पास से करीब 25 से ज्यादा लड़कों के मोबाइल नंबर मिले हैं।
एटीएस आतंकी सबाउद्दीन को 15 अगस्त के बाद रिमांड पर लेकर नए सिरे से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। एटीएस और सुरक्षा एजेंसी आजमगढ़, कानपुर, बाराबंकी, लखनऊ, देवबंद, सहारनपुर, मथुरा, आगरा और वाराणसी में स्लीपर सेल के नेटवर्क को तलाश रही है। फिलहाल, संवेदनशील शहरों के धार्मिक स्थल पर पीएसी की 150 कंपनी तैनात की गईं हैं।
आजमगढ़ के मुबारकपुर के गांव अमिलो में सबाउद्दीन रहता था। वो सोशल मीडिया के जरिए आईएसआईएस के आतंकियों के सीधे संपर्क में था। एटीएस ने उसके कब्जे से बम बनाने के उपकरण भी बरामद किए थे। वो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानी संघ के नेताओं से संपर्क का प्रयास कर रहा था। इसके पीछे इरादा क्या था, ये अभी सामने नहीं आया है। सबाउद्दीन ने आरएसएस के नाम से जाली मेल आईडी बनाई थी। सबाउद्दीन से पूछताछ में सामने आया है कि वो सीरिया के आतंकी अबू बकर के संपर्क में था। ये लोग लड़कों को वीडियो भेजकर उन्हें कट्टर बना रहे हैं। फिर ऑनलाइन ही कुछ बड़े आतंकियों से बात कराकर संगठन के मकसद पूरा करने में जान देने की कसम दिलाई जा रही थी। इस दौरान इन्हें ये सिखाया गया था कि अपनी पहचान छिपा करके किसी तरह रेकी की जाती है? कुकर बम कैसे बनाया जाता है? पहचान छिपाकर किस तरह धमाका करना है? ट्रेनिंग के बाद वो खामोशी से रहकर बड़े धमाके की योजना बना रहा था। इन्हें पहले एक से दो साल तक स्लीपर सेल की तरह काम कराया जाता है। फिर सक्रिय रूप से आतंकी गतिविधियों से जोड़ा जाता है।