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पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए अपने दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया है।

West Bengal News : पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए अपने दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पार्टी नेतृत्व की इस कार्रवाई को अनुशासन और संगठनात्मक नियंत्रण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेताओं पर पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाने और संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं। West Bengal News
तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के निष्कासन के पीछे हाल के दिनों में उभरा एक विवाद प्रमुख वजह माना जा रहा है। पार्टी के भीतर चल रही खींचतान उस समय खुलकर सामने आई, जब दोनों विधायकों की ओर से हस्ताक्षर फर्जीवाड़े को लेकर गंभीर शिकायतें दर्ज कराई गईं। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सचिवालय नबन्ना में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया था कि ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने लिखित रूप से शिकायत देकर आरोप लगाया है कि कुछ दस्तावेजों में उनके हस्ताक्षरों का दुरुपयोग किया गया है। इन आरोपों के बाद मामले की जांच शुरू हुई और शिकायत के आधार पर एफआईआर भी दर्ज की गई। राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि इसी घटनाक्रम के बाद पार्टी नेतृत्व ने दोनों नेताओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। ऋतब्रत बनर्जी पिछले कुछ समय से पार्टी के कुछ फैसलों को लेकर खुलकर सवाल उठाते रहे थे। फाल्टा विधानसभा उपचुनाव के दौरान तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान द्वारा नामांकन वापस लेने की इच्छा जताने के मामले में भी उन्होंने पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे। उनका कहना था कि इस पूरे प्रकरण में पार्टी ने अपेक्षित अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की।
राजनीतिक हलकों में उस समय भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया था, जब ऋतब्रत बनर्जी को हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ मुलाकात करते देखा गया। इस मुलाकात के बाद पार्टी के भीतर उनके रुख को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगी थीं। हालांकि, उस समय किसी भी पक्ष की ओर से मुलाकात के उद्देश्य को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था।
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