जाने प्राचीन मिस्र में अजीबोगरीब टैक्स, जिसकी वजह से बने विश्व के सात अजूबे

प्राचीन मिस्र में टैक्स की दरें नील नदी की बाढ़ पर निर्भर करती थीं। 'निलोमीटर' नामक एक डिवाइस से नदी के पानी का स्तर मापा जाता था। अगर बाढ़ अच्छी आती थी, तो माना जाता था कि फसल अच्छी होगी और टैक्स बढ़ा दिए जाते थे।

Sweat Tax
प्राचीन मिस्र में लगता था 'पसीने पर टैक्स' (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar23 Feb 2026 12:17 PM
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Sweat Tax: प्राचीन मिस्र की सभ्यता कई रहस्यों को अपने आप में समाए हुए है, लेकिन हाल ही में सामने आई एक जानकारी ने सबको हैरान कर दिया है। क्या आप जानते हैं कि प्राचीन मिस्र में 'पसीने पर टैक्स' (Sweat Tax) लगाया जाता था? यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन इतिहासकारों के मुताबिक इसके पीछे की असलियत काफी प्रैक्टिकल और दिलचस्प है।

क्या है 'पसीने का टैक्स'?

दरअसल, जिसे लोग पसीने पर टैक्स कहते हैं, वह असल में जरूरी शारीरिक मेहनत का एक सिस्टम था, जिसे 'कोर्वी' (Corvée) कहा जाता था। उस समय सिक्कों और कागज की करेंसी का प्रचलन नहीं के बराबर था। ऐसे में टैक्स अक्सर पैसे के बजाय अनाज, जानवरों या मेहनत के रूप में वसूला जाता था। अगर कोई व्यक्ति राज्य को फसल या अनाज के रूप में टैक्स नहीं दे सकता था, तो उसे इसके बदले अपना समय और श्रम देना पड़ता था।

पिरामिडों का निर्माण और मजदूरों का सच

प्राचीन मिस्र की अर्थव्यवस्था खेती पर आधारित थी, लेकिन हर किसान के पास हमेशा टैक्स के रूप में अनाज नहीं होता था। ऐसे में राज्य को सरकारी प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए काबिल आदमियों की जरूरत होती थी। इसी 'कोर्वी सिस्टम' के तहत नागरिक खुदाई, पत्थर तराशने और सामान ढोने जैसे कामों में अपनी मेहनत का भुगतान करते थे।

इतिहासकारों का मानना है कि मिस्र के बड़े आर्किटेक्चर, जैसे कि पिरामिड, मंदिर और नहरें, इसी श्रम प्रणाली पर निर्भर थे। अक्सर यह माना जाता है कि पिरामिड गुलामों ने बनाए थे, लेकिन आधुनिक शोध बताते हैं कि कई मजदूर गुलाम नहीं, बल्कि टैक्स अदा करने वाले मौसमी कामगार थे, जो अपना कर्तव्य निभाने के लिए यह काम करते थे।

नील नदी से था टैक्स का गहरा संबंध

यह भी जानकारी दी गई है कि प्राचीन मिस्र में टैक्स की दरें नील नदी की बाढ़ पर निर्भर करती थीं। 'निलोमीटर' नामक एक डिवाइस से नदी के पानी का स्तर मापा जाता था। अगर बाढ़ अच्छी आती थी, तो माना जाता था कि फसल अच्छी होगी और टैक्स बढ़ा दिए जाते थे। वहीं, कम बाढ़ की स्थिति में फसल को देखते हुए टैक्स में छूट या एडजस्टमेंट किया जाता था। यह प्रणाली मिस्र की आर्थिक व्यवस्था को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती थी। Sweat Tax

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इनकम टैक्स चौराहे पर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया जोरदार प्रदर्शन

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इनकम टैक्स चौराहे पर जमकर नारेबाजी की। पूरा इलाका तनावपूर्ण रहा और प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर धावा बोल दिया। इस दौरान 'कृष्ण हरि को रिहा करो' और 'एप्सटिन फाइल डील पर जवाब दो' जैसे नारे लगाए गए।

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पार्टी ने सरकार पर लगाया युवाओं की आवाज दबाने का आरोप (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar22 Feb 2026 08:33 PM
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Bihar News: दिल्ली में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के दौरान नग-धारण (शर्टलेस) प्रदर्शन करने के आरोप में युवाओं की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस और युवा कांग्रेस ने पटना के इनकम टैक्स चौराहे पर जमकर हंगामा किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया।

तनावपूर्ण माहौल और नारेबाजी

जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इनकम टैक्स चौराहे पर जमकर नारेबाजी की। पूरा इलाका तनावपूर्ण रहा और प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर धावा बोल दिया। इस दौरान 'कृष्ण हरि को रिहा करो' और 'एप्सटिन फाइल डील पर जवाब दो' जैसे नारे लगाए गए। विरोध स्वरूप पीएम मोदी और अमित शाह के पुतले में आग लगा दी गई, जिससे माहौल और गरमाया।

'युवाओं की आवाज दबा रही सरकार'

कांग्रेस और युवा कांग्रेस के नेताओं ने इस मौके पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी का आरोप है कि दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान युवाओं की गिरफ्तारी पूरी तरह गलत है और यह लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। नेताओं ने कहा, "सरकार युवाओं के सवालों से डर रही है। असली मुद्दों पर जवाब देने के बजाय वह विरोध की आवाज को दबाने का काम कर रही है और आंदोलनकारियों को जेल भेज रही है।"

रिहाई की मांग, वरना आंदोलन तेज होगा

प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने स्पष्ट किया कि AI समिट के दौरान हुआ विरोध एक लोकतांत्रिक अधिकार था, कोई अपराध नहीं। उन्होंने मांग की है कि गिरफ्तार किए गए युवाओं को तत्काल रिहा किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर युवाओं को जल्द रिहा नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और विस्तार दिया जाएगा।

पुलिस की मौजूदगी

सूचना पर पुलिस बल मौके पर तैनात रहा और पूरे प्रदर्शन के दौरान स्थिति पर नजर बनाए रखी। हालांकि किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है, लेकिन इनकम टैक्स चौराहे का माहौल काफी देर तक गरमाया रहा। इस घटनाक्रम ने यह दिखा दिया है कि AI समिट के दौरान हुई कार्रवाई ने राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। Bihar News

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राजस्थान यूथ कांग्रेस में गुटबाजी तेज, आमने-सामने पायलट और डोटासरा खेमे

यूथ कांग्रेस पर सचिन पायलट गुट का वर्चस्व रहा है। ऐसे में पायलट खेमा इस बार भी अपने नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए जोर लगा रहा है, लेकिन पायलट गुट में ही दो फाड़ देखने को मिल रही है।

Rajasthan Youth Congress
दोनों गुटों में जोर की तैयारी (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar22 Feb 2026 05:50 PM
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Rajasthan News: राजस्थान में यूथ कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारिणी चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। प्रदेश अध्यक्ष सहित कई पदों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही कांग्रेस के अलग-अलग गुटों में अपना दबदबा कायम करने की लड़ाई तेज हो गई है। हालांकि अभी तक कोई भी गुट खुलकर सामने नहीं आया है, लेकिन अंदरखाने रणनीति बनाने का सिलसिला शुरू हो गया है। इस बार का चुनाव कांग्रेस नेताओं के आपसी वर्चस्व की लड़ाई का प्रतीक बनकर उभर रहा है।

पायलट खेमे में दो नाम, आम सहमति नहीं बन पाई

पिछले कई चुनावों में यूथ कांग्रेस पर सचिन पायलट गुट का वर्चस्व रहा है। ऐसे में पायलट खेमा इस बार भी अपने नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए जोर लगा रहा है, लेकिन पायलट गुट में ही दो फाड़ देखने को मिल रही है। अध्यक्ष पद के लिए इस खेमे से कांग्रेस सांसद प्रत्याक्षी रहे अनिल चौपड़ा और यूथ कांग्रेस सीकर जिलाध्यक्ष मुकुल खींचड़ के नामों पर चर्चा है। दोनों नामों को लेकर अभी तक आम सहमति नहीं बन पाई है। सूत्रों की मानें तो इस मसले पर कल पायलट गुट के कुछ नेताओं ने गुपचुप बैठक भी की। यह खेमा अपनी आंतरिक नाराजगी का फायदा दूसरों को नहीं देना चाहता, इसलिए समझौते की कोशिश जारी है।

डोटासरा ग्रुप की रणनीति, तीन दावेदारों में दिलचस्पी

वहीं, दूसरी ओर डोटासरा ग्रुप भी इस चुनाव में पूरी तरह सक्रिय है। अभी तक इस गुट ने भी अपना प्रत्याशी तय नहीं किया है, लेकिन तीन नेताओं ने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। इसमें कांग्रेस विधानसभा प्रत्याक्षी रहे अभिषेक चौधरी, यूथ कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष रहे यशवीर सूरा और सुधींद्र मुंड शामिल हैं।

पुरानी रणनीति का दोहराव होगा?

इस चुनाव में एक दिलचस्प बार-बार सामने आ सकती है। जानकार सूत्रों के अनुसार, यदि पायलट गुट से अनिल चौपड़ा चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो डोटासरा खेमे के अभिषेक चौधरी उनके सामने चुनाव लड़ सकते हैं। दरअसल, साल 2014 में राजस्थान विश्वविद्यालय के चुनाव में दोनों आमने-सामने आए थे, जिसमें अनिल चौपड़ा ने जीत दर्ज की थी। अब अभिषेक चौधरी यूथ कांग्रेस चुनाव के जरिए अपनी उस पुरानी हार का बदला लेने के मूड में नजर आ रहे हैं।

रणनीतिकार बने मुकेश भाकर और अशोक चांदना

चुनाव के इस दो मुख्य किरदार मुकेश भाकर और अशोक चांदना अभी तक खुलकर सामने नहीं आए हैं। वहीं, राजनीतिक पंडितों की नजर में पायलट गुट में मुकेश भाकर और डोटासरा गुट में अशोक चांदना इस चुनाव के मुख्य रणनीतिकार माने जा रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिर कौन सा गुट यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा करने में कामयाब होता है। Rajasthan News

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