मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अन्ना हजारे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

अन्ना हजारे ने पत्र में भारत की परंपरा और संस्कृति का हवाला देते हुए लिखा, "भारत की संस्कृति अहिंसा और शांति की रही है। हमारे देश ने हमेशा विश्व को संवाद और शांति का मार्ग दिखाने का प्रयास किया है।" उन्होंने कहा कि आज दुनिया को हथियारों की नहीं, बल्कि विश्वास और संवाद की जरूरत है।

Anna Hazare wrote a letter to PM Modi
अन्ना हजारे ने उठाया यह कदम (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar07 Mar 2026 07:01 PM
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Maharashtra News : मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच समाजसेवी अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर एक बड़ी अपील की है। उन्होंने भारत से वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित करने की पहल करने को कहा है। अन्ना हजारे ने अपने पत्र में युद्ध के कारण महिलाओं, बच्चों और आम नागरिकों पर पड़ रहे असर पर गहरी चिंता जताई है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, हालात चरम पर

विगत दिनों मिडिल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर संयुक्त हमला किया, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई बड़े नेताओं और सैन्य अधिकारियों की मौत हो गई। इसके बाद ईरान ने भी तीव्र पलटवार किया है। ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और तेल अवीव पर मिसाइल हमले किए हैं। युद्ध का आज 8वां दिन है और स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।

अन्ना हजारे ने जताई चिंता

इस खतरनाक स्थिति को देखते हुए अन्ना हजारे ने पीएम मोदी को लिखा कि वर्तमान समय में विश्व अत्यंत चिंताजनक परिस्थितियों से गुजर रहा है। उन्होंने लिखा, "अलग-अलग देशों के बीच बढ़ते तनाव और संघर्ष के कारण नागरिकों का जीवन असुरक्षित होता जा रहा है। हाल की घटनाओं में निरपराध महिलाएं, बच्चे और परिवारों पर पड़ने वाले प्रभाव की खबरें अत्यंत दुखद और पीड़ादायक हैं।"

दुनिया को हथियारों की नहीं, संवाद की जरूरत: अन्ना

अन्ना हजारे ने पत्र में भारत की परंपरा और संस्कृति का हवाला देते हुए लिखा, "भारत की संस्कृति अहिंसा और शांति की रही है। हमारे देश ने हमेशा विश्व को संवाद और शांति का मार्ग दिखाने का प्रयास किया है।" उन्होंने कहा कि आज दुनिया को हथियारों की नहीं, बल्कि विश्वास और संवाद की जरूरत है। युद्ध से सिर्फ विनाश होता है, जबकि संवाद से समाधान और स्थिरता का मार्ग निकलता है।

पीएम मोदी से यह अपील

समाजसेवी अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि भारत तटस्थ और जिम्मेदार भूमिका निभाते हुए वैश्विक स्तर पर शांति और संवाद को बढ़ावा देने की पहल करे। उन्होंने लिखा, "आपके नेतृत्व में भारत ने कई वैश्विक मुद्दों पर सकारात्मक भूमिका निभाई है। इसलिए इस संवेदनशील समय में यदि भारत मानवता और शांति के पक्ष में आगे आता है, तो यह पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायक होगा। मानवता के हित और निरपराध नागरिकों की सुरक्षा के लिए भारत को शांति का मार्ग आगे बढ़ाना चाहिए, ऐसी मेरी विनम्र अपेक्षा है।" Maharashtra News

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SIR विवाद: प्रियंका चतुर्वेदी ने BJP-ECI पर बोला हमला

प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्थिति सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले महाराष्ट्र, बिहार और अब पश्चिम बंगाल... देश के कई राज्यों में राजनीतिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।"

Shiv Sena (UBT) MP Priyanka Chaturvedi
शिवसेना (UBT) नेता और सांसद प्रियंका चतुर्वेदी (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar07 Mar 2026 05:34 PM
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Maharashtra News : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष संशोधन (SIR) को लेकर छिड़े विवाद पर शिवसेना (UBT) की प्रमुख नेता और सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भाजपा और चुनाव आयोग (ECI) पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग SIR का बहाना बनाकर भाजपा का एजेंडा आगे बढ़ा रहा है और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है।

लोकतंत्र के साथ हो रहा खिलवाड़

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध प्रदर्शन के बीच प्रियंका चतुर्वेदी ने शनिवार को सीधे तौर पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने मतदाताओं के अधिकार को अमान्य करने की कला में महारत हासिल कर ली है। लोकतंत्र में मतदाता को अपनी पसंद का प्रतिनिधि चुनने का अधिकार होता है, लेकिन अगर चुनाव परिणाम BJP के पक्ष में नहीं जाते, तो संवैधानिक खामियों का इस्तेमाल कर सत्ता हासिल करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने "कठपुतली मुख्यमंत्री" को स्थापित करने के लिए हर संभव संवैधानिक रास्ते का इस्तेमाल करती है, जिसमें लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की जाती है।

महाराष्ट्र और बिहार का दिया उदाहरण

प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्थिति सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले महाराष्ट्र, बिहार और अब पश्चिम बंगाल... देश के कई राज्यों में राजनीतिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।" उन्होंने झारखंड और दिल्ली में CBI, आयकर विभाग और ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि राजनीतिक दबाव बनाने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा रहा है।

चुनाव आयोग पर सीधा सवाल

सांसद ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा, "अगर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अब तक आयोग क्या कर रहा था? अगर ये नाम अवैध थे, तो वे मतदाता सूची में आए कैसे और इतने समय तक कैसे बने रहे?"

उन्होंने तीखा सवाल पूछते हुए कहा, "क्या चुनाव आयोग सरकार के दबाव में काम कर रहा है या पूरी तरह स्वतंत्र तरीके से अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है?" यह बयान पश्चिम बंगाल में बढ़ते राजनीतिक तापमान के बीच अहम माना जा रहा है, जहां विपक्ष सड़क पर उतरकर चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा रहा है। Maharashtra News

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कैंसर जैसी बीमारी से छह वर्षों तक जूझने के बाद संजय दहरिया को यूपीएससी में सफलता

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के एक छोटे से गाँव के रहने वाले संजय दहरिया ने अपनी जिदगी के सबसे कठिन दौर को पार करके यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 946वीं रैंक हासिल की। उनकी कहानी केवल सफलता की नहीं, बल्कि धैर्य, साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल है।

sanjay (2)
संजय दहरिया
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar07 Mar 2026 05:20 PM
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UPSC Toppers : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के एक छोटे से गाँव के रहने वाले संजय दहरिया ने अपनी जिदगी के सबसे कठिन दौर को पार करके यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 946वीं रैंक हासिल की। उनकी कहानी केवल सफलता की नहीं, बल्कि धैर्य, साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। संजय ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल से प्राप्त की। परिवार का आर्थिक हाल और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बावजूद, उन्होंने कभी पढ़ाई में रुचि खोई नहीं। कक्षा 5 तक पहुंचने के बाद उन्हें जवाहर नवोदय विद्यालय (माना, रायपुर) में शिक्षा जारी रखने का अवसर मिला, जहाँ उन्होंने अपने अकादमिक कौशल को और निखारा।

कैंसर से जंग

2012 में संजय को सलाइवरी ग्रंथि (सलाईवरी ग्लैंड) का कैंसर हुआ। इलाज और रिकवरी में उन्हें लगभग 6 साल का कठिन समय लगा। इस दौरान उन्होंने कई बार हिम्मत खोने का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। यह समय उनके जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष था, जिसने उनकी मानसिक और शारीरिक शक्ति को परखा।

पेशेवर जीवन और यूपीएससी की तैयारी

इलाज के बाद संजय ने स्टेट बैंक आफ इंडिया और स्थानीय डाकघर में नौकरी की। लेकिन उनका सपना लोक सेवा में योगदान देने का था। तीन सरकारी नौकरियों को छोड़कर उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी को प्राथमिकता दी। संजय ने लगातार मेहनत और रणनीति के साथ तैयारी जारी रखी। पहले दो प्रयासों में सफलता नहीं मिली, लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने अपनी मेहनत का फल पाया। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि असफलता भी सिर्फ एक कदम पीछे हटने का नाम है, हार का नहीं। कैंसर के इलाज के कारण उनकी दृष्टि पर भी असर पड़ा था। फिर भी, संजय ने कभी पढ़ाई से हाथ नहीं हटाया। उन्होंने साबित किया कि शारीरिक कठिनाइयाँ किसी भी लक्ष्य को रोक नहीं सकतीं, अगर मानसिक दृढ़ता मजबूत हो।

लक्ष्य और प्रेरणा

सफलता के बाद संजय ने कहा कि उनका उद्देश्य देश और समाज की सेवा करना है। चाहे उन्हें आईएएस का कैडर मिले या अन्य कोई लोक सेवा, उनकी प्रतिबद्धता और उत्साह अडिग है। संजय दहरिया की कहानी हमें यह सिखाती है कि संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि आपके अंदर आत्मविश्वास, धैर्य और मेहनत है, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उनकी यात्रा युवा अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।


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