
गर्मी के बाद बरसात आई। पेड़ों की भी ग्रोथ बहुत अच्छी हो गई है। साथ ही शुरू हो गई है आरडब्ल्यू की मुसीबत। आरडब्ल्यूए दौड लगाती है फोनरवा की और हमें तो पता नहीं ये आरडब्ल्यूए करती क्या है? फोनरवा अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा जी ने हॉर्टिकल्चर विभाग की ओएसडी वंदना तिवारी जी के साथ फोनरवा ऑफिस में मीटिंग बुलाई। वे अपने विभाग के बहुत से पदाधिकारियों के साथ आयीं। सभी की समस्याएं गंभीरता से सुनीं। सेक्टर-36 के अध्यक्ष जेपी उपल के अनुसार, पेड़ इतने ऊंचे हो गये हैं कि दूसरे तीसरे माले के घरों की खिडकियों में इनकी शाखाएं घुस रही हैं। सेक्टर 99 आरडब्ल्यूए की पदाधिकारी जिमी के अनुसार जरा सी हवा चलने से पेड़ों की शाखाएं हिलती हैं, तारें जुड़ जाती हैं, भयानक स्पार्किंग होती है, क्या करें। सेक्टर 117 के अध्यक्ष कोसिंदर यादव पेड़ों की छंटाई चाहते हैं। प्रदीप वोहरा सेक्रेटरी फोनरवा, सेक्टर 22 में पीपल का पेड़ इतना ऊंचा है कभी गिरा तो। संजीव पुरी सेक्टर 56 लगभग सभी को पेड़ों की छंटाई होनी चाहिए, पेड़ बहुत ऊंचे हो गए। छंटाई के लिए विभाग आता है तो सारा कटवा दो। पत्तियां ही पत्तियां, कभी कीड़े गिरते हैं।
कुछ बातों की जानकारी सभी को होना बहुत जरूरी हैं, वर्ना पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के जुर्म में आप कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं। छंटाई वाला पूरा कानून जानता है। बिजली वाला कब कौन सा फीडर बंद करवाना है। कब कौन सा तार कटवाना है, उसे पूरी जानकारी है, क्योंकि यह कार्य हॉर्टिकल्चर व बिजली विभाग के सहयोग से ही हो पाता है। ट्रिमिंग वाले भी कहीं कहीं कहासुनी में काम छोड़ जाने को होते हैं। इसीलिए यदि किसी पेड़ से आपको खतरा है या आपको आशंका है कि वह आपकी प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचा सकता है तो आप उसे काटने या छंटवाने की कार्रवाई कर सकते हैं। पेड़ों की छंटाई के लिए कोई चार्ज नहीं है। पर, इसके लिए आपको कुछ कार्य करने होंगे। जैसे कि पता करना होगा कि वह पेड़ किसकी जमीन पर है। आपकी या नोएडा अथॉरिटी की। यह पता करने के बाद आप ऑनलाइन या ऑफलाइन अपना आवेदन कर सकते हैं। ऑफलाइन आवेदन के लिए आपको सभी डॉक्यूमेंट के साथ वन विभाग के डिविजनल ऑफिस में जाकर आवेदन करना होगा। आवेदन आपको वन विभाग और पेड़ जिसकी संपत्ति पर है, उन दोनों के नाम करना होगा। यदि पेड़ की कटाई के लिए आपको आवेदन करना है तो पेड़ काटने के लिए आपको वन विभाग में एक पेड़ के एवज में 34,500 रुपये जमा करवाने होंगे। वह भी यदि पेड़ किसी प्राइवेट प्रॉपर्टी में हैं तो। अगर पेड़ किसी सरकारी जमीन पर है या फिर आप व्यावसायिक प्रोजक्ट के लिए पेड़ काटना चाहते हैं तो यह चार्ज एक पेड़ पर 57 हजार रुपये तक हो जाता है। आवेदन के समय आपकी पूरी पहचान, पेड़ जिसकी प्रॉपर्टी में हैं उसकी पूरी डीटेल, पेड़ की फोटो तथा पेड़ क्यों काटना है आदि डॉक्यूमेंट जमा करवाने होंगे।
आवेदन मिलने के बाद ट्री ऑफिसर साइट का निरीक्षण करता है और आपकी दी गई जानकारी की जांच कर अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपता है। अगर आवेदन करने वाले की जानकारी गलत पाई जाती है तो पेड़ को काटने का आवेदन रद्द भी हो जाता है। यदि आवेदन पूरा है तथा सभी कागजात भी पूरे हैं तो कार्रवाई में अधिकतम 60 दिन का समय लगता है। यदि बिना मंजूरी किसी ने पेड़ काटा छांटा है तो न्यूनतम 20 हजार रुपये के जुर्माने की है। यह जुर्माना छंटाई के तरीके के आधार पर बढ़ भी सकता है। जैसे कि पेड़ की कितनी टहनियां कटी हैं, पेड़ की छंटाई के नाम पर उसे कितना नुकसान पहुंचाया गया है। यदि पेड़ बिना मंजूरी के काटा गया है तो उसके लिए न्यूनतम 60 हजार रुपये जुर्माना है।
असल में समस्या की जड़ है पेडों का बड़ा होना और उनकी शाखाओं का बिजली के तारों में उलझना। इस समस्या का समाधान है अंडरग्राउंड वायरिंग या इंसुलेटेड वायरिंग। यदि ये हो जाएं तो हम भी दिल्ली मुंबई की तरह 24 घंटे बिजली पाएं, समस्या का समाधान हो जाए। नोएडा भी दिल्ली मुंबई की तरह 24 घंटे बिजली की कैटेगिरी में आ जाए। न बिजली विभाग से किचकिच न होर्टिकल्चर विभाग से खिचखिच। हमें ऑक्सीजन देने वाला ग्रीन फोयलज भी ट्रकों में भर-भरकर कूडे की तरह न जाए। दिल्ली नोएडा का कुछ प्रदूषण भी घट जाए।
मेरा मन कूड़े की तरह जाती इन शाखाओं से हर बार क्षमा मांगता है, जो इस खतरनाक प्रदूषण में हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन दे सकती थी, वह कूडे़ के ढे़र में जा रही है। नोएडा उत्तर प्रदेश का सबसे कमाऊ बेटा है, आखिर कब तक? कोई समस्या को कितने भी साल खींचे, मैंने तो ये प्रण ले लिया है कि अब वृक्ष वहां लगाऊंगी जहां इन्हें बिजली के झटके न झेलने पड़ें। यानि ग्रीन बेल्ट्स में, पूरे नोएडा से होकर बहने वाले नालों के दोनों तरफ या फिर छोटी हाइट वाले।