
Tripura Elections 2023 : अगरतला/नोएडा। 16 फरवरी यानी आज से ठीक चौथे दिन त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। इस चुनाव में जहां भारतीय जनता पार्टी हर हालत में पुन: सत्ता में काबिज होने के लिए हर हथकंडे अपनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। वहीं भारतीय क युनिस्ट पार्टी व कांग्रेस संयुक्त गठबंधन ने भी पूरी ताकत झोंक दी है।
यह चुनाव जहां भाजपा के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। वहीं त्रिपुरा में भाजपा के प्रभारी व नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) के सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। सब जानते हैं कि वर्ष-2014 में पहली बार गौतमबुद्घनगर से लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद डा. महेश शर्मा को नागरिक उड्डïयन, संस्कृति व पर्यटन जैसे तीन महत्वपूर्ण मंत्रालयों का मंत्री बनाया गया था। जब वर्ष 2019 में वे दूसरी बार और भी अधिक मतों से लोकसभा का चुनाव जीते तो केन्द्र की सरकार में मंत्री बनने से वंचित रह गए। उनके मंत्री न बनने को राजीतिक विश्लेषकों ने अपने-अपने ढंग से विश्लेषित किया था।
इस बीच मंत्रिमंडल के विस्तार में कयास लगाए जा रहे थे कि डा. महेश शर्मा को किसी न किसी मंत्रालय का प्रभार जरूर मिलेगा। लेकिन उनके समर्थकों को लगातार मायूस होना पड़ा।
बताया जाता है केन्द्र सरकार में मंत्री न बन पाने के झटके के बावजूद डा. महेश शर्मा ने अपनी राजनीतिक गतिविधियों को कम नहीं किया। अपने संसदीय क्षेत्र से लेकर संसद तक पार्टी के राष्टï्रीय कार्यक्रमों तक में उनकी सक्रियता किसी से छिपी हुई नहीं है। उनकी सक्रियता से खुश होकर भाजपा हाईकमान ने उन्हें त्रिपुरा के प्रभारी पद की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। प्रभारी बनने के बाद डॉक्टर महेश शर्मा त्रिपुरा में लगातार सांगठनिक बैठकें करके कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते रहें और उन्हें चुनाव में कूदने के लिए कमर कसने के लिए प्रेरितकरते रहे।
उनके प्रभारी बनने के बाद त्रिपुरा में भाजपा के सांगठनिक ढांचे में मजबूती भी आई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि त्रिपुरा में 16 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में जहां भाजपा की अग्निपरीक्षा है। वहीं डॉ. महेश शर्मा की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के नतीजे डा. महेश शर्मा के राजनीतिक भविष्य की नई इबारत लिखेंगे।