
हरियाणा के सीनियर IPS अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। उनके फाइनल सुसाइड नोट ने पुलिस और प्रशासनिक तंत्र की नींव हिला दी है। इसी नोट के आधार पर चंडीगढ़ पुलिस ने हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर समेत 13 आईपीएस और आईएएस अफसरों के खिलाफ गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर ली है। आरोपों की सूची में सिर्फ नाम नहीं, बल्कि उन बड़े चेहरों की कहानी है, जिन पर एक ईमानदार अफसर ने अपने टूटे भरोसे और लगातार झेले गए उत्पीड़न की गवाही छोड़ी है। IPS Puran Kumar Suicide
चंडीगढ़ पुलिस ने यह मामला सेक्टर-11 थाने में दर्ज किया है। आईजी पुष्पेंद्र कुमार ने पुष्टि की है कि सभी नामजद अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और जांच SIT के जरिए आगे बढ़ाई जा रही है। वाई. पूरन कुमार (2001 बैच, हरियाणा कैडर) ने अपने फाइनल नोट में लिखा था कि उन्हें जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और लगातार साजिशों से तोड़ा गया। उन्होंने साफ कहा - जब न्याय की उम्मीद खत्म हो गई, तब मैंने यह कदम उठाया। IPS Puran Kumar Suicide
शत्रुजीत सिंह कपूर (डीजीपी, आईपीएस 1990 बैच) – एरियर भुगतान रोकने, सार्वजनिक अपमान, झूठी शिकायतें करवाने और अतिरिक्त शर्तें थोपने का आरोप।
संजय कुमार (एडीजीपी, 1997 बैच) – सार्वजनिक रूप से अपमानित करने और झूठे आरोप लगाने का आरोप।
पंकज नैन (आईजीपी, 2007 बैच) – मानसिक उत्पीड़न और एपीआर रिपोर्ट खराब करने की साजिश का आरोप।
कला रामचंद्रन (आईपीएस, 1994 बैच) – झूठी शिकायतों के जरिए परेशान करने का आरोप।
संदीप खिरवार (आईपीएस, 1995 बैच) – गुरुग्राम से ट्रांसफर के बाद झूठे मामलों की साजिश रचने के मुख्य आरोपित।
सिबाश कविराज (आईपीएस, 1999 बैच) – झूठी शिकायतें दर्ज करवाने में भूमिका।
मनोज यादव (पूर्व डीजीपी, आईपीएस 1998 बैच) – जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न के आरोप।
पी.के. अग्रवाल (पूर्व डीजीपी, आईपीएस 1988 बैच) – बैचमेट होने के बावजूद भेदभावपूर्ण रवैये और मानसिक दबाव के आरोप।
टी.वी.एस.एन. प्रसाद (आईएएस, 1988 बैच) – जाति आधारित भेदभाव के आरोप।
राजीव अरोड़ा (पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव, आईएएस) – पिता की मौत से पहले उनसे मिलने की अनुमति न देने का दर्दनाक आरोप।
अमिताभ ढिल्लों (एडीजीपी) – आरटीआई पर प्रतिशोधात्मक कार्रवाई और वेतन बचत को संदिग्ध करार देने का आरोप।
वाई. पूरन कुमार की पत्नी अमनीत पी. कुमार (हरियाणा कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी) ने पति की मौत के अगले ही दिन औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने लिखा - मेरे पति को लगातार जातिगत और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती थी। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सैनी को भी पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की और अनुरोध किया कि जब तक एफआईआर दर्ज न हो, तब तक पोस्टमॉर्टम न किया जाए। यही वजह रही कि शव को दो दिनों तक सेक्टर-16 अस्पताल के शवगृह में रखा गया।
सुसाइड नोट में दर्ज 13 अधिकारियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।
आरोपियों को निलंबित व गिरफ्तार किया जाए ताकि जांच प्रभावित न हो।
परिवार, विशेषकर दोनों बेटियों को स्थायी सुरक्षा दी जाए।
परिवार की गरिमा और अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
इन्हीं बिंदुओं पर चंडीगढ़ पुलिस ने केस दर्ज किया और SIT गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। IPS Puran Kumar Suicide
7 अक्टूबर की दोपहर, वाई. पूरन कुमार ने अपने सेक्टर-6 स्थित आवास के बेसमेंट में सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मारी। उन्होंने 6 अक्टूबर को वसीयत तैयार की, जिसमें पूरी संपत्ति पत्नी के नाम की, और सुसाइड नोट ईमेल से भेजा। जापान में सरकारी दौरे पर गईं उनकी पत्नी ने जब कई कॉल किए और जवाब नहीं मिला, तो बड़ी बेटी अमुल्या घर पहुंचीं—जहां उन्होंने पिता को खून से लथपथ हालत में पाया। एफआईआर दर्ज होने के बाद हरियाणा पुलिस और प्रशासनिक हलकों में हलचल है, लेकिन अब तक किसी अधिकारी ने औपचारिक बयान नहीं दिया। चंडीगढ़ पुलिस के मुताबिक, सुसाइड नोट में जिनके नाम हैं, उन्हें नोटिस भेजे जाएंगे। जांच के हर पहलू की गहराई से पड़ताल होगी। IPS Puran Kumar Suicide