Maharashtra News : कूटनीति में हारे हुए अदालत में जीत गए उद्धव ठाकरे
भारत
RP Raghuvanshi
11 Jul 2022 06:51 PM
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RP Raghuvanshi
11 Jul 2022 06:51 PM
New Delhi : महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में कूटनीतिक पराजय के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे सुप्रीम कोर्ट में जीत गए। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष से उद्धव ठाकरे (Uddhav Thakrey) के धड़े के, शिवसेना विधायकों (Shivsena MLA) को अयोग्य ठहराने के अनुरोध पर कोई फैसला नहीं लेने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर से कहा है कि वह विधायकों की अयोग्यता को लेकर कोई फैसला ना लें। विधायकों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई ना करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए बेंच का गठन होगा। इसमें समय लग सकता है।
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना खेमे ने महाराष्ट्र विधानसभा (Maharastra Vidhansabha) के नए अध्यक्ष के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दायर की है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष को सूचित करने के लिए कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका पर फैसला नहीं किया जाता है, तब तक कोई निर्णय न लें। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में एक बेंच गठित की जाए।
विधायकों की अयोग्यता को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई एनवी रमना (CJI NV Ramana) ने कहा कि विधायकों की अयोग्यता पर फिलहाल स्पीकर फैसला नहीं लेंगे। अदालत के फैसले तक विधायकों की अयोग्यता पर स्पीकर की कार्यवाही को टोक रहेगी। सुप्रीम कोर्ट फिलहाल महाराष्ट्र (Maharashtra) मामले की तुरंत सुनवाई नहीं करेगा। सीजेआई (CJI) ने कहा कि इसके लिए बेंच का गठन करना होगा।
सीजेआई की टिप्पणी के बाद उद्धव खेमे की ओर से वकील कपिल सिब्बल (Kapil Sibbal) ने दलील दी कि 39 विधायकों की अयोग्यता के मामले पर सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट ने 27 जून के बदले 11 जुलाई को कहने को कहा था। सीजेआई ने कहा कि स्पीकर को सूचित करें कि विधायकों के खिलाफ कोई एक्शन या सुनवाई अभी न करें। कोर्ट में फेसला आने तक इसे स्थगित रखा जाए।
दूसरी ओर, गवर्नर की ओर से तुषार मेहता ने दलील रखी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिया कि वो स्पीकर को इस बाबत जानकारी दे देंगे। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों गुटों के विधायकों पर अयोग्यता की कार्यवाही पर रोक लगाया है।
महाराष्ट्र विधानसभा के प्रधान सचिव राजेंद्र भागवत ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है। जवाब में कहा कि तीन जुलाई को राहुल नार्वेकर को विधानसभा अध्यक्ष चुना गया है। अब उन्हें अयोग्यता का मसला देखना है। ऐसे में डिप्टी स्पीकर की तरफ से भेजे नोटिस को चुनौती देने वाली विधायकों की याचिका का सुप्रीम कोर्ट निपटारा कर दे और नए स्पीकर को अयोग्यता पर फैसला करने दें।
उधर, महाराष्ट्र विधानसभा सचिवालय ने राज्य के कुल 55 शिवसेना विधायकों में से 53 को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें से 39 विधायक एकनाथ शिंदे के खेमे और 14 विधायक उद्धव ठाकरे गुट के हैं। ठाकरे खेमे के 14 विधायकों में से एक संतोष बांगर चार जुलाई को सरकार के शक्ति परीक्षण के दिन शिंदे खेमे में शामिल हो गए थे। दोनों पक्षों के विधायकों ने कारण बताओ नोटिस मिलने की पुष्टि की।
दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर तीन और चार जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव और विश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दौरान पार्टी व्हिप की अवहेलना करने का आरोप लगाते हुए दोनों पक्षों के विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। शिंदे खेमे ने उन विधायकों की सूची में पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे का नाम शामिल नहीं किया है, जिन्हें उन्होंने अयोग्य ठहराने की मांग की है। नोटिस महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियमों के तहत जारी किए गए हैं। विधायकों को सात दिन के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा गया है।