केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भविष्यवाणी चेतनामंच ने पहले ही कर दी थी। अपनी खबर में चेतनामंच ने बताया था कि धर्मेंद्र प्रधान अपना इस्तीफा कभी भी दे सकते है।

Dharmendra Pradhan Resignation : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भविष्यवाणी चेतनामंच ने पहले ही कर दी थी। अपनी खबर में चेतनामंच ने बताया था कि धर्मेंद्र प्रधान अपना इस्तीफा कभी भी दे सकते है। चेतनामंच ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भविष्यवाणी 24 जुलाई 2026 को ही अपने एक खबर के माध्यम से कर दी थी। जिस राजनीतिक घटनाक्रम की चर्चा पिछले कुछ समय से तेज थी और जिसे लेकर चेतना मंच ने सबसे पहले संकेत दिए थे, उस पर अब आधिकारिक मुहर लग गई है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के साथ ही राजनीतिक गलियारों में चल रही अटकलों का दौर समाप्त हो गया हैं। Dharmendra Pradhan Resignation
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केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने देश के युवाओं को संबोधित करते हुए एक भावुक खुला पत्र जारी किया है। अपने पत्र में उन्होंने शिक्षा, विद्यार्थियों और देश के भविष्य को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता हमेशा छात्रों के हितों की रक्षा और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना रही है। उन्होंने लिखा कि हाल के घटनाक्रमों ने उन्हें गहरा आहत किया है, लेकिन राष्ट्र और युवाओं के प्रति उनकी जिम्मेदारी आगे भी पहले की तरह बनी रहेगी। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में कहा कि बीते चार दशकों से उनका जीवन छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा है। उनका मानना है कि एक सशक्त, समावेशी और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही विकसित भारत की मजबूत नींव बन सकती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सेवा करने का अवसर मिलने पर आभार भी व्यक्त किया।
पत्र में उन्होंने 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी, परीक्षा रद्द की गई और दोबारा परीक्षा कराई गई। साथ ही अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (CBT) प्रणाली से कराने का निर्णय भी लिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता लाखों विद्यार्थियों के भविष्य की रक्षा करना थी और इसी उद्देश्य से सभी संबंधित एजेंसियों के सहयोग से परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई गई।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पूरे घटनाक्रम के दौरान उन्होंने व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी निभाई और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि किसी भी प्रतिभाशाली छात्र के साथ अन्याय न हो। उन्होंने कहा कि परीक्षा परिणामों में बड़ी संख्या में मेहनती और साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को सफलता मिली, जो इस व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र में कहा कि पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से दुख पहुंचाया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से अधिक देश के युवाओं और उनके भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति ही देश की सबसे बड़ी ताकत है और उसे किसी भी भ्रम या विवाद का शिकार नहीं बनने दिया जाना चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और विश्वास के लिए उनका आभार व्यक्त किया। साथ ही मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों, कर्मचारियों और अपने साथ काम करने वाले सभी लोगों के प्रति भी धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है और भविष्य में भी वे देश, ओडिशा और युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करते रहेंगे।
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