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यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक ने अवैध रूप से ब्याज वसूलने के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। बैंक के नाम पर स्थापित हुए यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक ने महाजन वाला रूप धारण कर लिया है। मन माना ब्याज वसूल करके यूनिटी बैंक एक बड़ा महाजन बन गया है।

Unity Bank : यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक ने अवैध रूप से ब्याज वसूलने के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। बैंक के नाम पर स्थापित हुए यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक ने महाजन वाला रूप धारण कर लिया है। मन माना ब्याज वसूल करके यूनिटी बैंक एक बड़ा महाजन बन गया है। पुराने जमाने के महाजन ब्याज के नाम पर लोगों का खून चूसते थे। ठीक उसी प्रकार का धंधा यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक चला रहा है। यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक से लोन लेकर ठगी का शिकार हुए एक भुगतभोगी ने इस बैंक के अवैध धंधे का पूरा खुलासा किया है। Unity Bank
उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में अपना कारोबार करने वाले एक बड़े कारोबारी ने यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक के नाम से सावधान रहने की अपील जारी की है। यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक को एक सामान्य बैंक मानकर उस बैंक से लोन लेने वाले कारोबारी ने दावा किया है कि यूनिटी कोई बैंक नहीं है बल्कि अवैध रूप से ब्याज वसूलने वाला महाजन है। कारोबारी ने यह भी बताया है कि यूनिटी बैंक के नाम पर अवैध रूप से मोटा ब्याज वसूले जाने के कारण अनेक कारोबारियों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। पुराने जमाने में महाजन लोग जिस प्रकार ब्याज की अवैध वसूली करते थे उसी प्रकार यूनिटी बैंक के नाम पर ब्याज के रूप में अवैध वसूली की जा रही है। Unity Bank
यूनिटी बैंक से लोन लेकर ठगी का शिकार हुए कारोबारी ने बताया कि अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए उन्होंने किसी निजी बैंक से लोन लेने का फैसला किया था। एक एजेंट ने उनसे संपर्क करके यूनिटी बैंक में काम करने वाले कर्मचारियों से मिलवाया। उन कर्मचारियों ने प्रोपर्टी को गिरवी रखकर फटाफट लोन दिलवाने के लिए अच्छे सपने दिखाए। नोएडा के कारोबारी ने सभी जरूरी दस्तावेज यूनिटी बैंक वाले कर्मचारियों को दे दिए। यूनिटी बैंक वालों ने फटाफट 1 करोड़ 32 लाख रूपए का लोन Sanction कर दिया। इस लोन के लिए 31 अक्टूबर 2023 को Sanction Letter जारी कर दिया गया। कारोबारी का कहना है कि यूनिटी बैंक का यह लोन बड़ी ठगी का कारण बन गया। Unity Bank
कारोबारी को यूनिटी बैंक ने लोन नम्बर APPL-00042943 के द्वारा जो Sanction Letter जारी किया उसे पढक़र कारोबारी भौचक्का रह गए। लेटर में लोन का इंटरेस्ट रेट 15 प्रतिशत लिखा गया था। जब कारोबारी ने कहा कि उन्हें तो 8 या 9 प्रतिशत इंटरेस्ट रेट की बात बताई गई थी तो यूनिटी बैंक वालों ने कहना शुरू कर दिया कि हमारे बैंक में तो 13 से लेकर 22 प्रतिशत तक का इंटरेस्ट लगता है। कारोबारी ने लोन रद्द करने को कहा तो बताया गया कि लोन स्वीकृत होने के बाद रद्द नहीं हो सकता तथा आपकी प्रोपर्टी के कागजात भी आपको नहीं मिल सकते। मरता क्या ना करता कारोबारी को लोन लेना ही पड़ा। Unity Bank
बात मोटे इंटरेस्ट रेट तक ही नहीं रूकी यूनिटी बैंक ने लोन देने के बदले मोटी प्रोसेसिंग फीस भी वसूल कर ली। कारोबारी ने बताया कि 1 करोड़ 32 लाख के लोन के लिए दो लाख 35 हजार रूपए प्रोपेसिंग फीस के नाम पर वसूल लिए गए। साथ ही इंश्योरेंस के नाम पर 5 लाख रूपए अलग से वसूल लिए गए। इस प्रकार लोन में से साढ़े दस लाख रूपए बैंक ने पहले ही काट लिए। इतना ही नहीं लोन के पैसों में से बैंक ने तीन लाख रूपए एफडी... के नाम पर ले लिए। जब कारोबारी ने आपत्ति की तो उसे बताया गया कि अब एक साल तक तो आप कुछ नहीं कर सकते। एक साल बाद आप इस लोन के पैसे को जमा करके बैंक से अलग हो सकते हैं। Unity Bank
भुक्तभोगी कारोबारी ने आगे बताया कि उसने पूरे एक साल तक यूनिटी बैंक को सवा तीन लाख रूपए महीना की किश्त का भुगतान किया। पूरे 12 महीने तक किश्तों के रूप में 39 लाख रूपए का भुगतान करने के बाद भी लोन की रकम उतनी की ही उतनी ही रही। एक साल पूरा होते ही कारोबारी ने यूनिटी बैंक को ई-मेल भेजकर लोन को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का आग्रह किया। दूसरे बैंक ने बेहद कम ब्याज दर पर लोन देने का आश्वासन दे दिया था। ई-मेल मिलते ही यूनिटी बैंक के अधिकारी कारोबारी के कार्यालय में पहुंच गए। उन्होंने बताया कि लोन दूसरे बैंक में ले जाने पर आपको फोर क्लोजर चार्ज के रूप में 20 लाख रूपए देने पड़ेंगे। जब कारोबारी ने मना किया तो यूनिटी बैंक वालों ने कहा कि हम आपका इंटरेस्ट रेट कम कर देते हैं। आप हमारे बैंक के साथ ही जुड़े रहो। तब यूनिटी वालों ने इंटरेस्ट रेट घटाकर 13.75 प्रतिशत कर दिया। कारोबारी को मजबूरन इसी रेट पर लोन चलाना पड़ा। फिर पूरे एक और साल तक यानि लगातार दो साल किश्तें देने पर भी लोन एमाउंट उतना का उतना ही बना रहा। दो साल पूरे होने पर जब कारोबारी ने बैंक बदलने की जिद्द ठान ली तो फोर क्लोजर के नाम पर यूनिटी वालों ने उस कारोबारी से 15 लाख रूपए जबरन वसूल कर लिए। कारोबारी ने इस बात की शिकायत भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में दर्ज करा दी है। Unity Bank
आपको बता दें कि ब्याज के नाम पर लोगों का खून चूसने वाला महाजन ब्याज पर पैसे देने वाले को कहा जाता है। महाजन अपनी मर्जी से ब्याज के रेट तय करता है। हर शहर में सक्रिय इस प्रकार के महाजन हर महीने के हिसाब से ब्याज वसूलते हैं। यह ब्याज 3 प्रतिशत प्रति महीने से लेकर 20 प्रतिशत महीने तक होता है। इस प्रकार के लोगों से ब्याज पर पैसे लेने वाले लोगों को महाजन का कर्जा उतारने में पूरी उम्र लग जाती है। अनेक बार तो महाजन का कर्ज अगली पीढिय़ों को चुकाना पड़ता है। भारत के कानून में इस प्रकार के लेन-देन को गैर कानूनी घोषित किया हुआ है। यह गैर कानूनी धंधा वर्तमान में भी धड़ल्ले के साथ चलाया जा रहा है। इस गैर कानूनी धंधे को बैंक का नाम देकर यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक भी बाकायदा महाजन की तरह अवैध रूप से ब्याज की वसूली करने का कारोबार चला रहा है। Unity Bank
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