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यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक (Unity Small Finance Bank) एक बार फिर से चर्चा में है। हाल ही में यह खुलासा हुआ था कि यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक (Unity Small Finance Bank) के कर्ताधर्ता महाजन की तरह से अवैध ढंग से ब्याज वसूल कर रहे हैं।

Unity Small Finance Bank : यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक (Unity Small Finance Bank) एक बार फिर से चर्चा में है। हाल ही में यह खुलासा हुआ था कि यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक (Unity Small Finance Bank) के कर्ताधर्ता महाजन की तरह से अवैध ढंग से ब्याज वसूल कर रहे हैं। इस खुलासे के बााद यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक (Unity Small Finance Bank) के इतिहास की पड़ताल करने पर पता चला कि यह बैंक एक बड़े घोटाले की इमारत पर खड़ा हुआ है। 4355 करोड़ रूपए का घोटाला करने वाले पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (PMC) के विलय से यह यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक (Unity Small Finance Bank) चलाया जा रहा है। 4355 करोड़ रूपए का घोटाला करने वाले PMC के विलय के दम पर ही यूनिटी बैंक का पूरा कारोबार चल रहा है। Unity Small Finance Bank
आपको बता दें कि वर्ष-2019 में भारतीय रिजर्व बैंक ने पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (PMC) के बोर्ड को भंग कर दिया था। उसके बाद 22 नवंबर 2021 को PMC का पूरा विलय यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक (Unity Small Finance Bank) में कर दिया गया था। PMC के घोटाले का सिलसिला यूनिटी बैंक में भी जारी रहा। यूनिटी बैंक धीरे-धीरे मनमाना ब्याज वसूल करने वाला महाजन बन गया। वर्तमान में स्थिति यह है कि बाजार में सक्रिय महाजनों से भी ज्यादा ब्याज यूनिटी बैंक के कर्ता-धर्ता वसूल कर रहे हैं। Unity Small Finance Bank
उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में अपना कारोबार करने वाले एक बड़े कारोबारी ने यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक के नाम से सावधान रहने की अपील जारी की है। यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक को एक सामान्य बैंक मानकर उस बैंक से लोन लेने वाले कारोबारी ने दावा किया है कि यूनिटी कोई बैंक नहीं है बल्कि अवैध रूप से ब्याज वसूलने वाला महाजन है। कारोबारी ने यह भी बताया है कि यूनिटी बैंक के नाम पर अवैध रूप से मोटा ब्याज वसूले जाने के कारण अनेक कारोबारियों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। पुराने जमाने में महाजन लोग जिस प्रकार ब्याज की अवैध वसूली करते थे उसी प्रकार यूनिटी बैंक के नाम पर ब्याज के रूप में अवैध वसूली की जा रही है। Unity Small Finance Bank
यूनिटी बैंक से लोन लेकर ठगी का शिकार हुए कारोबारी ने बताया कि अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए उन्होंने किसी निजी बैंक से लोन लेने का फैसला किया था। एक एजेंट ने उनसे संपर्क करके यूनिटी बैंक में काम करने वाले कर्मचारियों से मिलवाया। उन कर्मचारियों ने प्रोपर्टी को गिरवी रखकर फटाफट लोन दिलवाने के लिए अच्छे सपने दिखाए। नोएडा के कारोबारी ने सभी जरूरी दस्तावेज यूनिटी बैंक वाले कर्मचारियों को दे दिए। यूनिटी बैंक वालों ने फटाफट 1 करोड़ 32 लाख रूपए का लोन Sanction कर दिया। इस लोन के लिए 31 अक्टूबर 2023 को Sanction Letterजारी कर दिया गया। कारोबारी का कहना है कि यूनिटी बैंक का यह लोन बड़ी ठगी का कारण बन गया। Unity Small Finance Bank
कारोबारी को यूनिटी बैंक ने लोन नम्बर APPL-00042943 के द्वारा जो Sanction Letter जारी किया उसे पढकऱ कारोबारी भौचक्का रह गए। लेटर में लोन का इंटरेस्ट रेट 15 प्रतिशत लिखा गया था। जब कारोबारी ने कहा कि उन्हें तो 8 या 9 प्रतिशत इंटरेस्ट रेट की बात बताई गई थी तो यूनिटी बैंक वालों ने कहना शुरू कर दिया कि हमारे बैंक में तो 13 से लेकर 22 प्रतिशत तक का इंटरेस्ट लगता है। कारोबारी ने लोन रद्द करने को कहा तो बताया गया कि लोन स्वीकृत होने के बाद रद्द नहीं हो सकता तथा आपकी प्रोपर्टी के कागजात भी आपको नहीं मिल सकते। मरता क्या ना करता कारोबारी को लोन लेना ही पड़ा। Unity Small Finance Bank
बात मोटे इंटरेस्ट रेट तक ही नहीं रूकी यूनिटी बैंक ने लोन देने के बदले मोटी प्रोसेसिंग फीस भी वसूल कर ली। कारोबारी ने बताया कि 1 करोड़ 32 लाख के लोन के लिए दो लाख 35 हजार रूपए प्रोपेसिंग फीस के नाम पर वसूल लिए गए। साथ ही इंश्योरेंस के नाम पर 5 लाख रूपए अलग से वसूल लिए गए। इस प्रकार लोन में से साढ़े दस लाख रूपए बैंक ने पहले ही काट लिए। इतना ही नहीं लोन के पैसों में से बैंक ने तीन लाख रूपए FD के नाम पर ले लिए। जब कारोबारी ने आपत्ति की तो उसे बताया गया कि अब एक साल तक तो आप कुछ नहीं कर सकते। एक साल बाद आप इस लोन के पैसे को जमा करके बैंक से अलग हो सकते हैं। Unity Small Finance Bank
भुक्तभोगी कारोबारी ने आगे बताया कि उसने पूरे एक साल तक यूनिटी बैंक को सवा तीन लाख रूपए महीना की किश्त का भुगतान किया। पूरे 12 महीने तक किश्तों के रूप में 39 लाख रूपए का भुगतान करने के बाद भी लोन की रकम उतनी की ही उतनी ही रही। एक साल पूरा होते ही कारोबारी ने यूनिटी बैंक को ई-मेल भेजकर लोन को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का आग्रह किया। दूसरे बैंक ने बेहद कम ब्याज दर पर लोन देने का आश्वासन दे दिया था। ई-मेल मिलते ही यूनिटी बैंक के अधिकारी कारोबारी के कार्यालय में पहुंच गए। उन्होंने बताया कि लोन दूसरे बैंक में ले जाने पर आपको फोर क्लोजर चार्ज के रूप में 20 लाख रूपए देने पड़ेंगे। जब कारोबारी ने मना किया तो यूनिटी बैंक वालों ने कहा कि हम आपका इंटरेस्ट रेट कम कर देते हैं। आप हमारे बैंक के साथ ही जुड़े रहो। तब यूनिटी वालों ने इंटरेस्ट रेट घटाकर 13.75 प्रतिशत कर दिया। कारोबारी को मजबूरन इसी रेट पर लोन चलाना पड़ा। फिर पूरे एक और साल तक यानि लगातार दो साल किश्तें देने पर भी लोन एमाउंट उतना का उतना ही बना रहा। दो साल पूरे होने पर जब कारोबारी ने बैंक बदलने की जिद्द ठान ली तो फोर क्लोजर के नाम पर यूनिटी वालों ने उस कारोबारी से 15 लाख रूपए जबरन वसूल कर लिए। कारोबारी ने इस बात की शिकायत भारतीय रिजर्व बैंक (RBI में दर्ज करा दी है। Unity Small Finance Bank
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