न नाम, न पहचान फिर भी चलती हैं ट्रेनें! जानिए भारत के बेनाम स्टेशन की कहानी
भारत
RP Raghuvanshi
04 Nov 2025 01:23 PM
भारत
RP Raghuvanshi
04 Nov 2025 01:23 PM
ट्रेन से सफर करने वाले हर यात्री ने प्लेटफॉर्म पर लगे पीले बोर्ड को जरूर देखा होगा। जिस पर स्टेशन का नाम, ऊंचाई और कोड लिखा होता है। लेकिन सोचिए, अगर वही बोर्ड खाली हो? न कोई नाम, न पहचान फिर टिकट किस नाम से बुक होगी? यात्री को कैसे पता चलेगा कि उनका स्टेशन आ गया? भारत में जहां हजारों रेलवे स्टेशन हैं नई दिल्ली, हावड़ा, चेन्नई जैसे मशहूर नामों वाले वहीं एक स्टेशन ऐसा भी है, जिसका कोई नाम ही नहीं। फिर भी वहां ट्रेनें आती हैं, टिकट बिकते हैं और लोग सफर करते हैं। Unnamed Station :
दो गांवों में नाम को लेकर चल रहा है विवाद
यह अनोखा स्टेशन पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित है। साल 2008 में इसका निर्माण हुआ था और तब से यह लगातार संचालन में है। रोज यहां से कई पैसेंजर ट्रेनें और मालगाड़ियां गुजरती हैं। रेलवे ने शुरू में इसका नाम रैनानगर रखा था। लेकिन पास के दो गांवों के बीच यह विवाद उठ गया कि स्टेशन का नाम किस गांव के नाम पर रखा जाए। मामला इतना बढ़ा कि कोर्ट तक पहुंच गया। जब तक फैसला नहीं आया, रेलवे ने बोर्ड से स्टेशन का नाम हटा दिया और तब से यह बेनाम रेलवे स्टेशन बन गया।
रविवार को बंद रहता है स्टेशन!
यह स्टेशन सिर्फ बेनाम नहीं बल्कि संडे हॉलिडे के कारण भी चर्चा में है। आमतौर पर देशभर में रेलवे स्टेशन 24*7 काम करते हैं, लेकिन यह स्टेशन रविवार को बंद रहता है। दरअसल, स्टेशन मास्टर को हर रविवार को बर्धमान जाकर टिकटों का हिसाब देना पड़ता है, इसलिए उस दिन कोई सेवा नहीं चलती। दिलचस्प बात यह है कि यहां बिकने वाले टिकटों पर स्टेशन का नाम रैनानगर छपा होता है, और इसी नाम से सिस्टम में बुकिंग होती है। रोजाना करीब 6 ट्रेनें यहां से गुजरती हैं, लेकिन सिर्फ बांकुड़ा-मासाग्राम पैसेंजर ट्रेन ही दिन में छह बार रुकती है।