UP DGP : यूपी में स्थायी डीजीपी के आसार नहीं, कार्यवाहक पर भी संशय
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 01:41 PM
UP DGP : लखनऊ। यूपी को अभी स्थायी डीजीपी मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं। कल यानि 31 मार्च को कार्यवाहक डीजीपी डीएस चौहान रिटायर हो जाएंगे। उन्होंने 11 महीने तक कार्यवाहक डीजीपी की जिम्मेदारी संभाली। इतने लंबे समय में भी यूपी सरकार राज्य के लिए स्थायी डीजीपी का नाम तय नहीं कर पाई है। फिलहाल तो कार्यवाहक के नाम पर भी संशय बरकरार है। इस बाबत राज्य सरकार पर कई सवाल उठ रहे हैं।
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बीते 11 महीने से यूपी की कानून व्यवस्था कार्यवाहक डीजी के सहारे चल रही है। इस पद पर तैनात डीएस चौहान के पास डीजी इंटेलिजेंस और डीजी विजिलेंस की भी जिम्मेदारी है। प्रदेश के इतिहास में शायद यह पहला मौका है, जब 11 महीने तक राज्य की कानून व्यवस्था किसी कार्यवाहक डीजी के भरोसे रही। बताया जाता है कि राज्य सरकार ने अब तक नए डीजीपी के लिए कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है, वाकई यह अचरज में डालने वाली बात है। ऐसे में एक अप्रैल से इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी, इस पर अभी संशय बरकरार है। डीएस चौहान के रिटायर होने के बाद डीजी इंटेलिजेंस और डीजी विजिलेंस के पद पर भी नए अधिकारियों की तैनाती होनी है, लेकिन इस बाबत भी अभी कोई चर्चा नहीं हो रही है।
बतायाा जाता है कि यूपी सरकार ने स्थायी डीजीपी के लिए अब तक अफसरों के किसी पैनल का प्रस्ताव केंद्र सरकार को नहीं भेजा है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि एक बार फिर कामचलाऊ डीजीपी से ही काम चलाना पड़ेगा। लेकिन, कार्यवाहक के तौर पर भी डीएस चौहान की जगह कौन लेगा, इस बाबत तमाम कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि अब तक किसी नाम का खुलासा नहीं हुआ है।
अब एक बड़ा सवाल गूंज रहा है कि यूपी का कार्यवाहक डीजीपी कौन बनेगा? प्रशासनिक हलकों से लेकर राजनीतिक क्षेत्र में भी इन दिनों यह सवाल पूछा जा रहा है। हर कोई यही क़यास लगा रहा है कि यूपी का अगला पुलिस महानिदेशक यानि डीजीपी कौन बनेगा?
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यूपी में पुलिस विभाग में तीन लाख से अधिक कर्मचारी और अधिकारी हैं। इसके बावजूद बीते 11 महीने में भी सरकार स्थायी डीजीपी की तलाश नहीं कर पाई। इसके पीछे राज्य और केंद्र के बीच खींचतान को जिम्मेदार माना जा रहा है। सियासी खींचतान के बीच राज्य की 24 करोड़ जनता को एक अदद स्थायी डीजीपी का इंतजार है। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि एक अप्रैल तक प्रदेश को स्थायी डीजीपी मिल जाएगा, लेकिन यह संभावना अब धूमिल होती दिख रही है।
अब से कोई एक महीना पहले यूपी में स्थाई डीजीपी की नियुक्ति की कवायद तेज हो गई थी। रेस में तीन नाम सामने आ रहे थे। उनमें शफी अहमद रिजवी का भी नाम था, लेकिन माना जा रहा है कि 1988 बैच के आईपीएस आफिसर आनंद कुमार रेस में सबसे आगे हैं। तब चर्चा थी कि यूपी पुलिस के नए डीजीपी के चयन के लिए सरकार संघ लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रही है। यह एक आवश्यक प्रक्रिया है। उस दौरान यह भी कयास लगाए जा रहे थे कि मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी डीएस चौहान एक बार फिर सेवा विस्तार के लिए जोड़तोड़ में लगे हैं। हालांकि तब इस बात को अधिकतर लोगों ने खारिज कर दिया था, लेकिन डीएस चौहान के रिटायर होने के एक दिन पहले तक स्थायी डीजीपी के लिए नामों का प्रस्ताव न भेजने से इस कयास को बल मिलने लगा है।
एक महीना पहले तक यह माना जा रहा था कि राज्य में प्रस्तावित नगर निकाय चुनाव से पहले पुलिस महकमे को उसका स्थायी मुखिया मिल जाएगा, लेकिन अब तक की प्रगति से तो यही लग रहा है कि विभाग को निराशा ही मिलेगी। बताया जाता है कि सरकार ने सितंबर-2022 में नए डीजीपी के चयन के लिए यूपीएससी को प्रस्ताव भेजा था, लेकिन यूपीएससी ने प्रस्ताव को कुछ आपत्तियों के साथ लौटा दिया था। यही कारण था कि डीएस चौहान को स्थायी डीजीपी के तौर पर नियुक्ति नहीं मिल सकी थी। नतीजतन वे 11 महीने से कार्यवाहक डीजीपी बने हुए हैं।
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