यूपी के इन दो जिलों ने शराब पीने में सबको पीछे छोड़ा
UP Liquor Sale News
भारत
चेतना मंच
01 Nov 2023 06:49 PM
UP Liquor Sale News : पिछले कुछ वर्षों से देखने में आ रहा है कि उत्तर प्रदेश के लोग अन्य प्रदेशों की अपेक्षा कुछ ज्यादा ही शराब पी रहे हैं। उनमें भी यूपी के दो ऐसे जिले हैं जहां सर्वाधिक शराब पी जाती है। यह नहीं है कि देश के सबसे बड़े राज्य होने के कारण ही यहां सबसे ज्यादा शराब पी जाती है। यहां शराब पीने को लोगों ने एक चलन सा बना लिया है। पिछले कुछ वर्षों में यहां शराब खपत में रिकार्ड वृद्धि देखी गई है। उत्तर प्रदेश के आबकारी विभाग के आकड़े बता रहे हैं कि प्रदेश में शराब की खपत 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की है। यह बढ़ी हुई खपत हाल के वर्षों में ही ज्यादा देखी गई है।
शराब बिक्री और खपत की रफ्तार बढ़ी
एक आकड़े के अनुसार, उत्तर प्रदेश के लोग प्रतिदिन सवा सौ करोड़ रुपये की शराब और बीयर गटक जा रहे हैं। इन आंकड़ों में अगर देखा जाए तो प्रदेश का शायद ही कोई ऐसा जिला है, जहां शराब और बीयर की डेली बिक्री ढाई-तीन करोड़ रुपये से कम होती हो। बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में शराब की खपत तेजी से बढ़ी है। मात्र दो साल पहले उत्तर प्रदेश में शराब की औसत खपत प्रतिदिन लगभग 85 करोड़ रुपये की थी। और आज मात्र एक जिले में ढाई से तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की शराब की बिक्री प्रतिदिन होती है। तो यह समझा जा सकता है कि बिक्री किस रफ्तार से बढ़ी है।
दो जिलों ने शराब की खपत में सबाको पीछे छोड़ा
यूपी में कई ऐसे जिले हैं, जहां शराब की डेली खपत 12-15 करोड़ रुपये है। और इन सबमें सबसे ज्यादा शराब की खपत करने वाले जिलों में नोएडा और गाजियाबाद ने सबको पीछे छोड़ दिया है। इन दो जिलों में प्रतिदिन 13 से 14 करोड़ रुपये की शराब व बीयर को लोग गटक जाते हैं।
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आगरा और लखनऊ भी होड़ में बने हुए हैं
पर्यटन का क्षेत्र आगरा और लखनऊ भी शराब की खपत में होड़ में बने हुए हैं। और बहुत पीछे नहीं हैं। पर्यटकों से गुलजार रहने वाला आगरा जिला भी बहुत पीछे नहीं है, आगरा में औसत रोजाना खपत 12-13 करोड़ रुपये की है। वहीं लखनऊ जिले में यह खपत 10-12 करोड़ रुपये डेली है। इसी तरह मेरठ और कानपुर भी दहाई अंकों का आंकड़ा रखते हैं। मेरठ के लोग हर रोज करीब 10 करोड़ रुपये की शराब पी रहे हैं, तो वहीं कानपुर में हर रोज 8 से 10 करोड़ रुपये की शराब की खपत हो रही है। वाराणसी भी 6-8 करोड़ रुपये की शराब की रोज खपत कर रहा है। इस तरह शराब गटकने में ये जिले भी होड़ में बने हुए हैं। ये आंकड़े आबकारी विभाग के एक अधिकारी के माध्यम से प्राप्त पुख्ता आंकड़े हैं।
शराब की मांग बढ़ने के कारण
हालांकि आबकारी अधिकारी का दावा है कि पिछले 2-3 साल के दौरान उत्तर प्रदेश के लगभग सभी जिले में शराब और बीयर की खपत बढ़ी है। मजेदार है कि शराब की खपत के कुल आंकड़े में 45 से 50 फीसदी योगदान देसी पीने वाले दे रहे हैं। आबकारी अधिकारी का कहना है कि कई कारण हैं, जो शराब की खपत को बढ़ा रहे हैं। एक तो लोगों की कमाई बढ़ रही है जिससे उनका जीवन स्तर सुधर रहा है। धीरे-धीरे शराब की सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ रही है और आबकारी विभाग की सख्ती से तस्करी पर अंकुश भी लगा है। और बहुत से लोग तो इसे स्टेटस सिंबल के रूप में लेते हैं।
पूरे भारत में शराब की खरीद बिक्री बढ़ी है
एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले वित्त वर्ष के दौरान भारत में लोगों ने करीब 40 करोड़ शराब की पेटियों की खरीदारी की। इसे औसत निकालें तो मतलब यह निकलता है कि वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान शराब के शौकीनों ने 750 एमएल की करीब 4.75 अरब बोतलें खरीद ली। बिक्री के आंकड़े बताते हैं कि शराब की मांग हर कैटेगरी में आई है। चाहे व्हिस्की हो या रम, ब्रांडी हो या जिन अथवा वोदका हर तरह की शराबें खूब बिकीं। इनमें भी प्रीमियम यानी अधिक कीमत वाली शराब की बिक्री कुछ ज्यादा ही रही। पीने वालों का चाहे जो हो लेकिन सरकार का राजस्व बढ़ाने में इसका अहम योगदान रहा है।
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