
UP News / लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि सरकार की योजनाओं के साथ जुड़कर कार्य कर करने में ही अभ्युदय की सार्थकता है। शुक्रवार को लोकभवन में आयोजित 'मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना' के अभ्यर्थियों के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने संस्कृत के श्लोक ‘अयोग्य: पुरुषो नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभ:’ के साथ अपनी बात को स्पष्ट किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई अयोग्य नहीं है केवल एक योग्य योजक का साथ चाहिए और प्रदेश के अभ्युदय कोचिंग संस्थान उस योजक के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अभ्युदय योजना की सराहना करते हुए कहा कि इस कोचिंग संस्थान में नवचयनित आईएएस, पीसीएस, पीपीएस, आईआईटी-जेईई और नीट में सफलता प्राप्त कर चुके अभ्यर्थी मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी से जुड़कर पढ़ा रहे हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योगी ने कहा कि कोविड कालखंड में बसंत पंचमी के दिन शुरू हुआ अभ्युदय कोचिंग संस्थान आज अच्छे परिणाम देता दिखाई दे रहा है। सरकार ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के विषय विशेषज्ञों को भी इस कोचिंग से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि सभी 75 जनपदों में संचालित इन कोचिंग संस्थानों की गुणवत्ता को हमें और बेहतर करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तकनीक इतनी आगे बढ़ चुकी है कि एक जगह बैठकर हम प्रदेश के सभी 75 जनपदों से जुड़ सकते हैं और इसके माध्यम से विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन अपने छात्रों को दिला सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1998 से लेकर 2020 तक समाज कल्याण विभाग कोचिंग चलाता था जिसके माध्यम से केवल 3-4 बच्चों का ही चयन हो पाता था।
पहली बार सरकार द्वारा चलाई जा रही इस नि:शुल्क कोचिंग सेवा से संघ लोक सेवा आयोग में 23 और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में 95 अभ्यर्थी चयनित हुए हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में संचालित एकलव्य विद्यालयों से भी जुड़े छात्रों का चयन आईआईटी-जेईई, नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रहा है।
योगी ने कहा कि समाज कल्याण विभाग ने पिछले छह वर्ष के अंदर अनेक रचनात्मक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि 2015-16 में अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों की छात्रवृत्ति अज्ञात कारणों से रोक दी गई थी, लेकिन उनकी सरकार ने आते ही इसके लिए बजट निर्धारित किया और 2015-16 और 2016-17 की छात्रवृत्ति छात्रों को भेजी गई।
योगी ने कहा कि उ.प्र. सरकार अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्र एवं छात्राओं को वर्ष में दो बार (26 जनवरी और दो अक्टूबर) छात्रवृत्ति दे रही है। UP News