UP News : दृष्टिहीन छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा देने के लिए अमेजॉन और एनएबी की अनूठी पहल
Amazon and NAB's unique initiative to provide better education to blind students
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 04:58 AM
Lucknow : लखनऊ। दृष्टिहीन और दृष्टिबाधित बच्चों के जीवन में शिक्षा की नयी अलख जगाने और उन्हें दिलचस्प तरीके से तालीम देने के लिए उत्तर प्रदेश में एक अनूठी पहल की गई है।
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अमेरिका की बहुराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी कंपनी अमेजॉन और देश में विभिन्न आयु वर्ग के दृष्टिहीन और दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं के शिक्षण की दिशा में काम कर रहे नेशनल एसोसिएशन फॉर ब्लाइंड (एनएबी) ने इस साल फरवरी में राजधानी लखनऊ के साथ-साथ गोरखपुर और बस्ती के 10 स्कूलों में ‘इको स्मार्ट स्पीकर’ के माध्यम से दृष्टिहीन बच्चों को शिक्षा देने की पायलट परियोजना शुरू की है। इसकी सफलता के बाद अब दिसंबर से परियोजना को विस्तार देते हुए 10 जिलों के 100 से ज्यादा स्कूलों में इसे लागू करने की तैयारी है।
एनएबी के प्रबंधन ट्रस्टी और उत्तर प्रदेश इकाई के प्रमुख एस के सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि अमेजॉन की मदद से दृष्टिहीन और दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं के लिए इस साल फरवरी में शुरू की गई पायलट परियोजना को विस्तार देते हुए अगले महीने से 10 जिलों के 100 से ज्यादा स्कूलों में इसे लागू किया जाएगा।उन्होंने दावा किया कि इससे 34 हजार से ज्यादा दिव्यांगों और सामान्य बच्चों को फायदा होगा।
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सिंह ने बताया कि इस परियोजना का फायदा एनएबी द्वारा अपने समावेशी शिक्षा कार्यक्रम के तहत संचालित स्कूलों और ‘बचपन डे केयर’ केंद्रों पर पढ़ने वाले बच्चों को होगा। अमेजॉन ‘इको स्मार्ट स्पीकर’ के रूप में एलेक्सा की मौजूदगी से उत्पन्न कौतूहल के कारण कक्षाओं में बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है। उनमें ज्यादा सवाल पूछने की ललक पैदा हुई है। बच्चों के अंदर मजेदार ढंग से पढ़ाई करने की इच्छा जगी है। सिंह ने बताया कि ‘इको स्मार्ट’ उपकरण खासतौर पर ऐसे लोगों के लिए बहुत मददगार साबित हुए हैं, जो दृष्टिहीन या दृष्टिबाधित हैं और जिन्हें चलने-फिरने में दिक्कत है। उन्होंने कहा कि अमेजॉन और एनएबी का यह गठबंधन दिव्यांग बच्चों के लिए समान और समावेशी शिक्षा हासिल करने के तमाम दरवाजे खोलता है।
एलेक्सा अमेजॉन इंडिया के कंट्री मैनेजर दिलीप आरएस ने बताया कि देश में जब कोविड-19 महामारी अपने चरम पर थी तो हम लोगों ने सोचा कि दिव्यांग छात्र-छात्राओं को कुछ ‘इको स्मार्ट’ उपकरण देकर देखते हैं कि उन्हें इसका क्या फायदा मिल रहा है। इसलिए हमने एनएबी के साथ मिलकर काम शुरू किया और वर्ष 2021 के अंत में उन्हें कुछ उपकरण दिए। उन्होंने कहा कि इसके बाद हमने कई महीनों तक उनके 10 शिक्षकों को इस उपकरण के माध्यम से पढ़ाने के लिए तैयार कर उन्हें मास्टर ट्रेनर बनाया। जब हमने इस संवादात्मक स्मार्ट उपकरण के माध्यम से शिक्षा देने के नतीजे देखे तो हमारे लिए भी कई आश्चर्यजनक चीजें सामने आईं।
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दिलीप आरएस ने कहा कि एलेक्सा कार्यक्रम को अपने नेटवर्क के स्कूलों में संचालित करने को लेकर एनएबी की सक्रियता बेहद उत्साहजनक है। हम उनके समावेशी शिक्षण कार्यक्रम से जुड़कर, शिक्षण को अधिक मजेदार बनाकर और बच्चों की बेहतर सहभागिता में योगदान देकर बहुत खुश हैं। उन्होंने बताया कि इस साल की शुरुआत में अमेजॉन ने एलेक्सा कम्युनिटी प्रोग्राम के तहत एनएबी की उत्तर प्रदेश इकाई के साथ काम आरंभ किया और लखनऊ, गोरखपुर और बस्ती जिलों के 10 स्कूलों तथा बचपन डे केयर केंद्रों में ‘इको स्मार्ट स्पीकर’ दान किए। इस पहल से 10 साल से कम उम्र के दो हजार से ज्यादा दिव्यांग और सामान्य बच्चों को नए तरीके से शिक्षा देने की कोशिश की गई।
लखनऊ स्थित बचपन डे केयर सेंटर की समन्वयक विजय लक्ष्मी मिश्रा ने बताया कि पायलट परियोजना के दौरान यह पाया गया कि एलेक्सा की मदद से बच्चे ‘वॉइस कमांड’ देकर यानी मुंह से बोलकर सामान्य ज्ञान से लेकर गणित, विज्ञान और इतिहास तक केसवाल पूछते हैं और फौरन ही उनका जवाब पाकर खुशी महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक भी ‘इको स्मार्ट’ उपकरण की प्रश्नोत्तरी, टाइमर और रिमाइंडर जैसी खूबियों का इस्तेमाल बच्चों को पढ़ाने में करते हैं। मिश्रा ने बताया कि एनएबी के शिक्षक दृष्टिहीनता के साथ-साथ अन्य तरह की भी दिव्यांगता का सामना कर रहे बच्चों को उनके घर जाकर पढ़ाने में ‘इको स्मार्ट’ उपकरण का इस्तेमाल करते हैं।
पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की शिक्षा ले रही दृष्टिबाधित छात्रा आंचल सैनी ने कहा कि ऐसे संवादात्मक शिक्षण मंच से उन बच्चों के लिए शिक्षण के नए दरवाजे खुल सकते हैं, जो दृष्टिहीनता या अन्य तरह की दिव्यांगता का सामना कर रहे हैं। एनएबी की उत्तर प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि कई बच्चों को अटेंशन डेफिसिट डिसऑर्डर होता है, जिससे वे एक जगह ध्यान नहीं लगा पाते। इसके लिए उनकी थेरेपी कराई जाती है। इस समस्या में भी ‘स्मार्ट इको’ उपकरण मददगार साबित हो सकता है।