
UP News : यूपी के कानपुर में कर्मचारी भविष्यनिधि संगठन (EPFO) में सीबीआई (CBI) की टीम ने पीएफ सेंटलमेंट के नाम पर कंस्ट्रक्शन कंपनी के संचालक से वसूली का खेल उजागर किया। सीबीआई के अफसरों ने शहर के सर्वाेदय नगर स्थित भविष्य निधि आयुक्त कार्यालय (EPFO) में छापा मारा और कार्यालय से ही कुछ दूरी पर प्रवर्तन अधिकारी विनीत मिश्रा को 60 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
आरोप है कि पीएफ इंस्पेक्टर विनीत मिश्रा गणपत कंस्ट्रक्शन कंपनी के संचालक अरविंद दुबे से लंबित पीएफ केस के सेटलमेंट के नाम पर 60 हजार रुपये की मांग कर रहे थे। कंपनी संचालक की शिकायत पर सीबीआई टीम ने कार्यालय से कुछ दूरी पर तीन गाड़ियों से घेराबंदी कर पीएफ इंस्पेक्टर के लिए जाल बिछाया था। विनीत मिश्रा के गिरफ्तार होने की जानकारी मिलते ही पूरे कार्यालय में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में ही कई कर्मी और अफसर कार्यालय से फौरन घर चले गए। हालांकि, सीबीआई टीम के अफसर पहले प्रवर्तन अधिकारी विनीत मिश्रा को कार्यालय लेकर आए और मौजूद आला अफसरों से कई घंटों तक पूछताछ की। विनीत की गिरफ्तारी की पुष्टि सीबीआई टीम के एक आला इंस्पेक्टर ने की। चर्चा है कि जल्द कई आला अफसरों की गिरफ्तारी हो सकती है।
सीबीआई की जो टीम सर्वाेदय नगर स्थित ईपीएफओ कार्यालय पहुंची थी, उसी टीम के अफसरों ने पिछले साल ईपीएफओ के प्रवर्तन अधिकारी अमित श्रीवास्तव को तीन लाख रुपये घूस के साथ अरेस्ट किया था। ऐसे में जैसे ही सीबीआई टीम के अफसर कार्यालय पहुंचे तो कई कर्मियों ने अफसरों को पहचान लिया और वह चुपचाप ही कार्यालय से निकल गए। कार्यालय के अंदर चर्चा है कि एक आला अफसर के कार्यकाल में एक साल के अंदर ही दो बार सीबीआई टीम के अफसरों ने छापा मारा और दो प्रवर्तन अधिकारियों को घूस लेते रंगे हाथों अरेस्ट किया। ईपीएफओ संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि कार्यालय में सालों तक कभी सीबीआई का छापा नहीं पड़ा, लेकिन जब से एक आला अफसर ने कुर्सी संभाल ली है, तब से कार्यालय की छवि लगातार धूमिल हो रही है।
सीबीआई ने गणपत कंस्ट्रक्शन कंपनी के संचालक से 60 हजार रुपये लेते पकड़े गए पीएफ इंस्पेक्टर विनीत मिश्रा के नौबस्ता स्थित आवास पर भी छापेमारी की। दो घंटे तक चली छापेमारी में सीबीआई के हाथ कई अहम दस्तावेज लगे हैं। सीबीआई अब पीएफ इंस्पेक्टर विनीत मिश्रा के सात साल के प्रवर्तन शाखा में कार्यकाल की फाइलों की जांच करेगी।
कर्मचारी भविष्यनिधि कार्यालय (ईपीएफओ) कार्यालय के पीएफ इंस्पेक्टरों द्वारा नियोक्ताओं से सेटलमेंट के नाम पर वसूली के खेल पहले भी पकड़े जा चुके हैं। सीबीआइ ने 25 अप्रैल 2022 को पीएफ इंस्पेक्टर अमित श्रीवास्तव को चौबेपुर के निजी स्कूल संचालक जयपाल सिंह से तीन लाख रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा था। इसके बाद भी ईपीएफओ के उच्चाधिकारियों ने प्रवर्तन शाखा में तीन साल से ज्यादा समय से जमे पीएफ इंस्पेक्टरों का तबादला नहीं किया। एक साल के अंदर दो पीएफ इंस्पेक्टरों के रिश्वतखोरी में पकड़े जाने के बाद कार्यालय के उच्चाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ईपीएफओ के निष्क्रिय नियोक्ताओं से पीएफ रिकवरी के नाम पर ही खेल होता है। हर माह केंद्रीयकृत सिस्टम से आटो जेनरेट होने वाली 500 निष्क्रिय नियोक्ताओं की सूची प्रवर्तन शाखा को वसूली में मदद करती है। क्षेत्रीय आयुक्त के आदेश के बाद प्रवर्तन अधिकारी नियोक्ताओं से पीएफ न जमा कराने के एवज में सेटलमेंट का खेल खेलते हैं। उन्हें नोटिस का जवाब देने व जांच के नाम पर उलझाकर परेशान किया जाता है। यही वजह है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की कार्रवाई के बाद प्रवर्तन शाखा के स्टाफ की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।