
Children taking drugs[/caption]
मैनपुरी जिला अस्पताल के डॉ. जेजे राम ने बताया कि पंचर जोड़ने वाली ट्यूब या बोनफिक्स नशे की हालत में जानलेवा या घातक हो सकते हैं। इसका विपरीत प्रभाव फेफड़े गुर्दा आदि पर सीधा पड़ता है। इंसान अपनी दिमागी संतुलन खो देता है, और पागल सा हो जाता है। उन्होंने बताया कि इन चीजों में मिथाइल, इथाइल, अल्कोहल मिली होती है, जो मानसिक रूप से इंसान को विकलांग बना देती है।
गाजियाबाद के डॉ. सीपी कश्यप बताते हैं कि ओमीनी फ्लूड जैसे घातक केमिकल फ्लूड सूंघने से मस्तिष्क का कॉमन सेन्स खत्म हो जाता है। यह बॉडी में कम्पन पैदा कर देता है, जिससे इस नशे में दौरों आदि का आना आम बात है। नशा करने वालों को न्यूरल या एनजाइटी डिप्रेशन में अंनसेंस हो जाता है, इसको फोकस नशा भी बोलते है, जिससे भूख लगनी बंद हो जाती है, और धीरे-धीरे शरीर की हड्डियां गलने लगती हैं।
गाजियाबाद के ही डॉ. आरके पोद्दार बताते हैं कि एंग्जायटी, अवसाद, निराशा व दुःख से जन्म लेती है। जब हम अपनी भावनाओं को अनदेखा करते हैं तो वे हमारे दुःख का कारण बनती है। ठीक इसी प्रकार, नजरअंदाज किए जाने पर अवसाद एंग्जायटी का रूप ले सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति को हर वक्त इस बात का डर लगा रहता है कि कुछ गलत होने वाला है। इसी प्रकार न्यूरल डिप्रेशन जो इन पदार्थों का मनोरंजक रूप से उपयोग करते हैं। यह आपको अधिक सुस्त बनाता है और मस्तिष्क की गतिविधियां भी धीमी हो जाती हैं।