UP News : निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की न्यूनतम पेंशन वृद्धि में कई मुसीबतें
Many problems in minimum pension increase of private sector employees
भारत
चेतना मंच
17 Mar 2023 08:20 PM
लखनऊ। सरकारी कर्मचारियों के लिये पुरानी पेंशन बहाली के ऐलान के बीच निजी सेक्टर में काम करने वाले लोगों की पेंशन बढ़ोत्तरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि न्यूनतम पेंशन बढ़ोत्तरी से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त भार बढ़ जायेगा। कहा जा रहा है कि सरकार फिलहाल इस पक्ष मे कोई निर्णय लेने के स्थित में नहीं है।
साल 2014 में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़े निजी सेक्टर के कर्मचारियों के लिये न्यूनतम पेंशन प्रतिमाह 1000 रुपये लागू की गयी थी। इस स्कीम के लिये सरकार को हर साल बजट मे प्राविधान करना पड़ता है। फिलहाल न्यूनतम पेंशन को देने में ही सरकार को सालाना लगभग 9,000 करोड़ की सब्सिडी देनी पड़ती है। न्यूनतम पेंशन को बढ़ाने पर इस सब्सिडी में और बढ़ोतरी करनी पड़ेगी।
वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस सब्सिडी के बोझ को बढ़ाना आसान नहीं होगा। इसलिये न्यूनतम पेंशन की बढ़ोत्तरी पर फ़ैसला नहीं हो पा रहा है। ऐसे में ओपीएस को लेकर राज्य सरकारें कितनी जिम्मेदारी उठा पाएगी, यह कहना मुश्किल है।
चालू वित्त वर्ष 2022-23 और आगामी वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में इस मद में 9167 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया। न्यूनतम पेंशन को बढ़ाने के लिए विभिन्न संगठनों की तरफ से लगातार मांग भी उठती रही है। श्रम मंत्रालय ने इस पर विचार करने के लिये वर्ष 2018 में एक कमेटी का गठन किया था। उस रिपोर्ट में न्यूनतम पेंशन 2000 रुपये प्रति माह करने की सिफारिश की गई थी। न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी को लेकर महाराष्ट्र में इन दिनों काफी प्रदर्शन हो रहे हैं। कर्मचारियों की मांग है कि उनकी न्यूनतम पेंशन कम से कम प्रतिमाह 7500 रुपये हो जाये।
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