
UP News : बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती अचानक क्रोधित हो गई हैं। उनके क्रोध का कारण प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन बिबेक देव रॉय बने हैं। देवरॉय के बयान से भडक़ी सुश्री मायावती ने टवीट करके केन्द्र सरकार से मांग की है कि अनर्गल लेख लिखने वाले बिबेक देव रॉय के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी अनर्गल बात करने का कोई दुस्साहस न कर सके।
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन बिबेक देव रॉय ने एक अखबार में लम्बा-चौड़ा लेख लिखा है। उस लेख में देव रॉय नया संविधान बनाने की मांग कर रहे हैं। मिंट अखबार में लिखे गए इस लेख पर बहुजन समाज पार्टी की मुखिया सुश्री मायावती ने सख्त आपत्ति व्यक्त की है। शुक्रवार को एक टवीट करके मायावती ने बिबेक देव रॉय के लेख पर आपत्ति जताई है।
बहुजन समाज पार्टी की मुखिया व दलित समाज की प्रखर नेता सुश्री मायावती ने दोपहर 12.00 बजे एक टवीट किया है। टवीट में सुश्री मायावती ने लिखा है कि "आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन बिबेक देव रॉय द्वारा अपने लेख में नए संविधान की वकालत करना उनका अधिकार क्षेत्र का खुला उल्लंघन है। जिसका केन्द्र सरकार को तुरंत संज्ञान लेकर जरूरी कार्यवाही करनी चाहिए, ताकि आगे ऐसी कोई अनर्गल बात करने का दुस्साहस न कर सके"। मायावती ने टवीट के दूसरे हिस्से में लिखा है कि "देश का संविधान इसकी 140 करोड़ गरीब, पिछड़ी व उपेक्षित जनता के लिए मानवतावादी एवं समतामूलक होने की गारंटी है, जो स्वार्थी, संकीर्ण व जातिवादी तत्वों को पसंद नहीं।" वे इस संविधान के जनविरोधी व धन्नासेठ समर्थक के रूप में बदलने की बात करते हैं जिसका विरोध करना सबकी जिम्मेदारी है।" मायावती के इस टवीट के बाद सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से फैल रहा है।
बसपा मुखिया सुश्री मायावती के टवीट के बाद आर्थिक सलाहकार परिषद की चेयरमैन बिबेक देव रॉय को गिरफ्तार करने की मांग उठ रही है। टवीट पर "हैशटैग एरेस्ट बिबेक देव रॉय" के नाम से इस संबंध में किए जा रहे टवीटर पर टेंऊड करने लगे हैं। अनेक यूजर्स अपने-अपने ढंग से इस मुददे पर टिप्पणियां कर रहे हैं। ज्यादातर यूजर्स का कहना है कि संविधान बदलने की मांग करने वाले मानसिक रूप से दिवालिया हो गए हैं। ऐसे लोगों का इलाज केवल पागलखाने में ही हो सकता है। देवरॉय को तुरंत गिरफ्तार कर पागलखाने में डाल देना चाहिए।
https://twitter.com/Mayawati/status/1692425190750236998?t=7iC2iTD44F-tW77FHD8xmQ&s=08आपको बता दें कि प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार बिबेक देव रॉय ने मिंट नामक अखबार में एक लम्बा संपादकीय लेख लिखा है। इस लेख में बिबेक देव रॉय यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि वर्तमान परिस्थितियों में संविधान को बदल दिया जाए चाहिए। उनके लेख का शीर्षक है- देयर इज केस फॉर वी द पीपुल टू इम्ब्रेस ए न्यू कंस्टीटयूशन (There is case for we the people to embrace a new constitution)। उनके लेख में जो लब्बोलुवाब आज सामने आ रहा है। वह यह है कि भारत में नया संविधान अपनाने का आधार दिखाई दे रहा है। लेख में वह कह रहे हैं कि वर्ष-1950 में हमने जो संविधान अपनाया था वह अब वैसा नहीं रह गया। इसमें ढ़ेर सारे संशोधन किए गए है। और संशोधन भी हमेशा अच्छे काम के लिए नहीं हुए हैं।
वे आगे लिखते हैं वर्ष-1973 से हमें बताया जाता रहा है कि संविधान का मूल ढंाचा बदला नहीं जा सकता है, भले ही संसद के जरिए लोकतंत्र की जो भी इच्छा हो। अगर इसके खिलाफ कुछ होगा तो अदालतें उसकी व्याख्या करेंगी। वे आगे लिखते हैं कि जहां तक मैं समझता हूं कि अदालत का 1973 का आदेश मौजूद संविधान संशोधन पर लागू होता है न कि नए संविधान पर। अपने लेख में बिबेक देव रॉय ने इसी प्रकार के अनेक तक व कुतर्क करते हुए वर्तमान संविधान को बदले जाने की वकालत की है। यह भी माना जा रहा है कि इस लेख के पीछे भारतीय जनता पार्टी व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कुछ नेताओं की सोच हो सकती है। पहले भी आरोप लगते रहते हैं कि भाजपा व RSS डा. भीमराव अंबेडकर द्वारा लिखित संविधान से छेड़छाड़ करके उसका स्वरूप बदलना चाहते हैं। UP News in hindi