UP News : मदरसे में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे नहीं जानते पीएम, सीएम का नाम और राष्ट्रगान
भारत
RP Raghuvanshi
15 Sep 2022 10:28 PM
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RP Raghuvanshi
15 Sep 2022 10:28 PM
Lucknow : लखनऊ। यूपी के योगी आदित्यनाथ सरकार के आदेश पर असम के बाद अब यूपी में अवैध रूप से चल रहे गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे का काम गुरुवार को शुरू हो गया। पहले दिन प्रदेश के आधा दर्जन जिलों में टीम ने सर्वे किया। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कृष्ण मुरारी ने बताया कि अभी सर्वे का काम किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद आगे कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आज लखनऊ, आगरा, मेरठ, इटावा, अमरोहा और प्रयागराज के मदरसों में सर्वे किया गया। प्रयागराज में 30 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त पाए गए हैं।
लखनऊ के नदवा कॉलेज में मौलवी से डेढ़ घंटे सवाल-जवाब किए गए। इसके बाद टीम सारे कागाजत लेकर चली गई। आगरा में बच्चों से राष्ट्रगान सुना गया, तो इटावा में सर्वे टीम ने 12 सवाल किए। मेरठ के लिसाड़ी गेट स्थित मदरसे में टीम पहुंची तो बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। सर्वे टीम सुबह 11 बजे लखनऊ के दारुल उलूम नदवा मदरसा पहुंची। यह मदरसा देश के बड़े मदरसों में शामिल है। यह मदरसा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष की देखरेख में चलता है। सर्वे टीम का दावा है कि जो 12 बिंदुओं पर जांच की गई, उसके सभी कागज दारुल उलूम नदवा के प्रधानाध्यापक ने दिखाया है। सर्वे के संबंधित सभी दस्तावेज की फोटो कॉपी ले ली गई है। इन दस्तावेजों के ओरिजिनल भी जांचे गए। हर बिंदुओं के कागज लिए गए हैं, जिसकी बाद में रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रशांत कुमार के नेतृत्व में टीम धनौली मदरसे में पहुंची। टीम ने यहां पर बच्चों की पढ़ाई को लेकर मुफ्ती से जानकारी ली। टीम मदरसे में करीब आधे घंटे तक रुकी। बच्चों को राष्ट्रगान के बारे में जानकारी नहीं थी। यहां कुछ बच्चे राष्ट्रगान सुना पाए। मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों से प्रधानमंत्री और उप्र के मुख्यमंत्री का नाम पूछा गया। कुछ बच्चे नाम नहीं बता पाए। बच्चों ने बताया कि उन्हें अंग्रेजी, हिंदी भी पढ़ाई जाती है। बच्चों से जब अंग्रेजी की कविता सुनने का कहा गया तो वो कविता नहीं सुना पाए। राष्ट्रगान सुनाने के लिए कहा, तो वो एक दूसरे के चेहरे देखने लगे। मदरसे के शिक्षक ने कहा कि जन गण मन सुनाओ, तब कुछ बच्चे राष्ट्रगान सुना पाए। बच्चों को यमुना नदी कहां से बहती है, ये भी जानकारी नहीं थी। मदरसे के मुफ्ती ने बताया कि टीम ने जब उन्हें सर्वे के लिए आने की जानकारी दी। तब तक मदरसे में बच्चों की छुट्टी हो चुकी थी। बच्चों को घर से बुलाया गया। सर्वे के दौरान बच्चों न तो बच्चों को पढ़ाया जा रहा था और न ही बच्चों के पास अपना बैग था।
जिलाधिकारी ने मेरठ सर्वे के लिए तीन टीम गठित की है। इसमें एक एसडीएम रैंक के अधिकारी के अलावा जिला अल्पसंख्यक अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भी शामिल हैं। टीम को मदरसों की सर्वे रिपोर्ट पहले डीएम को भेजनी होगी। जहां से जिला प्रशासन सर्वे रिपोर्ट को शासन को भेजेगा। 5 अक्टूबर तक टीम को रिपोर्ट एडीएम को देनी है। 10 अक्टूबर तक रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। 25 अक्टूबर तक रिपोर्ट शासन को भेजी जानी है।
इटावा में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे के लिए मदरसा तालीबुल कुरान, मोहल्ला कटरा शमशेर खां शहर टीम पहुंची। एसडीएम सदर विक्रम सिंह राघव के साथ जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सतीश कुमार मदरसों का सर्वे करने पहुंचे। भवन का आकार, बच्चों की संख्या, शिक्षकों की संख्या, मदरसों को आय का स्रोत, भवन में पानी, शौचालय की व्यवस्था को जांचा परखा जा रहा है। जिसके आधार पर 5 अक्टूबर तक जिलाधिकारी के माध्यम से इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जानी है। सतीश कुमार ने कहा कि सर्वे को लेकर फैली अफवाहों पर ध्यान न देकर गैर मान्यता प्राप्त मदरसे अपनी जानकारी अवश्य दें, जिससे उन्हें मान्यता देने में मदद मिल सके। मदरसा प्रबंधक मौलाना जाहिद रजा कादरी ने सरकार के इस कदम को सही बताते हुए कहा कि इससे हमें मान्यता लेने में मदद मिलेगी।
सर्वे पर उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन डॉ. इफ्तेखार जावेद ने कहा कि सर्वेक्षण कोई जांच नहीं है। उत्तर प्रदेश में कुल 16513 मान्यता प्राप्त मदरसे हैं। जिनमें से 560 मदरसों को सरकार उनके शिक्षकों व कर्मचारियों का वेतन देती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसे कितने मदरसे हैं जिनकी मान्यता नहीं है, उनकी गिनती नहीं हो पा रही है। समय-समय पर जब मदरसों पर उंगलियां उठती हैं तो फिर सवाल उठते हैं कि यह कौन-सा मदरसा है? क्या यह मान्यता प्राप्त मदरसा है या गैर-मान्यता प्राप्त मदरसा है या फिर अनुदान से चलने वाला मदरसा है?