बिहार से उत्तर प्रदेश को साधने का प्लान : योगी-अखिलेश में शह-मात का खेल
भारत
चेतना मंच
03 Nov 2025 02:03 PM
बिहार के रण में इस बार सिर्फ नीतीश बनाम लालू की लड़ाई नहीं है, बल्कि इसकी गूंज उत्तर प्रदेश तक सुनाई दे रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तक, बीजेपी के कई बड़े चेहरे इन दिनों बिहार की चुनावी रैलियों में डेरा जमाए हुए हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के ही अखिलेश यादव भी सीमावर्ती जिलों में सक्रिय होकर सियासी जवाब देने में जुटे हैं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बिहार की यह जंग दरअसल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की दिशा तय कर सकती है। बीजेपी और सपा दोनों ही दल बिहार के जरिए अपने राजनीतिक संदेश को उत्तर प्रदेश के मतदाताओं तक पहुंचाने में लगे हैं। UP News :
बिहार की बॉर्डर सीटों पर उत्तर प्रदेश की पकड़
बिहार की करीब तीन दर्जन विधानसभा सीटें उत्तर प्रदेश की सीमा से सटी हुई हैं। इन इलाकों का राजनीतिक और सामाजिक समीकरण एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, बलिया, गाजीपुर और चंदौली जैसे जिलों के लोग अक्सर बिहार के सीमावर्ती इलाकों में अपना प्रभाव रखते हैं। इसी वजह से बीजेपी ने उत्तर प्रदेश के दिग्गज नेताओं को बिहार भेजकर वहां की फिजा अपने पक्ष में करने की रणनीति बनाई है।
योगी और केशव की बिहार में तैनाती
पिछले एक हफ्ते से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बिहार के दरभंगा, सिवान और मोतिहारी जैसे इलाकों में लगातार सभाएं कर रहे हैं। वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बिहार में कैंप तक कर रखा है। बीजेपी के संगठन मंत्री से लेकर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, मंत्री दिनेश प्रताप सिंह और महेंद्र प्रताप सिंह तक रोजाना दो से तीन जनसभाएं कर रहे हैं। पार्टी का मकसद साफ है बिहार की हवा के सहारे यूपी में नैरेटिव तैयार करना।
बिहार से यूपी को संदेश
बीजेपी के रणनीतिकार मानते हैं कि अगर बिहार में प्रदर्शन बेहतर रहा तो इसका सीधा असर पूर्वांचल के वोटरों पर पड़ेगा। इसी तर्ज पर सपा भी एक्टिव है। अखिलेश यादव ने हाल ही में कहा था अवध में हराया है, अब सीमांचल की बारी है। यह बयान संकेत देता है कि सपा भी बिहार में अपनी मौजूदगी दिखाकर यूपी के सीमावर्ती जिलों में संगठन मजबूत करना चाहती है।
योगी का पलटवार, अखिलेश पर तंज
दरभंगा की एक जनसभा में सीएम योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए कहा, गांधीजी के तीन बंदर याद हैं- कुछ देखो मत, कुछ सुनो मत, कुछ बोलो मत... अखिलेश जी तो तीनों को एक साथ जी रहे हैं। योगी का यह बयान साफ संदेश देता है कि बीजेपी बिहार की धरती से यूपी की राजनीति का एजेंडा तय करना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार चुनाव के नतीजे पूर्वांचल की राजनीति पर सीधा असर डालेंगे। यह न केवल 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की झलक देंगे, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति भी तय करेंगे। बिहार बीजेपी के लिए अब सियासी प्रयोगशाला बनता जा रहा है जहाँ से उत्तर प्रदेश तक के वोटर को प्रभावित करने की कोशिशें साफ नजर आ रही हैं।UP Newsनोएडा में गर्लफ्रेंड बनकर इंजीनियर से ठगे 66 लाख