दहशत का दूसरा नाम था शंकर कन्नौजिया, 14 साल से फरार गैंगस्टर मुठभेड़ में ढेर
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:38 AM
यूपी में पूर्वांचल के तीन जिलों आजमगढ़, मऊ और गोरखपुर में दहशत का पर्याय बन चुका कुख्यात बदमाश शंकर कन्नौजिया आखिरकार पुलिस की गोली से ढेर हो गया। यूपी से करीब 14 साल से फरार यह अपराधी हत्या, लूट और अपहरण जैसी संगीन वारदातों में शामिल रहा। यूपी पुलिस ने उस पर पहले 50 हजार और बाद में एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। और अंतत: उसे यूपी पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया। UP News :
2005 से अपराध की राह पर
यूपी के आजमगढ़ जिले के रौनापार थाना क्षेत्र के हाजीपुर गांव का रहने वाला शंकर बचपन से ही मनबढ़ प्रवृति का था। पिता कपड़े धोकर और प्रेस कर किसी तरह घर चलाते थे, मगर शंकर ने पुश्तैनी काम छोड़ अपराध का रास्ता चुना। साल 2005 से ही छोटे-छोटे अपराधों में शामिल हुआ और धीरे-धीरे इलाके का बड़ा गैंगस्टर बन गया।
पहला मर्डर और खौफनाक अंदाज
2009 में महज 16 साल की उम्र में उस पर पहला मुकदमा दर्ज हुआ। दो साल बाद 2011 में इसने अपना पहला कत्ल किया। दोहरीघाट में लूट के दौरान जब विंध्याचल पांडेय ने विरोध किया, तो शंकर ने उनका गला रेतकर हत्या कर दी। यही उसका पहचान चिह्न बन गया। कांख में हथियार दबाकर अचानक हमला करना और गला काट देना। इसके बाद उसने कई वारदातों में लोगों की हत्या की। 2024 में महाराजगंज में शैलेंद्र सिंह का अपहरण कर लोडर गाड़ी लूट ली और उनका सिर धड़ से अलग कर दिया। इस वारदात के बाद उस पर इनाम दोगुना कर एक लाख कर दिया गया।
पुलिस के लिए चुनौती
तीन जिलों की पुलिस सालों तक उसके पीछे रही, मगर हर बार वह पलक झपकते गायब हो जाता। एसटीएफ ने उसकी कार्यशैली और पैटर्न का गहन अध्ययन किया और उस पर कड़ी निगरानी रखी। शनिवार रात एसटीएफ को सूचना मिली कि शंकर जहानागंज इलाके में किसी वारदात की फिराक में है। टीम ने घेराबंदी की और उसे जिंदा पकड़ने की कोशिश की। लेकिन शंकर ने पुलिस पर फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में वह मौके पर ही ढेर हो गया। जिस अपराधी का नाम सुनकर लोग सहम जाते थे, वह अब खत्म हो चुका है। एसटीएफ की इस सफलता के साथ ही पूर्वांचल की पुलिस ने 14 साल पुराने सिरदर्द को खत्म कर दिया है। UP News