
UP News / लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से बिजली आपूर्ति चरमरा गई है। वहीं प्रदेश सरकार भी हड़ताल कर रहे कर्मचारियों पर कड़ा एक्शन ले रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजली संकट पर अपने आवास पर इमरजेंसी बैठक की। जिसमें ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा सहित विद्युत विभाग के कर्मचारी शामिल रहे। उधर यूपी पॉवर कॉर्पोरेशन ने भी 19 लोगों को नोटिस जारी किया है।
बता दें कि लखनऊ, कानपुर, वाराणसी व मेरठ समेत कई शहरों में हड़ताल के चलते जबरदस्त संकट पैदा हो गया है। गोरखपुर और कानपुर में फैक्टरियों में औद्योगिक उत्पादन ठप हो गया। राजधानी लखनऊ का करीब एक-चौथाई हिस्सा बिजली संकट की चपेट में रहा। इस मामले में हाईकोर्ट भी सख्त हो गया है। उसने कर्मचारी नेताओं को तलब किया है। वहीं हड़ताल को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। विद्युत आपूर्ति को बहाल करने में सहयोग नहीं करने वाले कई कर्मियों को बर्खास्त किया गया। साथ ही एजेंसियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।
उत्तर प्रदेश में विभिन्न निगमों में आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए और संविदा पर कार्यरत करीब 650 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इनमें पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में 242, मध्यांचल के 110, पश्चिमांचल में 60 और दक्षिणांचल के 38 कर्मचारी भी शामिल हैं।
इसके अलावा एजेंसियों को नोटिस भी जारी की गई है। कॉरपोरेशन के चेयरमैन एम देवराज ने बताया कि गाजीपुर में बिजली आपूर्ति के लिए काम कर रही फर्म भारत इंटरप्राइजेज को अपने कर्मचारियों को उपस्थित न करा पाने के कारण फर्म के महाप्रबंधक एवं सुपरवाइजर राहुल सिंह के विरुद्ध कोतवाली गाजीपुर में एफआईआर दर्ज करा दी गई है। इसके अलावा छह अन्य एजेंसियों के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। देवराज ने कहा कि भविष्य में इन एजेंसियों को निगम में कार्य करने के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। सभी जिलों में अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि काम न करने वालों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए।