UP News : बेहद गहरी हैं नकल माफिया और अफसरों के गठजोड़ की जड़ें
The roots of the nexus of the copying mafia and officers are very deep
भारत
चेतना मंच
07 Nov 2022 11:06 PM
UP News : लखनऊ। भाजपा शासित मध्य प्रदेश व्यापम घोटाले के लिए सुर्खियों में रहा और उत्तर प्रदेश भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने को लेकर चर्चाओं में बना हुआ है। साल-2017 में जब से यूपी में योगी सरकार आई है, तब से भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने के सारे रिकार्ड ध्वस्त हो गए हैं। अब इस समय बिना नीट परीक्षा पास किए ही सरकारी और गैर सरकारी आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथिक कॉलेजों में दाखिले का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। हालांकि यह मामला साल-2021 का है, लेकिन इसका खुलासा अब हुआ है। योगी सरकार के अब तक के कार्यकाल में एक-दो नहीं, आठ से अधिक भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। इससे हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। नकल माफिया और बड़े अफसरों के सिंडिकेट की जड़ें इतनी गहरी हैं कि उन्हें तोड़ना पत्थर से पानी निकालने जैसा ही है। इन हालातों को देखकर ऐसा लगता है, जैसे यूपी में पूरा एजुकेशन और भर्ती सिस्टम ही ध्वस्त हो गया है। आइये आपको ले चलते हैं अतीत की ओर, जहां झांकने से हो सकता है आप दहशत मंे आ जाएं, क्योंकि यह प्रदेश के युवाओं की जिंदगी से जुड़ा हुआ मसला है।
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तत्कालीन सपा-बसपा की सरकारों में भर्ती घोटाले ने प्रदेश के लाखों युवक युवतियों को सदमा पहुंचाया। तब योगी आदित्यनाथ ने इस हालात को बदलने का वादा किया, जिस पर युवा पीढ़ी ने उन पर भरोसा किया। लेकिन, सत्ता पर आसीन होने के चार महीने बाद ही 21 नवंबर-2021 को उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटेट) स्थगित कर दी गई है। परीक्षा से कुछ देर पहले पेपर लीक होने के बाद यूपी सरकार ने एग्जाम स्थगित किया।
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने 25 और 26 जुलाई 2017 को ऑनलाइन दारोगा भर्ती परीक्षा (सीबीटी) आयोजित की, लेकिन उससे पहले ही इसे स्थगित कर दिया गया। कारण था वॉट्सऐप पर पेपर का लीक होना। उत्तर प्रदेश पुलिस में दारोगा पद पर सीधी भर्ती के लिए रिक्त 3307 पदों पर 2017 में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने ऑनलाइन परीक्षा का फैसला किया था। ऑनलाइन परीक्षा 13 जुलाई से शुरू हुई थी, जो 31 जुलाई तक होनी है। 3307 पदों में पुरुषों के लिए 2400 पद, महिलाओं के लिए 600 पद, पीएसी के प्लाटून कमांडर के लिए 210 पद और अग्निश्मन अधिकारी के 97 पद थे। इन 3307 पदों के लिए 20 लाख से ज्यादा युवाओं ने आवेदन किया था, जिनमें बोर्ड ने करीब नौ लाख आवेदकों को ऑनलाइन परीक्षा के लिए आमंत्रित किया था। 25 और 26 जुलाई को 1.20 लाख आवेदकों को परीक्षा देनी थी, लेकिन यह निरस्त कर दी गई थी।
लंबे इंतजार के बाद उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी यूपीपीसीएल में 2849 पदों पर भर्ती आई। अलग-अलग पदों पर हजारों वैकेंसी थी। फॉर्म भरे, फीस भरी, एडमिट कार्ड लेकर, चप्पल पहनकर पेपर देने गए। भटक-भटक के सेंटर ढूंढे, क्योंकि ऑनलाइन परीक्षा थी। सेंटर ऐसे इंस्टीट्यूट्स पर गए थे जहां कंप्यूटर हों। ऐसे इंस्टीट्यूट गली-कूचे में थे। फिर भी बच्चे समय पर पहुंचे और पेपर दिया, लेकिन फिर वही, पेपर लीक। एसटीएफ को जांच में लगाया गया। बस इतना पता चला कि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है। एग्जाम रद्द कर दिया गया।
सितम्बर 2016 सपा की सरकार थी। यूपीएसएसएससी लोअर सबॉर्डिनेट की 641 जगह निकली। 67 हजार 500 युवाओं ने धड़ल्ले से फॉर्म भर डाले। एग्जाम की तैयारी भी शुरू कर दी। पर दो साल तक कोई डेट नहीं आई। एक लम्बे इंतजार के बाद 15 जुलाई 2018 को एग्जाम हुआ। बस 31 हजार लड़के-लड़कियों ने ही एग्जाम दिया। वो भी पेपर लीक होने की वजह से रद्द कर दिया गया।
सितम्बर 2018 को ट्यूबवेल ऑपरेटर के लिए एग्जाम होना था। इसके 3210 पदों के लिए 20 लाख 5 हजार 376 फॉर्म सपा सरकार में ही भर दिए गए थे। पर फिर वही कहानी- पेपर लीक हुआ और एग्जाम पोस्टपोन हो गया।
मई 2018 में 1953 पदों पर ग्राम विकास अधिकारी की भर्ती निकली। दिसम्बर 2018 में पेपर भी हुआ। 9.1 लाख स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी। सब ठीक चल रहा था। अगस्त 2019 में रिजल्ट भी आ गया। लगभग डेढ़ साल बीतने के बाद भर्ती रद्द कर दी गई। वजह रिजल्ट के बाद धांधली।
अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड की ओर से कराई जा रही पीईटी यानि प्रारंभिक प्रात्रता परीक्षा का पेपर लीक हो गया था। पूरे प्रदेश के 75 जिलों में 70 हजार सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में परीक्षा कराई जा रही थी। लेकिन, परीक्षा का प्रश्न पत्र आउट होने के बाद अधिकारियों के होश उड़ गए।
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में 6 अगस्त 2021 को संयुक्त प्रवेश परीक्षा बीएड 2021-23 की परीक्षा आयोजित की गई। इस परीक्षा के पहली शिफ्ट का पेपर होने के बाद चर्चा तेज हुई कि परीक्षा का पेपर लीक हो गया है। कुछ वॉट्सऐप ग्रुप पर पेपर वायरल होने लगा। हालांकि सरकार ने जांच कराई तो यह पेपर लीक का मामला फर्जी मिला।
मेडिकल की पढ़ाई के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा नेशनल एलिजिबिलिटी कम एन्ट्रेंस टेस्ट की परीक्षा से एक दिन पहले ही पेपर लीक के दावे किए जा रहे थे। पेपर 12 सितंबर को होना था। 11 सितंबर को कई ट्विटर यूजर दावा कर रहे हैं कि इस परीक्षा का प्रश्न पेपर लीक हो गया है। हालांकि, अधिकारियों ने पेपर लीक का खंडन करते हुए इसे फेक न्यूज बताया था।
इसके अलावा अगस्त 2018 में स्वास्थ्य विभाग प्रोन्नत पेपर लीक हुआ था। 41,520 सिपाही भर्ती का भी पेपर लीक हुआ था। जुलाई 2020 को 69 हजार शिक्षक भर्ती पेपर लीक होने का आरोप लगा। अक्टूबर 2021 सहायता प्राप्त स्कूल शिक्षक/प्रधानाचार्य पेपर लीक
हुआ था। इसके अलावा एनडीए और एसएससी के भी पेपर लीक होने के आरोप लगे थे।
ये सिर्फ एक बानगीभर हैं। और भी कई ऐसी परीक्षाएं हैं, जिनके पेपर लीक हुए। हालांकि सरकार ने इन मामलों में कई अफसरों पर कार्रवाई की, लेकिन वह नाकाफी ही साबित हुई। इस मसले पर विरोधी दल सरकार को निशाने पर लेते रहते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद साफ-सुथरी छवि के हैं, लेकिन वह उनके इर्द गिर्द ऐसे लोगों का जमावड़ा है, जो सरकार की छवि को बट्टा लगाने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देते हैं। आरोपी यह भी लगते हैं कि नकल माफिया की जड़ें इतनी गहरी हैं कि उसका अंत ढूंढना पत्थर से पानी निकालने जैसा है। आरोप तो यह भी लगते हैं कि नकल माफिया और बड़े अफसरों का एक ऐसा सिंडिकेट है, जिसे तोड़ना सरकार के बूते में नहीं है।