UP Political News : निशाना-2024 : यूपी में 18 ओबीसी जातियों को एससी बनाने की तैयारी
भारत
चेतना मंच
03 Sep 2022 05:45 PM
Lucknow : लखनऊ। साल, 2024 में प्रस्तावित आम चुनाव (proposed general election in 2024) की बिसात बिछने लगी है। उसी के मद्देनजर यूपी सरकार (UP government) ने ओबीसी (OBC) की 18 जातियों (18 castes) को एससी कैटेगरी (SC Category) में शामिल करने की तैयारी अभी शुरू कर दी है। यूपी में लोकसभा की 80 सीटों पर ओबीसी और एससी वोटरों की संख्या को देखते हुए उन्हें अपने खेमे में लाना बीजेपी (BJP) की पहली प्राथमिकता है। माना जा रहा है कि अगले मानसून सत्र (monsoon session) में विधानसभा (Assembly) के दोनों सदनों से प्रस्ताव पास कराकर केंद्र सरकार को भेजने की तैयारी की जा रही है। लेकिन, बड़ा ब सवाल है कि बीते 17 सालों से चल रहे इस मामले को योगी सरकार कैसे हल करेगी।
साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा उत्तराखंड की तर्ज पर यूपी में 13 फीसदी आबादी वाली इन जातियों पर बड़ा दांव चलने की तैयारी में है। इन जातियों का 50 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर सीधा असर है। इस मुद्दे पर लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे दलित-शोषित वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष संतराम प्रजापति का कहना है कि उत्तराखंड में शिल्पकार जाति समूह को अनुसूचित जाति वर्ग का आरक्षण दिया गया। इसके लिए तत्कालीन उत्तराखंड सरकार ने 16 दिसंबर, 2013 को अनुसूचित संविधान आदेश 1950 को ही री-सर्कुलेट किया। उसी जाति समूह में केवट भी है। वहां आज भी उसी आधार पर प्रमाणपत्र बन रहे हैं। कोई तकनीकी पेंच भी नहीं फंसा।
माना जा रहा है कि राज्य सरकार इसके लिए विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में इन जातियों को आरक्षण देने का प्रस्ताव पास कर सकती है। जिसे संसद के दोनों सदनों से पारित करने के लिए केंद्र को भेजा जाएगा। इसके साथ ही एक विकल्प ये भी है कि रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मझवार और भर की जातियों को ठीक से परिभाषित करके सभी राज्यों को उनकी सभी उपजातियों को एससी के दायरे में शामिल करने के लिए अधिसूचित कर दिया जाए। कारण यह कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में ये जातियां अनुसूचित जाति की श्रेणी में पहले से हैं। यूपी में भाजपा सरकार इन दो विकल्पों पर विचार कर रही है। इसीलिए सरकार ने हाईकोर्ट में काउंटर एफिडेविट दाखिल नहीं किया था। सरकार ने जानबूझ कर ऐसा किया, ताकि नोटिफिकेशन रद्द हो जाए। आगे की कार्रवाई में कोई कानूनी अड़चन न रहे। अगर मामला कोर्ट में लंबित होता तो फिर सरकार को इंतजार करना पड़ता। यूपी सरकार इस मसले को 2024 लोकसभा चुनाव से पहले सुलझाना चाहती है।
ओबीसी की 18 जातियों को एससी में शामिल कराने की ये कोशिश पिछले 17 सालों से चल रही है। सबसे पहले साल 2005 में तब के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार ने इस मामले में अधिसूचना जारी की थी। तब 17 ओबीसी जातियों को एससी में शामिल करने की अधिसूचना जारी हुई थी, लेकिन उस समय भी कोर्ट ने मुलायम सरकार के फैसले पर रोक लगा दी थी। यूपी में 2007 में चुनाव हुए। मुलायम सत्ता से बाहर हो गए। मायावती के हाथ में प्रदेश की कमान आई। दलित राजनीति का चेहरा मायावती को ओबीसी जातियों को एससी में डाले जाने का फैसला मंजूर नहीं था। उन्होंने इस फैसले को खारिज कर दिया। केंद्र सरकार को पत्र लिखकर कहा कि ओबीसी श्रेणी की 17 जातियों को हम एससी कैटेगरी में डालने को तैयार हैं, लेकिन दलितों के आरक्षण का कोटा 21 से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया जाए। यह आरक्षण का पूरा स्ट्रक्चर बदलने का प्रस्ताव था। ऐसे में मामला अटक गया।
इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी सरकार के आखिरी दिनों में 22 दिसंबर 2016 को 18 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने की अधिसूचना जारी की थी। अखिलेश सरकार की तरफ से सभी जिले के कलेक्टरों को आदेश भी जारी कर दिया गया था कि इन जातियों के सभी लोगों को ओबीसी की बजाय एससी का सर्टिफिकेट दिया जाए। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 24 जनवरी 2017 को इस अधिसूचना पर रोक लगा दी।
चौथी बार मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ ने 2019 में अधिसूचना जारी की। इस बार 31 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार की अधिसूचना पर रोक लगा दी है। हालांकि अब एक बार फिर योगी सरकार इसे नए सिरे से इसे अंजाम तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है। इसकी बड़ी वजह है साल, 2024 में होने वाला लोकसभा चुनाव। पार्टी को लगता है कि इन 18 ओबीसी जातियों को एससी में शामिल करवा कर इसका फायदा पूर्वांचल में उठा सकते है।
पूर्वांचल में निषाद, मल्लाह, राजभर आदि जातियां कई जिलों में तमाम सीटों पर निर्णायक साबित होते रहे हैं। इसे देखते हुए भाजपा निषाद पार्टी, अपना दल एस को साथ लिया है और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को फिर साथ रखना चाहती है। यदि लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने इन 18 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का आरक्षण दिला दिया तो पूर्वांचल में भाजपा को बड़ा फायदा मिल सकता है।