UP Politics : ठाकुर अमर सिंह के द्वारा पूंजीवाद की बड़ी साजिश का शिकार हुए थे मुलायम सिंह यादव
Mulayam Singh Yadav was the victim of a big conspiracy of capitalism by Amar Singh
भारत
RP Raghuvanshi
30 Nov 2025 11:12 AM
भारत
RP Raghuvanshi
30 Nov 2025 11:12 AM
घोर निराशा में, आशा का दीप जला कर चले गए,दीन दुखी के जीवन में, उम्मीद जगाकर चले गए,गांधी, लोहिया के सपनों की याद दिला कर चले गए,सबका हृदय जीत लेने की कला सिखाकर चले गए,सहमति और असहमति पर एक सेतु बना कर चले गए,किन्तु, शिकायत है असमय में हाथ छुड़ाकर चले गए।
ये पंक्तियां दुनिया के प्रसिद्ध कवि व शायर उदय प्रताप सिंह ने अपने सबसे प्रिय शिष्य मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि देते हुए लिखी है। ऐसा लग रहा है कि मानो धरती पुत्र के नाम से प्रसिद्ध नेता जी के सम्मान से विभूषित अपने शिष्य का पूरा जीवन दर्शन गुरुजी ने मात्र 6 पंक्तियों में रेखांकित कर दिया हो। खैर, आज जब देश की राजधानी दिल्ली में हम इस आलेख को लिख रहे हैं। ठीक उसी समय दिल्ली से मात्र 350 किलोमीटर दूर सैफई गांव में समाजवाद के इतिहास पुरुष मुलायम सिंह यादव का अंतिम संस्कार चल रहा है। भीड़ है, लोग हैं, नेता हैं, नारे हैं, फूल हैं, भावुकता है, लेकिन यदि कोई नहीं है तो नहीं है 5 दशक से भी अधिक समय तक भारत में समाजवाद का झंडा बुलंद रखने वाले गांव, गरीब, झोपड़ी, भूखे, दबे, कुचले की आवाज को सत्ता के शिखर तक ले जाने वाले नेता जी, नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव। नेताजी को नेताजी की उपाधि किसी राज सत्ता अथवा नेता ने नहीं दी थी, यह उपाधि उन्हें दी थी उनसे प्यार करने वाले ढेर सारे किसानों, गरीबों, मजदूरों एवं मजलूमों ने। आइये! समाजवाद के उस पुरोधा को अंतिम नमन करते हुए उनके जीवन को जानने का प्रयास करते हैं।
UP Politics :
मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक सफर की शुरुआत बड़े संघर्ष के बीच शुरू हुई। वह महज 28 साल की उम्र में पहली बार विधायक बन गए थे। इमरजेंसी के दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया और वह 19 महीने तक जेल में रहे। साल 1977 में वह पहली बार राज्य मंत्री बने। 1980 में उत्तर प्रदेश में लोक दल के अध्यक्ष बने, जो बाद में जनता दल बन गया। मुलायम सिंह यादव 1989 में पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, लेकिन 1991 में कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई। इस वक्त तक नेताजी युवा तुर्क रहे चंद्रशेखर की पार्टी जनता दल सोशलिस्ट पार्टी में थे। साल 1992 में उन्होंने अपनी समाजवादी पार्टी की नींव रखी और साल 1993 में ही उन्होंने ऐसा राजनीतिक दांव चला, जिससे उत्तर प्रदेश में बीजेपी सत्ता में वापसी नहीं कर पाई। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन हो गया। राज्य में मुख्यमंत्री रहते हुए केंद्र में प्रमुख भूमिका निभाने की इच्छा को लेकर उन्होंने 2004 में मैनपुरी से लोकसभा का चुनाव लड़ा। उन्होंने यह सीट जीती और पार्टी का प्रदर्शन भी शानदार रहा। मुलायम सिंह यादव एक ऐसे नेता थे जो अपने करीबियों को हमेशा साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे। और वह अपने हर नेता या साथी को हमेशा विश्वास में रखते थे।
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बेहद अभाव भरे परिवार में जन्म लेकर भूख व गरीबी के दर्द को जीने वाले मुलायम सिंह यादव भारतीय समाजवाद के सच्चे जनक राम मनोहर लोहिया के असली अनुयाई थे। किसानों और मजदूरों को जगाकर दिल्ली के सिंहासन तक ले जाने वाले चौधरी चरण सिंह के वे सच्चे वारिस भी थे, किन्तु पूंजीवाद की एक साजिश से जीते जी मुलायम सिंह यादव को बड़ा धक्का लगा। यदि वह साजिश ना हुई होती तो मुलायम सिंह का निधन केवल तीन बार के पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं हुआ होता। बल्कि, वे देश के प्रधानमंत्री बने होते और यह भी हो सकता था कि आज भी प्रधानमंत्री होते।
आप कहेंगे कि ऐसा कैसे हो सकता था? बताता हूं, दरअसल गांव, गरीब, दलित, भूखे, पिछड़े, शोषित जैसे तमाम वे वर्ग, जिनसे मिलकर भारत का बहुजन समाज यानि सबसे अधिक जनसंख्या वाला समाज बनता है। इस बहुजन समाज की देश में कुल आबादी 80 प्रतिशत है। यह पूरा समाज धीरे-धीरे मुलायम सिंह यादव को नेता मानने लगा था। उसी समय एक साजिश के तहत पूंजीवादी व्यवस्था का प्रतीक रहे अमर सिंह नामक एक विलेन नेता जी के मित्र बन गए। जी हां, वही अमर सिंह जिसे खुल्लम-खुल्ला अनिल अंबानी जैसे पूंजीपतियों का दलाल माना जाता था। इसी अमर सिंह ने समाजवाद के सच्चे पुरोधा को पूंजीवाद की तरफ धकेल डाला, फिर सारे देश ने देेखा ही है कि ना तो मुलायम समाजवादी रह पाए और ना ही पूरी तरह पूंजीवादी बन पाए। हां, जनता ने उनका हाथ जरूर छिटक दिया। फिर जो हुआ वह आपके सामने है।
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आज धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि देते हुए देश में गांव व गरीब की राजनीति करने वाले प्रत्येक राजनीतिक कार्यकर्ता खासतौर से मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव को यह प्रण लेना पड़ेगा कि यदि कभी उन्हें नेता जी की ऊंचाई तक जाने का अवसर मिला तो वे पूंजीवाद की साजिशों से सावधान रहेंगे और भारत की असली समस्या गांव, गरीब, भूखे एवं झोपड़ी को केन्द्र में रखकर ही राजनीति करेंगे।