
UP Politics: महाराष्ट्र और बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी भूचाल सा आ गया है। यूपी में भी सत्ता परिवर्तन को लेकर दांव पेंच की राजनीति खेली जा रही है। कहा जा रहा है कि सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और यूपी सरकार में योगी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को यूपी का सीएम बनने का ऑफर दिया गया है। अखिलेश के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कई प्रकार की चर्चाएं हो रही है।
दरअसल, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने अपने एक बयान में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को 100 विधायकों के साथ पाला बदलने पर मुख्यमंत्री बनाने का ऑफर दे दिया। एक न्यूज चैनल को दिए साक्षात्कार में अखिलेश यादव ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा था कि केशव प्रसाद मौर्य बहुत कमजोर आदमी हैं। उन्होंने सपना तो देखा था मुख्यमंत्री बनने का। आज भी ले आएं 100 विधायक। अरे बिहार से उदाहरण लें न वो। जो बिहार में हुआ वो यूपी में क्यों नहीं करते हैं? अगर उनमें हिम्मत हैं और उनके साथ विधायक हैं। एक बार तो वो बता रहे थे कि उनके पास 100 से ज्यादा विधायक हैं। आज भी विधायक ले आएं समाजवादी पार्टी समर्थन कर देगी उनका।
अखिलेश यादव का बयान आते ही राजनीतिक दलों में हलचल मच गया। एक के बाद एक भाजपा नेताओं के बयान आने शुरू हो गए। खुद केशव प्रसाद मौर्य ने पलटवार किया। केशव मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव मुझसे घृणा करते हैं। विधानसभा में अखिलेश का प्यार मेरे प्रति सबने देखा है। अखिलेश यादव खुद डूबने वाले हैं वो मुझे क्या मुख्यमंत्री बनाएंगे?
केशव ने कहा कि अखिलेश सामंतवादी मानसिकता के बन चुके हैं। समाजवादी पार्टी नाम की कोई पार्टी नहीं है। एक परिवार की पार्टी है। उनके दावे में कोई दम नहीं है। भाजपा अपने आप में इतनी मजबूत पार्टी है, जिसको किसी के सहारे की जरूरत नहीं है। हमारे गठबंधन के जो साथी हैं, वो हमारे साथ हैं। उनके साथ मिलकर हम सरकार चला रहे हैं।
आपको बता दें कि अभी भाजपा की अगुआई वाली एनडीए के पास 272 विधायकों का समर्थन है। इसमें भाजपा के 254, अपना दल (एस) के 12 और निषाद पार्टी के छह सदस्य शामिल हैं। जबकि सपा के पास 119 विधायकों का समर्थन है। इसमें सपा के 111 और आरएलडी के आठ विधायक शामिल हैं।
अगर पाला बदलने वाले भाजपा के 100 विधायक इस्तीफा भी दे देते हैं तब भी समीकरण भाजपा के ही पक्ष में रहेगा। दरअसल, इस स्थिति में सदन में कुल विधायकों की संख्या घटकर 303 हो जाएगी। ऐसे में बहुमत का आंकड़ा भी घटकर 152 कर रह जाएगा। 100 विधायकों के इस्तीफे के बाद भी भाजपा के 154 विधायक रहेंगे जो बहुमत के आंकड़े से ज्यादा हैं। इसके साथ ही भाजपा के पास अपना दल और निषाद पार्टी के विधायकों का भी समर्थन है।